बुद्ध पूर्णिमा पर पर्यावरण को शुद्ध करने घर-घर में दे रहे आहुति, कोरोना महामारी को दूर करने कर रहे प्रार्थना

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रायपुर । वेद-पुराण और आयुर्वेदिक ग्रंथों में स्वास्थ्य रक्षा हेतु प्राचीन काल में विविध मंत्रों से यज्ञ में आहुतियां डालने के उपायों का उल्लेख है। गायत्री परिवार का विश्वास है कि वैदिक काल के ये मंत्र, यज्ञ और उपाय आज भी अचूक हैं। वैज्ञानिकों ने भी यज्ञ में दी जाने वाली आहुति से निकलने वाले धुएं के महत्व को प्रमाणित किया है।

सनातन संस्कृति में हजारों साल से किए जा रहे हवन, यज्ञ की परंपरा को निभाते हुए बुधवार को भगवान गौतम बुद्ध की जयंती पर विश्वभर में हवन-यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। घर-घर में एक ही समय पर आहुति देकर संपूर्ण विश्व से कोरोना महामारी का नाश करने की प्रार्थना की जा रही है।

छत्तीसगढ़ में तीन लाख घर में आहुति

गायत्री परिवार छत्तीसगढ़ के जोन समन्वयक दिलीप पाणिग्रही एवं रायपुर जिला समन्वयक लच्छूराम निषाद ने बताया कि संपूर्ण विश्व में होने वाले आयोजन के तहत रायपुर जिला के 40 हजार घरों में और पूरे छत्तीसगढ़ में तीन लाख घरों एवं संस्थानों में एक दिन एक साथ एक समय में गृहे-गृृहे गायत्री यज्ञ किया जा रहा है।

राज्य के सभी उपजोन समन्वयक, जिला समन्वयक, शक्ति पीठ के ट्रस्टीगणों एवं परिजनों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हवन करने की विधि का प्रशिक्षण पहले ही दे दिया है। साथ ही पंडित एप्प के माध्यम से भी हवन किया जा सकता है।

पूरा विश्व जानता है यज्ञ की महिमा

गायत्री परिवार के पदाधिकारियों ने बताया कि कोरोना महामारी के निवारण के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं अनेकानेक वैज्ञानिक भी यज्ञ की महिमा को जानकर प्रेरित और संकल्पित हो रहे हैं। फ़्रांस के ट्रेले नामक वैज्ञानिक ने हवन पर रिसर्च किया, जिसमें उन्हें पता चला कि हवन मुख्यतः आम की लकड़ी पर किया जाता है।

जब आम की लकड़ी जलती है तो फ़ॉर्मिक एल्डिहाइड नामक गैस उत्पन्न होती है, जो कि खतरनाक बैक्टीरिया और जीवाणुओं को मारती है तथा वातावरण को शुद्द करती है। यदि आधे घंटे हवन में बैठा जाए अथवा हवन के धुएं से शरीर का संपर्क हो तो टाइफाइड जैसे खतरनाक रोग फैलाने वाले जीवाणु भी मर जाते हैं और शरीर शुद्ध हो जाता है।

ब्रह्मांड की शुद्धि

करोड़ों साधक आयुर्वेदिक औषधियुक्त हवन सामग्री के साथ गायत्री, महामृत्यंजय एवं सूर्य (आदित्य) मंत्रों के उच्चारण कर यज्ञ में आहूति अर्पित करेंगे। विश्वभर में एक दिन एक साथ यज्ञ करने पर जो धूम्र उत्पन्न होगा, वह पूरे ब्रम्हाण्ड में समाहित होकर संपूर्ण वातावरण को शुद्ध करेगा।