झीरम के शहीदों का खून भाजपा की रमन सरकार के माथे पर : सुशील आनंद शुक्ला

नड्डा के बयान के लिए एनआईए उनसे पूछताछ करे : कांग्रेस 





रायपुर । भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा का यह बयान कि झीरम के मामले में हमला करवाने के लिए अपने लोगों को मरवाने के लिए कांग्रेसी नक्सलियों से संपर्क कर रहे थे, कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति व्यक्त किया है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने पत्रकरों से चर्चा करते हुए कहा कि नड्डा झीरम के शहीदों का अपमान कर रहे, उनके परिजनों के घावों पर नमक छिड़क रहे है। उनका बयान बेहद ही आपत्तिजनक और स्तरहीन है। कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि एनआईए, नड्डा से पूछताछ करें कि उनका इस बयान देने का आधार क्या है? जेपी नड्डा के पास इस बात का क्या सबूत है? जेपी नड्डा सिर्फ राजनैतिक उद्देश्य के लिए बयानबाजी किया है। जेपी नड्डा इस बयान के लिए माफी मांगना चाहिए। कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि जेपी नड्डा पर भारतीय जनता पार्टी कार्रवाई करे।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि जेपी नड्डा ने राजनीतिक बयानबाजी के लिए सारी मर्यादा को तार-तार किया है। कांग्रेस ने झीरम हमले में अपने नेताओं की पूरी एक पीढ़ी को खोया है और उस समय राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी। भाजपा केंद्र में पिछले बारह साल से सरकार में है। एनआईए ने तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह से पूछताछ क्यों नहीं किया? रमन सिंह का नार्को टेस्ट करवा लिया जाए झीरम का पूरा सच सामने आ जायेगा। क्यों एनआईए ने आज तक झीरम हमले के दोषियों तक नहीं पहुंच पायी? जेपी नड्डा इस प्रकार का बयान दे रहे है, उनके पास तथ्यात्मक आधार क्या है, एनआईए उनसे पूछताछ करनी चाहिए।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि झीरम घाटी कांड एक ऐसा कांड था जिसने कांग्रेस के नेतृत्व की एक पूरी पीढ़ी को ही समाप्त कर दिया था। स्वतंत्र भारत में हुई दुर्दान्त और हृदय विदारक घटना भारतीय जनता पार्टी के शासन काल में डॉ. रमन सिंह के राज में घटित हुई थी इसके गुनाहगारों को सजा से बचाने के लिए भाजपा लगातार षड़यंत्र करती रही है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा डरती है झीरम का सच सामने आ जायेगा तो वह बेनकाब हो जायेगी। रमन सिंह से बड़ा क्रूर शासक आजाद भारत में आज तक नहीं हुआ। एक साथ विपक्ष के 32 नेताओं की हत्या हो गयी और तत्कालीन सरकार सच सामने आने देने से रोकने में पूरी ताकत लगा रखी थी। भाजपा के बड़े नेता जीरम की जांच को रोकने लगातार कोशिशें करते रहे उसमें साफ है झीरम के पीछे तत्कालीन भाजपा सरकार की भूमिका संदिग्ध थी। भाजपा के तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक झीरम की जांच रोकने पीआईएल क्यों लगाया था?

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा ने झीरम का सच रोकने कदम-कदम पर षड़यंत्र किया। कांग्रेस की सरकार बनने के बाद कांग्रेस सरकार ने झीरम हमले की जांच के लिये एसआईटी का गठन किया था लेकिन भाजपा की केंद्र सरकार एनआईए से झीरम की फाइल एसआईटी को नहीं देने दिया। एनआईए को हाईकोर्ट ने भी राज्य की एसआईटी को फाईल देने का आदेश दिया तब एनआईए सुप्रीम कोर्ट अपील में चली गई, पांच साल के अदालती लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2023 को एनआईए की अपील खारिज करते हुये कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की एसआईटी झीरम मामले की जांच कर सकती है, एनआईए फाईल वापस करे। सुप्रीम कोर्ट के फैसला आने तक राज्य में सरकार बदल गयी थी। कांग्रेस मांग करती है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा गठित एसआईटी के द्वारा मामले के षड़यंत्रों की जांच शुरू करें।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि आज भी छत्तीसगढ़ की जनता जानना चाहती है कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा को घोर नक्सल इलाके में ही क्यों हटाया गया था? झीरम नरसंहार भाजपा के लिए उसकी तत्कालीन सरकार द्वारा की गई चूक मात्र हो सकती है तथा उसकी तत्कालीन सरकार द्वारा किया गया एक षड्यंत्र मात्र हो सकता है। कांग्रेस के लिए झीरम वह घाव है जो कभी नहीं भर सकता। यह घटना देश के लोकतंत्र के माथे पर लगा वह कलंक है जो कभी नही मिट सकता। कांग्रेस ने झीरम में अपने नेताओं की पूरी पीढ़ी को खोया है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस पार्टी झीरम के षड्यंत्र को उजागर होने का पूरा प्रयास करेगी। इस षड्यंत्र को उजागर होने में कितनी भी बाधाएं पैदा की जाए कांग्रेस उनका डट कर मुकाबला करेगी। कांग्रेस की केंद्र में सरकार बनने के बाद झीरम मामले की जांच होगी और दोषियों को सजा भी होगी। इस हमले के बाद केंद्र में भाजपा की सरकार बन गयी, राज्य में भाजपा की रमन सरकार थी दोनों ने जांच प्रभावित किया, दोषी बचे रह गये।

पत्रकार वार्ता में महेन्द्र छाबड़ा, सुरेन्द्र वर्मा, अजय साहू, नितिन भंसाली, वंदना राजपूत, सत्यप्रकाश सिंह उपस्थित थे।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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