राठी परिवार के सौजन्य से वर्ष 2009 से जारी है भंडारे की दिव्य परंपरा, संस्थापक कुबेर राठी बोले-मैं तो बस निमित्त मात्र हूँ, करा रहे हैं बजरंगबली
दोपहर से लेकर संध्या तक बही सुरुचिपूर्ण भोज की रसधारा, संस्थापक कुबेर राठी ने की बजरंगबली की विशेष पूजा-अर्चना।

रायपुर । राजधानी रायपुर का रेलवे स्टेशन परिसर इन दिनों केवल यात्रियों के आवागमन का केंद्र नहीं, बल्कि अगाध श्रद्धा और अलौकिक चेतना का पुनीत धाम बन चुका है। यहाँ स्थित श्री सर्व धर्म संकट मोचन हनुमान मंदिर एक जाग्रत और सिद्ध पीठ है, जिसकी महिमा दूर-दिगंत तक फैली हुई है। इसी पावन परिसर में विगत 17 वर्षों से (सन 2009 से) भक्ति और सेवा का एक ऐसा महायज्ञ चल रहा है, जिसने कलयुग में ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ के कथन को चरितार्थ कर दिया है। राठी परिवार द्वारा प्रत्येक शनिवार को आयोजित होने वाले इस महाभंडारे की दिव्य शृंखला में इस शनिवार को भी आस्था का भव्य सैलाब उमड़ा।

शनिवार की दोपहर ठीक 12 बजे, प्रभु इच्छा के साथ इस महाप्रसाद वितरण का शुभारंभ हुआ। प्रथम चरण में यह भंडारा रेलवे स्टेशन परिसर स्थित कार्यालय में प्रारंभ हुआ, जहाँ भोजन के रूप में अन्नपूर्णा का प्रसाद निरंतर वितरित होता रहा। इसके पश्चात, संध्या 5 बजे से मंदिर के मुख्य प्रांगण में महाभंडारे ने एक विशाल रूप ले लिया। हजारों श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ बजरंगबली का महाभोग ग्रहण किया। संपूर्ण परिसर ‘जय श्रीराम’ और ‘जय हनुमान’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

इस पुनीत अवसर पर श्री सर्व धर्म संकट मोचन हनुमान मंदिर सेवा समिति के संस्थापक एवं प्रख्यात समाजसेवी कुबेर राठी मंदिर पहुंचे। उन्होंने मंदिर में विराजमान पवनपुत्र हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की, आरती उतारी और जगत कल्याण की कामना की।

समाजसेवी कुबेर राठी ने कहा कि यह महाभंडारा मैं या मेरा परिवार नहीं करवा रहा है, बल्कि स्वयं साक्षात भगवान बजरंगबली जी इसे संपन्न करवा रहे हैं। हमारी सनातनी संस्कृति और शास्त्रों में वर्णित है कि भूखे को भोजन कराना संसार का सबसे महान और पुण्य का कार्य है। ईश्वर की इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता।मैं तो इस विशाल सेवा कार्य में बस एक साधारण सा निमित्त मात्र हूँ। यह मेरा परम सौभाग्य है कि प्रभु हनुमान जी ने इस सेवा कार्य के लिए मुझे और मेरे परिवार को चुना है। जब तक प्रभु की कृपा रहेगी, भक्ति और सेवा का यह अनुष्ठान इसी तरह अनवरत चलता रहेगा।

संस्थापक एवं समाजसेवी कुबेर राठी ने आध्यात्मिक भाव से ओत-प्रोत होकर आगे कहा कि प्रभु हनुमान जी का यह दरबार किसी एक वर्ग या समुदाय का नहीं, बल्कि संपूर्ण चराचर जगत के लिए खुला एक दिव्य द्वार है, जहाँ ऊंच-नीच और जाति-पाति का भेद मिट जाता है। इस पावन अवसर पर समाज के हर वर्ग, हर तबके के लोग एक समान भाव से आकर अन्नपूर्णा स्वरूप इस महाप्रसाद को ग्रहण करते हैं। यह भगवान बजरंगबली जी की ही असीम अनुकंपा है कि उनके दर पर आने वाला कोई भी याचक कभी खाली हाथ नहीं लौटता; वे संकटमोचन हैं और शरणागत की हर पीड़ा को हरकर उनकी सभी सात्विक मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इस अद्भुत दृश्य को देखना साक्षात कलयुग में त्रेतायुग की राम-भक्ति और समरसता के दर्शन करने जैसा है।

कुबेर राठी जी के इन वचनों ने वहाँ उपस्थित प्रत्येक भक्त के हृदय को छू लिया। मंदिर समिति के सदस्यों और स्थानीय श्रद्धालुओं के सहयोग से यह महाआयोजन पूरी सुव्यवस्था और भक्तिमय माहौल में संपन्न हुआ।




