आयुष्मान योजना में अस्पतालों की मनमानी पर सख्ती, अब बीमारियों और पैकेज रेट का बोर्ड लगाना होगा
बिलासपुर में आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों को बीमारियों और पैकेज रेट का बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए हैं। विशेषज्ञ सुविधा न होने पर समय पर रेफर करना होगा।

16 सितंबर 2026 | Raipur: बिलासपुर में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों को अब अस्पतालों में उपलब्ध उपचार और संबंधित पैकेज की जानकारी स्पष्ट रूप से मिल सकेगी। स्वास्थ्य विभाग ने योजना से जुड़े अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे अस्पताल परिसर में प्रमुख स्थान पर डिस्प्ले बोर्ड लगाएं, जिसमें आयुष्मान योजना के तहत इलाज की जाने वाली बीमारियों और उनके पैकेज रेट का विवरण दर्ज हो।
विभाग का यह कदम उन शिकायतों और समस्याओं के बीच सामने आया है, जिनमें मरीजों और उनके परिजनों को अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत उपलब्ध इलाज को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती। कई बार मरीजों को यह समझ नहीं आता कि उनकी बीमारी का उपचार योजना में शामिल है या नहीं, किस अस्पताल में संबंधित सुविधा उपलब्ध है और इलाज के लिए उन्हें किस प्रक्रिया का पालन करना होगा।
स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के अनुसार, आयुष्मान योजना के तहत इलाज करने वाले अस्पतालों को अपनी उपचार सुविधाओं की जानकारी छिपाकर नहीं रखनी होगी। अस्पताल में ऐसा बोर्ड लगाया जाना चाहिए, जिसे मरीज और उनके परिजन आसानी से पढ़ सकें। इसमें योजना के दायरे में आने वाली बीमारियों तथा संबंधित पैकेज की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी, ताकि इलाज शुरू कराने से पहले मरीज को आवश्यक जानकारी मिल सके।
आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को सूचीबद्ध अस्पतालों में निर्धारित बीमारियों का इलाज उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए अस्पतालों का चयन उनकी उपचार सुविधाओं, उपलब्ध संसाधनों और संबंधित चिकित्सा सेवाओं के आधार पर किया जाता है। ऐसे में किसी अस्पताल में जिस बीमारी के इलाज की सुविधा उपलब्ध है, उसकी जानकारी मरीजों तक पहुंचना योजना की पारदर्शिता के लिए जरूरी माना जाता है।
अस्पतालों में बीमारी और पैकेज की सूची प्रदर्शित नहीं होने से मरीजों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्हें अस्पताल के कर्मचारियों से बार-बार पूछताछ करनी पड़ती है और कई बार इलाज की उपलब्धता को लेकर अलग-अलग जवाब मिलने की स्थिति भी बनती है। इससे मरीज और उनके परिजन असमंजस में रहते हैं, खासकर तब जब वे गंभीर बीमारी के उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे हों।
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी अस्पताल में संबंधित बीमारी के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर या आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो अस्पताल को मरीज को भर्ती करके अनावश्यक रूप से रोकना नहीं चाहिए। ऐसे मामलों में मरीज को समय रहते उच्च चिकित्सा संस्थान या हायर सेंटर के लिए रेफर किया जाना चाहिए, जहां संबंधित बीमारी का उपचार उपलब्ध हो।
विशेषज्ञ डॉक्टर की अनुपस्थिति में इलाज का आश्वासन देना और बाद में मरीज को दूसरे अस्पताल भेजना गंभीर समस्या बन सकता है। इससे मरीज के इलाज में देरी हो सकती है और परिजनों को अचानक दूसरी जगह व्यवस्था करनी पड़ सकती है। गंभीर स्थिति में समय का महत्व और बढ़ जाता है, इसलिए अस्पतालों को अपनी वास्तविक सुविधाओं के अनुसार ही उपचार की जिम्मेदारी लेनी होगी।
विभाग के निर्देशों में यह भी कहा गया है कि अस्पतालों को मरीजों पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक आर्थिक दबाव नहीं डालना चाहिए। आयुष्मान योजना के तहत जिन सुविधाओं और उपचार पैकेज का लाभ उपलब्ध है, उसकी जानकारी मरीजों को स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए। योजना के दायरे से बाहर आने वाली बीमारियों या उपचारों के संबंध में भी मरीजों को सही जानकारी उपलब्ध कराना अस्पताल की जिम्मेदारी होगी।
इसके लिए अस्पतालों में हेल्पडेस्क की व्यवस्था और प्रशिक्षित काउंसलर्स के माध्यम से मरीजों तथा उनके परिजनों को समझाने पर जोर दिया गया है। यदि कोई उपचार आयुष्मान योजना में शामिल नहीं है, तो इसकी जानकारी स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए, ताकि मरीज गलतफहमी में न रहें और अपनी आर्थिक तथा चिकित्सा संबंधी व्यवस्था समय पर कर सकें।
अस्पतालों में रेट बोर्ड लगाने का उद्देश्य केवल जानकारी प्रदर्शित करना नहीं है, बल्कि मरीजों और अस्पताल प्रबंधन के बीच पारदर्शिता बढ़ाना भी है। जब उपचार की सूची और पैकेज की जानकारी सामने रहेगी, तो मरीजों को यह समझने में आसानी होगी कि योजना के तहत कौन-सी सेवा उपलब्ध है और किस बीमारी के लिए अस्पताल में उपचार किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने योजना से जुड़े अस्पतालों को नोटिस जारी कर इन निर्देशों का पालन करने को कहा है। आयुष्मान भारत योजना के जिला प्रभारी शिशिर परमार के अनुसार, सभी संबंधित अस्पतालों में यह बोर्ड लगाया जाना चाहिए, ताकि मरीजों को गुमराह होने से बचाया जा सके और उन्हें योजना के तहत उपलब्ध उपचार की सही जानकारी मिल सके।
विभाग की ओर से अस्पतालों को यह भी संदेश दिया गया है कि केवल उन्हीं बीमारियों का इलाज किया जाए, जिनके लिए अस्पताल में आवश्यक सुविधा और विशेषज्ञता मौजूद है। यदि किसी बीमारी का उपचार अस्पताल में संभव नहीं है, तो मरीज को अनावश्यक रूप से रोकने के बजाय समय पर उचित संस्थान के लिए रेफर किया जाना चाहिए।
आयुष्मान योजना का लाभ लेने वाले मरीजों के लिए यह निर्देश इसलिए भी उपयोगी हो सकता है, क्योंकि कई परिवार इलाज के लिए सरकारी सहायता पर निर्भर रहते हैं। बीमारी की स्थिति में उन्हें पहले से यह पता होना जरूरी है कि किस अस्पताल में कौन-सी सुविधा उपलब्ध है और योजना के तहत उपचार किस सीमा तक किया जा सकता है।
मरीजों और उनके परिजनों को भी अस्पताल पहुंचने पर आयुष्मान हेल्पडेस्क से जानकारी लेने, उपचार की उपलब्धता स्पष्ट करने और योजना के तहत मिलने वाली सुविधा के बारे में पूछताछ करने की सलाह दी जा सकती है। यदि अस्पताल में संबंधित बीमारी का इलाज उपलब्ध नहीं है, तो रेफरल की प्रक्रिया और आगे के उपचार केंद्र की जानकारी भी समय पर ली जानी चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग के इस निर्देश के बाद अस्पतालों में आयुष्मान योजना से संबंधित जानकारी प्रदर्शित करने की व्यवस्था पर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। इससे मरीजों को इलाज से पहले आवश्यक जानकारी मिल सकेगी और अस्पतालों को भी अपनी सुविधाओं तथा उपचार सेवाओं के बारे में स्पष्ट व्यवस्था बनाए रखनी होगी।
आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे उपचार शुरू होने से पहले अस्पताल में उपलब्ध सुविधा, बीमारी के पैकेज और योजना के अंतर्गत आने वाली सेवाओं की जानकारी प्राप्त करें। अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि वह मरीजों को स्पष्ट, सही और समय पर जानकारी दे तथा सुविधा उपलब्ध न होने की स्थिति में उन्हें उचित चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाने में सहयोग करे।



