आज का पंचांग और राहुकाल का सटीक समय, जानें कब करें शुभ कार्य और कब बरतें सावधानी
आषाढ़ मास की नवमी तिथि पर स्वाति नक्षत्र का विशेष संयोग, जानिए क्यों वर्जित माना जाता है राहुकाल और क्या अभिजीत मुहूर्त बदल सकता है इसका प्रभाव।

पंचांग के अनुसार आज का दिन आध्यात्मिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन दिन के एक विशेष हिस्से में राहुकाल सक्रिय रहेगा, जिसमें शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है।
राहुकाल क्या होता है, इसका कारण और शुभ कार्यों में वर्जन की वजह
राहुकाल ज्योतिष शास्त्र में एक ऐसा विशिष्ट कालखंड है जिसे पूरी तरह से अशुभ और नकारात्मक ऊर्जा से प्रभावित माना जाता है। खगोलीय और पौराणिक दृष्टि से राहु को एक छाया ग्रह माना गया है, जिसका अपना कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है, लेकिन इसका प्रभाव मानव जीवन पर बहुत गहरा होता है।
सूर्य और पृथ्वी के परिक्रमा पथ के कटान बिंदुओं को ही राहु और केतु कहा जाता है। राहुकाल की गणना प्रतिदिन सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक के कुल समय को आठ बराबर भागों में बांटकर की जाती है।
प्रत्येक दिन का एक निश्चित भाग राहु का माना जाता है, जो लगभग 90 मिनट यानी डेढ़ घंटे का होता है। बुधवार के दिन यह समय दोपहर के मध्य भाग में आता है।
शास्त्रों के अनुसार राहुकाल के दौरान राहु की नकारात्मक और तामसिक ऊर्जा अपने चरम पर होती है। इस समय ब्रह्मांडीय ऊर्जा में भटकाव और भ्रम की स्थिति पैदा होती है।
यही कारण है कि यदि इस कालखंड में कोई नया व्यवसाय, गृह प्रवेश, विवाह, सोने की खरीदारी या कोई भी महत्वपूर्ण वित्तीय समझौता शुरू किया जाए, तो उसमें बाधाएं आने, निर्णय गलत होने या काम के बीच में ही रुक जाने की आशंका बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।
सीधे शब्दों में कहें तो राहुकाल किसी कार्य की नींव को कमजोर कर देता है, इसलिए इस समय को नए कार्यों के लिए पूरी तरह वर्जित माना जाता है।
क्या राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त एक साथ होने पर शुभ कार्य किया जा सकता है?
अक्सर लोगों के मन में यह बड़ा सवाल उठता है कि यदि किसी दिन राहुकाल और दिन का सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त यानी अभिजीत मुहूर्त एक साथ पड़ जाएं, तो क्या ऐसी स्थिति में शुभ कार्य किया जा सकता है?
वैदिक ज्योतिष के नियमों के अनुसार अभिजीत मुहूर्त को दिन का सबसे शक्तिशाली और सकारात्मक समय माना जाता है, जो भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र के प्रभाव से संचालित होता है। इस मुहूर्त में किए गए कार्य अमूमन सफल होते हैं।
लेकिन जब विशेष परिस्थितियों में राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय आपस में टकरा जाता है, तो वहां राहुकाल का नकारात्मक प्रभाव प्रबल माना जाता है।
शास्त्रों का स्पष्ट निर्देश है कि राहुकाल के दौरान अभिजीत मुहूर्त की शुभता भी कम हो जाती है। राहु की छाया उस समय की सकारात्मकता को दूषित कर देती है।
इसलिए यदि ऐसी स्थिति निर्मित होती है, तो बुद्धिमान ज्योतिषाचार्यों द्वारा यही सलाह दी जाती है कि उस डेढ़ घंटे के समय को पूरी तरह से छोड़ दिया जाए और शुभ कार्य के लिए दिन का कोई अन्य चौघड़िया या अमृत मुहूर्त चुना जाए। रिस्क लेने के बजाय समय का बचाव करना ही श्रेष्ठ माना गया है।
आज 24 जून 2026 का विस्तृत पंचांग और धार्मिक महत्व
आज का दिन आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का है। यह समय गुप्त नवरात्रि के समापन और आषाढ़ मास के विशेष धार्मिक उत्सवों की शुरुआत का काल होता है।
- आज की तिथि: नवमी तिथि शाम को 06 बजकर 11 मिनट तक रहेगी, इसके बाद दशमी तिथि की शुरुआत होगी।
- आज का नक्षत्र: स्वाति नक्षत्र दोपहर 01 बजकर 58 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद विशाखा नक्षत्र प्रारंभ होगा।
- आज का योग: परिघ योग सुबह 10 बजकर 23 मिनट तक रहेगा, इसके बाद शिव योग की शुरुआत होगी।
- आज का वार: बुधवार (बुध ग्रह को समर्पित दिन, जो बुद्धि और व्यापार का कारक है)।
- चंद्रमा की स्थिति: चंद्रमा आज पूरे दिन तुला राशि में गोचर करेंगे, जिससे मानसिक संतुलन और व्यावसायिक सोच में सुधार होगा।
धार्मिक महत्व: आज आषाढ़ शुक्ल नवमी होने के कारण मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना के लिए दिन अत्यंत पवित्र है। बुधवार का दिन होने से भगवान गणेश की आराधना का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
आज के दिन विघ्नहर्ता की पूजा करने से व्यापार में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और बुद्धि का विकास होता है। स्वाति नक्षत्र के प्रभाव से आज किया गया दान-पुण्य सीधे समृद्धि लेकर आता है।
आज के शुभ और अशुभ मुहूर्त की विस्तृत जानकारी
आज दिनभर में कई प्रकार के शुभ और अशुभ योग सक्रिय रहेंगे। अपने महत्वपूर्ण कार्यों की योजना आप इस समय सारणी के अनुसार बना सकते हैं।
आज के शुभ मुहूर्त:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 03 बजकर 46 मिनट से सुबह 04 बजकर 27 मिनट तक (यह समय साधना, पढ़ाई और चिंतन के लिए सर्वोत्तम है)।
- विजय मुहूर्त: सुबह 07 बजकर 32 मिनट से सुबह 08 बजकर 26 मिनट तक (अदालती काम या महत्वपूर्ण चर्चा के लिए शुभ)।
- गोधूलि मुहूर्त: शाम को 06 बजकर 28 मिनट से शाम को 07 बजकर 04 मिनट तक (धार्मिक कार्यों और प्रार्थना के लिए उत्तम)।
- अमृत काल: शाम को 04 बजकर 58 मिनट से शाम को 06 बजकर 34 मिनट तक (इस समय में किए गए कार्य स्थायित्व प्रदान करते हैं)।
आज के अशुभ मुहूर्त (सावधानी का समय):
- राहुकाल समय: दोपहर 03 बजकर 25 मिनट से शाम को 05 बजकर 08 मिनट तक (इस समय में किसी भी नए काम की शुरुआत कतई न करें)।
- यमगंड काल: सुबह 08 बजकर 34 मिनट से सुबह 10 बजकर 17 मिनट तक (यह समय भी शुभ कार्यों के लिए वर्जित है)।
- गुलिक काल: दोपहर 12 बजकर 00 मिनट से दोपहर 01 बजकर 43 मिनट तक (इसे एक चेतावनी क्षेत्र माना जाता है, कागजी समझौतों से बचें)।
- दुर्मुहूर्त: सुबह 07 बजकर 53 मिनट से सुबह 08 बजकर 48 मिनट तक और दोबारा रात को 10 बजकर 58 मिनट से रात 11 बजकर 39 मिनट तक रहेगा।
राहुकाल में क्या करें और क्या न करें: नियम और सावधानियां
राहुकाल के समय को लेकर पंचांग में कुछ कड़े नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने से आप अनजाने में होने वाले नुकसान से बच सकते हैं।
क्या न करें (पूरी तरह वर्जित कार्य):
- नया व्यापार या दुकान की शुरुआत इस समय बिल्कुल न करें।
- नए वाहन, मकान, सोने या कीमती आभूषणों की खरीदारी से बचें।
- किसी महत्वपूर्ण नौकरी का इंटरव्यू, लंबी दूरी की यात्रा की शुरुआत या नए घर का सौदा इस समय टाल दें।
- विवाह, सगाई या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों का शुभारंभ इस काल में भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
- शेयर बाजार में बड़ा निवेश या किसी को बड़ी रकम उधार देने का काम इस समय न करें।
क्या करें (स्वीकार्य कार्य):
- जो कार्य पहले से नियमित रूप से चल रहे हैं, उन्हें सामान्य रूप से जारी रखा जा सकता है। रूटीन के कामों पर राहुकाल का कोई बुरा असर नहीं होता।
- राहुकाल का समय ईश्वर की मानसिक आराधना के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस समय हनुमान चालीसा का पाठ या महामृत्युंजय मंत्र का मानसिक जाप करने से राहु का नकारात्मक प्रभाव पूरी तरह शून्य हो जाता है।
- यदि आपको राहुकाल के दौरान यात्रा करना बहुत जरूरी हो, तो घर से निकलने से पहले कुछ मीठा खाकर और भगवान गणेश का स्मरण करके निकलें।
- इस समय गरीब और जरूरतमंद लोगों को काले तिल, उड़द की दाल या पुराने कपड़ों का दान करना अत्यधिक फलदायी होता है।
डिस्क्लेमर: इस समाचार लेख में दी गई पंचांग, राहुकाल और शुभ-अशुभ मुहूर्त की जानकारियां पारंपरिक वैदिक ज्योतिषीय गणनाओं और प्रचलित धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। www.the4thpillar.live इन जानकारियों की शत-प्रतिशत सटीकता या इसके वैज्ञानिक प्रभावों का कोई दावा नहीं करता है। स्थान और समय के भेद के कारण स्थानीय पंचांगों में कुछ मिनटों का अंतर आ सकता है, अतः किसी भी बड़े मांगलिक कार्य को करने से पहले अपने स्थानीय पंडित या प्रमाणित ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।



