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अंधेर नगरी: कोर्ट का कोई स्टे नहीं, फिर भी 5000 वर्गफुट के अवैध साम्राज्य पर मेहरबान रायपुर नगर निगम,क्या ‘कम्पाउंडिंग’ के महाखेल के लिए दिया जा रहा है समय?

अवैध निर्माण पर मेहरबानी या भ्रष्टाचार की 'क्रोनोलॉजी'? कोर्ट का कोई स्टे नहीं, फिर भी बुलडोजर चलाने से कतरा रहे निगम के अफसर।







रायपुर । छत्तीसगढ़ की राजधानी का नगर निगम इन दिनों ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ की कहावत को चरितार्थ कर रहा है। रायपुर नगर निगम के जोन कार्यालयों और राजस्व अमले की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर भ्रष्टाचार और भू-माफियाओं से गहरी सांठगांठ के गंभीर आरोप लग रहे हैं। मामला ग्राम चिरहुलडीह (पटवारी हल्का नंबर 52, रा.नि.मं. रायपुर-03) का है, जहां लगभग 5000 स्क्वायर फीट की बेशकीमती जमीन पर कानून की धज्जियां उड़ाते हुए धड़ल्ले से अवैध निर्माण किया जा रहा है।

शर्मनाक बात यह है कि इस खुले उल्लंघन को रोकने में जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह ‘नतमस्तक’ और नाकाम साबित हो रहे हैं। खुद नगर निगम और जोन 7 आयुक्त यह कबूल कर चुके हैं कि इस महा-निर्माण के लिए न तो कोई अनुमति (Permission) ली गई है और न ही कोई नक्शा पास हुआ है। इसके बावजूद, निगम प्रशासन के बुलडोजर का रुख इस अवैध ढांचे की तरफ न होना, कई गहरे अनुत्तरित सवाल खड़े करता है।

क्या ‘पेनाल्टी और नियमितीकरण’ की रची जा रही है साजिश?

इस पूरे मामले में नगर निगम की कछुआ चाल और टालमटोल के पीछे अब एक बड़ी प्रशासनिक मिलीभगत की बू आ रही है। सूत्रों और विभागीय जानकारों का दावा है कि यह निगम अधिकारियों की एक सोची-समझी क्रोनोलॉजी (Modus Operandi) हो सकती है। रणनीति बेहद साफ है जब तक मामला मीडिया की सुर्खियों और कागजी कार्यवाहियों में उलझा रहे, तब तक निर्माणकर्ता को ‘मौन संरक्षण’ देकर पूरा समय दिया जाए ताकि 5000 स्क्वायर फीट भूमि पर यह अवैध निर्माण चलता रहे ।

एक बार जब आलीशान बिल्डिंग खड़ी हो जाएगी, तब नगर निगम का भ्रष्ट तंत्र ‘नियमितीकरण’ (Compounding) और ‘पेनाल्टी’ (जुर्माना) का कानूनी चोर-रास्ता सामने लाएगा। इसके बाद भारी-भरकम जुर्माने की आड़ में इस पूरी अवैध गगनचुंबी इमारत को ‘वैध’ घोषित करने का घिनौना खेल खेला जाएगा।

वर्तमान में जोन अमले द्वारा की जा रही सामान जब्ती की छिटपुट और प्रतीकात्मक कार्रवाई महज एक दिखावा है, ताकि कागजों पर यह साबित किया जा सके कि ‘निगम सो नहीं रहा था’। यह दिखावटी कार्रवाई दरअसल उस बड़ी साजिश को छुपाने का एक जरिया है जिसके तहत भू-माफिया को फायदा पहुंचाया जा रहा है।

आमतौर पर अवैध निर्माण करने वाले रसूखदार लोग कोर्ट केस या ‘स्टे ऑर्डर’ का झुनझुना दिखाकर प्रशासनिक तंत्र के हाथ बांध देते हैं। लेकिन इस मामले में जो सनसनीखेज खुलासा हुआ है, उसने निगम के दावों की पोल खोल कर रख दी है।

न्यायालय अतिरिक्त तहसीलदार, रायपुर द्वारा जारी आधिकारिक आदेश (क्रमांक/वाचक/अति.तहसीलदार/2025-2026) ने यह साफ कर दिया है कि निर्माण करने वाले अवैध पक्ष के पास अदालत का कोई स्टे ऑर्डर (स्थगन आदेश) मौजूद नहीं है।

क्या है असलियत? यह अदालती आदेश असल में पीड़ित संजय जैन (निवासी- चौबे कॉलोनी) के आवेदन पर छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 129 के तहत केवल भूमि के विधिवत सीमांकन (Demarcation) के लिए जारी किया गया था।

बुलडोजर पर ब्रेक क्यों? किसके इशारे पर मूकदर्शक बना तंत्र?

इस पूरे मामले में पीड़ित संजय जैन न्याय की गुहार लेकर दफ्तर-दर-दफ्तर भटक रहे हैं। सरस्वती नगर थाने में भी इस बाबत लिखित शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है। जब-जब मीडिया और पीड़ित का दबाव बढ़ता है, तो जोन ऑफिस के कर्मचारी मौके पर जाकर दो-चार तगाड़ी, फावड़ा या निर्माण सामग्री जब्त करने की ‘रस्म अदायगी’ कर आते हैं। लेकिन मुख्य अवैध ढांचे पर सीधे प्रहार करने से हमेशा बचते रहे हैं।

जब छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 302 और 307 के तहत निगम प्रशासन के पास बिना परमिशन के हो रहे किसी भी अवैध निर्माण को तुरंत मटियामेट करने का स्वतंत्र और पूर्ण कानूनी अधिकार है, तो फिर जोन कमिश्नर किस ‘अदृश्य दबाव’ या कानूनी अड़चन का बहाना बना रहे हैं?

बिना किसी अदालती स्थगन (स्टे) के भी कार्रवाई का कछुआ गति से चलना और अवैध निर्माण को गुपचुप तरीके से पूरा होने देना, सीधे तौर पर रायपुर नगर निगम के गलियारों में पनप रहे संस्थागत भ्रष्टाचार और भारी लेनदेन की ओर इशारा करता है। जनता अब सवाल पूछ रही है कि आखिर इस भू-माफिया का असली आका कौन है, जिसके सामने पूरा सरकारी अमला लाचार नजर आ रहा है?

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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