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बिलासपुर कोर्ट परिसर में दो वकीलों के बीच मारपीट, दोनों पक्षों पर काउंटर केस

बिलासपुर कोर्ट परिसर में दो अधिवक्ताओं के बीच विवाद और मारपीट हुई। सिविल लाइन पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर काउंटर केस दर्ज किया है।





Raipur, 17 सितंबर 2026 – बिलासपुर न्यायालय परिसर में बुधवार दोपहर दो अधिवक्ताओं के बीच विवाद के बाद मारपीट हो गई। घटना के दौरान कोर्ट परिसर में मौजूद लोगों के बीच कुछ देर के लिए हलचल की स्थिति बन गई। न्यायालय में तैनात आरक्षक की सूचना पर सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों अधिवक्ताओं को थाने लेकर गई। बाद में दोनों पक्षों की शिकायत पर पुलिस ने एक-दूसरे के खिलाफ काउंटर केस दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और विवाद की वास्तविक वजह तथा मारपीट की शुरुआत किस बात से हुई, इसका पता लगाया जा रहा है।

पुलिस के अनुसार, विवाद में अधिवक्ता ओम प्रकाश बंजारे और अधिवक्ता मुकेश बंजारे शामिल थे। दोनों बुधवार दोपहर न्यायालय परिसर में मौजूद थे। इसी दौरान किसी बात को लेकर उनके बीच कहासुनी शुरू हुई। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच पहले से रंजिश थी और बातचीत के दौरान पुराना विवाद फिर सामने आ गया। कुछ ही देर में कहासुनी बढ़कर मारपीट में बदल गई। घटना के बाद न्यायालय परिसर में मौजूद लोगों ने स्थिति को देखा, जिसके बाद वहां तैनात आरक्षक ने पुलिस को सूचना दी।

सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस की टीम न्यायालय परिसर पहुंची। पुलिस ने दोनों अधिवक्ताओं को थाने लाकर मामले की जानकारी ली। इसके बाद दोनों पक्षों ने अलग-अलग शिकायत दर्ज कराई। थाना प्रभारी किशोर केंवट के मुताबिक, दोनों की शिकायतों के आधार पर एक-दूसरे के खिलाफ काउंटर केस दर्ज किया गया है। पुलिस अब शिकायतों में लगाए गए आरोपों, घटना के क्रम और विवाद के दौरान मौजूद लोगों से मिली जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।

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न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं के बीच हुआ यह विवाद इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि घटना सार्वजनिक स्थान पर हुई और कुछ समय के लिए वहां मौजूद लोगों का ध्यान इस ओर गया। हालांकि, पुलिस ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि दोनों के बीच किस मुद्दे को लेकर विवाद शुरू हुआ था। प्रारंभिक जानकारी में पुरानी रंजिश की बात सामने आई है, लेकिन इस रंजिश की प्रकृति, उसके पीछे का कारण और बुधवार को हुए विवाद से उसका संबंध क्या था, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस दोनों पक्षों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण कर रही है।

इस मामले में अधिवक्ता ओम प्रकाश बंजारे का नाम बलौदाबाजार कलेक्ट्रेट अग्निकांड प्रकरण में भी सामने आया था। समाचार स्रोत के अनुसार, कलेक्ट्रेट अग्निकांड के बाद प्रशासनिक कार्रवाई के तहत उन्हें जिला बदर किया गया है। बुधवार को वे बिलासपुर न्यायालय परिसर में मौजूद थे, जहां उनका अधिवक्ता मुकेश बंजारे के साथ विवाद हुआ। पुलिस के अनुसार, दोनों अधिवक्ता पूर्व में भीम आर्मी से जुड़े हुए थे। हालांकि, इस संगठन से जुड़ाव का घटना के तत्काल कारण से क्या संबंध है, इस बारे में पुलिस ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

बलौदाबाजार कलेक्ट्रेट अग्निकांड का संदर्भ सामने आने के कारण मामले में एक अतिरिक्त कानूनी और प्रशासनिक पहलू भी जुड़ता है, लेकिन बुधवार की मारपीट की जांच अलग शिकायतों के आधार पर की जा रही है। किसी व्यक्ति का किसी पुराने प्रकरण में आरोपी होना और किसी नए मामले में लगाए गए आरोपों का सही पाया जाना दो अलग-अलग कानूनी विषय हैं। मौजूदा मामले में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत की है, इसलिए पुलिस को प्रत्येक आरोप की स्वतंत्र रूप से जांच करनी होगी। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि मारपीट में किसकी क्या भूमिका रही या विवाद की शुरुआत किसने की।

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सिविल लाइन पुलिस के सामने अब जांच के दौरान कई बिंदुओं को स्पष्ट करने की जिम्मेदारी है। इनमें विवाद शुरू होने का कारण, दोनों पक्षों के बीच पहले से मौजूद मतभेद, मारपीट के दौरान हुई घटनाओं का क्रम और मौके पर मौजूद लोगों की जानकारी शामिल है। पुलिस शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज करने के साथ घटना से संबंधित अन्य तथ्यों की भी जांच कर सकती है। यदि घटना के संबंध में कोई प्रत्यक्षदर्शी, सीसीटीवी फुटेज या अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं, तो वे जांच की दिशा तय करने में उपयोगी हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस ने मामले को काउंटर केस के रूप में दर्ज किया है और जांच जारी होने की बात कही है।

न्यायालय परिसर में कानून से जुड़े पेशेवरों के बीच विवाद और मारपीट की घटना सामान्य न्यायिक कार्यवाही से अलग स्थिति पैदा करती है। कोर्ट परिसर में अधिवक्ता, पक्षकार, न्यायालय कर्मचारी और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े लोग मौजूद रहते हैं। ऐसे स्थान पर किसी विवाद के बढ़ने से कामकाज प्रभावित होने की आशंका रहती है। बुधवार की घटना में पुलिस को सूचना दिए जाने और दोनों पक्षों को थाने ले जाने के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब मामले का अगला चरण जांच और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा होगा।

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दोनों अधिवक्ताओं के खिलाफ दर्ज शिकायतों में क्या-क्या आरोप लगाए गए हैं, इसकी विस्तृत जानकारी पुलिस की ओर से सार्वजनिक नहीं की गई है। इसी तरह, यह भी स्पष्ट नहीं है कि घटना में किसी को चोट आई या नहीं और यदि आई है तो उसकी प्रकृति क्या है। इन तथ्यों की पुष्टि पुलिस जांच और संबंधित दस्तावेजों से ही हो सकेगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि विवाद के बाद दोनों पक्ष थाने पहुंचे और दोनों की शिकायत पर अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए गए।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही विवाद के कारण, घटनाक्रम और आरोपों की स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आएगी। दोनों पक्षों के आरोपों को पुलिस किस तरह सत्यापित करती है और आगे की कानूनी कार्रवाई क्या होती है, यह जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा। बुधवार को बिलासपुर कोर्ट परिसर में हुई इस घटना ने न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं के बीच विवाद को लेकर चर्चा जरूर पैदा की है, लेकिन मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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