केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, प्याज खरीद नीति में ऐतिहासिक बदलाव से बंपर मुनाफे की उम्मीद
केंद्र सरकार ने मूल्य स्थिरता कोष के तहत राष्ट्रीय प्याज बफर स्टॉक के लिए खरीद दरों में 13 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी करते हुए इसे 2,125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है, जिससे सुस्त पड़ी सरकारी खरीद को रफ्तार मिलने और मानसून की देरी के बीच किसानों को उनकी लागत का सही मूल्य मिलने की उम्मीद है।

रायपुर, 05 जुलाई 2026: देश के करोड़ों किसानों और आम उपभोक्ताओं की रसोई के बजट को सीधे प्रभावित करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने प्याज उत्पादक किसानों को बड़ी राहत देते हुए और देश में मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। सरकार ने बफर स्टॉक के लिए खरीदी जाने वाली प्याज की कीमतों में 13 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी करने की घोषणा की है। इस नए फैसले के बाद अब सरकारी एजेंसियों द्वारा किसानों से 2,125 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्याज की खरीद की जाएगी, जो इससे पहले तक 1,875 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित थी।
यह नई बढ़ी हुई दरें देश भर में प्रभावी हो चुकी हैं। सरकार का यह कदम इस चालू सीजन में पांचवीं बार खरीद कीमतों में संशोधन को दर्शाता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीतिगत फैसले से सीधे तौर पर किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा, जिससे वे बिचौलियों के चंगुल से बच सकेंगे और भविष्य में बाजार में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव के समय प्याज की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
To strengthen farmer welfare, the Government has increased the onion procurement rate in Maharashtra from ₹1875 per quintal to ₹2125 per quintal under PSF for creating the National onion buffer stock. The new rate, which is around 13% higher than the previous rate, is effective… pic.twitter.com/o2kWKxotkt
— Consumer Affairs (@jagograhakjago) July 4, 2026
सुस्त पड़ी सरकारी खरीद को रफ्तार देने की कोशिश
चालू रबी सीजन में सरकारी खरीद की रफ्तार बेहद धीमी दर्ज की गई है, जिसने सरकार को बार-बार कीमतों में संशोधन करने के लिए मजबूर किया है। मूल्य स्थिरता कोष के तहत नेफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) जैसी केंद्रीय नोडल एजेंसियों द्वारा 1 जून से शुरू की गई खरीद प्रक्रिया के तहत अब तक देश भर में केवल 2,000 टन प्याज का ही बफर स्टॉक जमा किया जा सका है।
इस सुस्ती का मुख्य कारण खुले बाजार में मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा थी, जिसके चलते किसान अपनी फसल सरकारी केंद्रों पर लाने से कतरा रहे थे। सरकार को उम्मीद है कि 21.25 रुपये प्रति किलो यानी 2,125 रुपये प्रति क्विंटल का यह नया आकर्षक मूल्य किसानों को सरकारी केंद्रों की ओर आकर्षित करने में पूरी तरह सफल सिद्ध होगा।
इस चालू सीजन में पांच बार बदले प्याज के दाम
सरकार ने इस सीजन में बाजार की बदलती परिस्थितियों और किसानों की मांग को देखते हुए लगातार अपनी खरीद दरों में बढ़ोतरी की है, जिसका सिलसिलेवार विवरण इस प्रकार है:
सीजन की शुरुआत में खरीद मूल्य बेहद कम यानी 12.70 रुपये प्रति किलो तय किया गया था।
इसके बाद 22 मई को इसे बढ़ाकर 15.80 रुपये प्रति किलो किया गया।
बाजार के रुख को देखते हुए 13 जून को कीमतों में फिर बढ़ोतरी की गई और इसे 16.50 रुपये प्रति किलो किया गया।
इसके ठीक एक हफ्ते बाद 20 जून को इसे और बढ़ाकर 17.30 रुपये प्रति किलो का स्तर दिया गया।
जून के आखिरी दिनों में इसे बढ़ाकर 18.75 रुपये प्रति किलो किया गया था।
अब 4 जुलाई से इसे अंतिम रूप से संशोधित करते हुए सीधे 21.25 रुपये प्रति किलो यानी 2,125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।
देश में प्याज उत्पादन और उपलब्धता की वर्तमान स्थिति
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए दूसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, देश में वर्ष 2025-26 के दौरान कुल प्याज उत्पादन लगभग 307.37 लाख मीट्रिक टन रहने की उम्मीद जताई गई है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष यानी 2024-25 के 307.67 लाख मीट्रिक टन के कुल उत्पादन के लगभग बराबर ही है।
इस उत्पादन अनुमान के आधार पर उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस समय देश के भीतर प्याज की उपलब्धता को लेकर किसी भी प्रकार की चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। देश में प्याज का कुल उत्पादन घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
प्रमुख उत्पादक राज्यों और थोक मंडियों के ताजा आंकड़े
देश के प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों जैसे महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में वर्तमान में प्याज का पर्याप्त और सुरक्षित स्टॉक मौजूद है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भंडारित प्याज की कमी का कोई भी संकेत कहीं से नहीं मिला है।
अखिल भारतीय स्तर पर प्रमुख थोक मंडियों में प्याज की दैनिक आवक 50,000 मीट्रिक टन से अधिक बनी हुई है। अकेले महाराष्ट्र की मंडियों से हर दिन 30,000 मीट्रिक टन से ज्यादा प्याज की आपूर्ति की जा रही है। मंडियों में प्याज का औसत थोक भाव फिलहाल 18 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास चल रहा है, जबकि देश भर के खुदरा बाजारों में आम उपभोक्ताओं को यह औसतन 31 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मिल रहा है।
मानसून में देरी और मंडियों में सट्टेबाजी का माहौल
वर्तमान समय में देश के कुछ हिस्सों में मानसून के आगमन में हुई देरी और सामान्य से कम वर्षा के कारण बाजार में एक अलग तरह की हलचल देखी जा रही है। विशेषकर महाराष्ट्र के नासिक और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों जैसे प्रमुख उत्पादन केंद्रों में व्यापारियों के एक वर्ग द्वारा सट्टेबाजी की गतिविधियां बढ़ गई हैं।
व्यापारी अच्छी गुणवत्ता वाली प्याज को भविष्य में ऊंची कीमतें मिलने की उम्मीद में रोककर रख रहे हैं। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि यह सट्टेबाजी जमीनी मांग के कारण नहीं बल्कि केवल भविष्य के मुनाफे की उम्मीदों पर आधारित है। अच्छी गुणवत्ता वाली यह प्याज वर्तमान में सुरक्षित भंडारों में है, जिसे आने वाले त्योहारों और कम आपूर्ति वाले महीनों के दौरान बाजार में उतारकर कीमतों को नियंत्रित किया जाएगा।
विदेशी बाजारों में पाकिस्तानी और चीनी प्याज से मिल रही कड़ी टक्कर
जून के महीने में भारत से लगभग 1.50 लाख मीट्रिक टन प्याज का विदेशों में सफलतापूर्वक निर्यात किया गया है। लेकिन आने वाले समय में भारतीय निर्यात की इस रफ्तार में कुछ कमी आने की आशंका जताई जा रही है।
वैश्विक व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार, खाड़ी देशों, श्रीलंका और सुदूर पूर्व के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पाकिस्तान और चीन की नई फसलें बेहद कम और प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय प्याज को कड़ी चुनौती मिल रही है। इस स्थिति में केंद्र सरकार द्वारा घरेलू स्तर पर खरीद की कीमतों को बढ़ाना भारतीय किसानों के लिए एक बेहतरीन सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा।
खरीफ सीजन की बुवाई की प्रगति और क्षेत्रीय रिपोर्ट
मानसून के सुस्त मिजाज का असर अब प्याज की अगली फसल यानी खरीफ सीजन की बुवाई पर भी दिखने लगा है। देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक क्षेत्र महाराष्ट्र के नासिक में इस साल खरीफ प्याज की बुवाई में लगभग 15 दिनों की देरी दर्ज की गई है।
दूसरी ओर, कर्नाटक के प्रमुख उत्पादक बेल्ट जैसे चित्रदुर्ग और चल्लकेरे में बुवाई की प्रगति सामान्य स्तर के मुकाबले केवल 60 प्रतिशत तक ही पहुंच सकी है। इस देरी के कारण भी बाजार के जानकार मान रहे हैं कि आने वाले महीनों में बफर स्टॉक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाएगी और सरकार का मूल्य स्थिरता कोष बाजार को अनियंत्रित होने से बचाएगा।



