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छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय मास्टरस्ट्रोक: राज्य सरकार ने पूरी की एल्डरमैनों की नियुक्ति प्रक्रिया, बस्तर, बिलासपुर और दुर्ग संभाग की सूचियां जारी होने से स्थानीय राजनीति में भारी उत्साह

छत्तीसगढ़ सरकार ने स्थानीय शासन को मजबूत करने और विकास कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक निर्णय लिया है। रायपुर और सरगुजा संभागों के बाद अब राज्य सरकार ने बस्तर, बिलासपुर और दुर्ग संभाग के सभी नगरीय निकायों में एल्डरमैन यानी मनोनीत पार्षदों की बहुप्रतीक्षित नियुक्तियां कर दी हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा आधिकारिक राजपत्रित सूची जारी होने के साथ ही प्रदेश के सभी पांचों संभागों में एल्डरमैनों की तैनाती की वैधानिक प्रक्रिया पूरी हो गई है। इस निर्णय से नगरीय निकायों में जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ जमीनी स्तर के अनुभवी कार्यकर्ताओं को शासन-प्रशासन का हिस्सा बनने का ऐतिहासिक अवसर मिला है।







रायपुर, 3 जुलाई 2026: छत्तीसगढ़ के त्रि-स्तरीय नगरीय निकायों के सुचारू संचालन और शहर विकास की रणनीतियों को एक नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार ने अपनी प्रशासनिक शक्तियों का बड़ा प्रयोग किया है।

छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (Urban Administration and Development Department) के मंत्रालय महानदी भवन से जारी अलग-अलग आधिकारिक आदेशों के तहत राज्य के बचे हुए तीन प्रमुख संभागों- बस्तर, बिलासपुर और दुर्ग के सभी नगर पालिक निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों के लिए एल्डरमैनों (मनोनीत पार्षदों) के नामों की घोषणा कर दी गई है।

इस अंतिम चरण की सूची के बाहर आते ही प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हर्ष की लहर दौड़ गई है, क्योंकि इसके माध्यम से स्थानीय निकायों में विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

तीनों संभागों में बड़े पैमाने पर तैनात किए गए अनुभवी चेहरे

विभाग द्वारा जारी की गई नई सूची के अनुसार, इस चरण में कुल मिलाकर सैकड़ों सक्रिय और अनुभवी सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं को एल्डरमैन के रूप में मनोनीत किया गया है। संभागवार आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्य सरकार ने बस्तर संभाग के अंतर्गत आने वाले विभिन्न निकायों में 63 एल्डरमैन नियुक्त किए हैं।

इसके साथ ही राज्य के सबसे बड़े प्रशासनिक संभागों में से एक बिलासपुर संभाग में सर्वाधिक 197 एल्डरमैनों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, दुर्ग संभाग के अंतर्गत आने वाले शहरी क्षेत्रों के विकास के लिए 146 मनोनीत पार्षदों के नामों को हरी झंडी दी गई है। इन नियुक्तियों में समाज के विभिन्न वर्गों, सेवानिवृत्त विशेषज्ञों और स्थानीय स्तर पर लंबे समय से काम कर रहे वरिष्ठ नागरिकों को प्राथमिकता दी गई है।

रायपुर और सरगुजा संभागों में पहले ही पूरी हो चुकी है तैनाती

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने इस प्रशासनिक कवायद की शुरुआत पिछले चरणों में की थी, जिसके तहत रायपुर और सरगुजा संभाग के नगरीय निकायों को प्राथमिकता दी गई थी। उन दोनों संभागों के अंतर्गत आने वाले नगर निगमों और नगर पालिकाओं में पहले ही रिकॉर्ड 254 एल्डरमैनों की नियुक्ति की जा चुकी थी।

अब बस्तर, बिलासपुर और दुर्ग संभाग की नवीनतम सूचियों के जारी होने के बाद छत्तीसगढ़ के सभी पांचों संभागों के अंतर्गत आने वाले नगरीय निकायों में मनोनयन की यह जटिल प्रक्रिया पूर्ण रूप से संपन्न हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नियुक्तियों के माध्यम से सरकार ने न केवल स्थानीय निकायों के संचालन को सुदृढ़ किया है, बल्कि मैदानी स्तर पर काम करने वाले अनुभवी नेतृत्व को भी सीधा सम्मान दिया है।

तत्काल प्रभाव से संभालेंगे कमान, अधिसूचना में अधिनियमों का हवाला

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अवर सचिव द्वारा हस्ताक्षरित इस आधिकारिक आदेश में साफ तौर पर निर्देश दिए गए हैं कि सभी नवनियुक्त एल्डरमैन संबंधित नगरीय निकायों में तत्काल प्रभाव से अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे। इस संबंध में सभी निकायों के आयुक्तों, मुख्य नगरपालिका अधिकारियों (सीएमओ) और कलेक्टरों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

इस महत्वपूर्ण आदेश में बताया गया है कि ये सभी नियुक्तियां पूरी तरह से विधिक और वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत की गई हैं। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 (Chhattisgarh Municipal Corporation Act, 1956) की सुसंगत धाराओं तथा छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 (Chhattisgarh Municipalities Act, 1961) के तहत प्रदत्त शक्तियों का विधिवत उपयोग करते हुए इन नामों पर अपनी अंतिम मुहर लगाई है। ये सभी मनोनीत पार्षद आगामी आदेश तक अपने-अपने पदों पर बने रहेंगे और संबंधित परिषदों की बैठकों में हिस्सा लेंगे।

नगरीय निकायों के विकास में क्या होगी एल्डरमैनों की भूमिका

स्थानीय स्वशासन और भारतीय नगर निकाय व्यवस्था में एल्डरमैन का पद बेहद महत्वपूर्ण और गरिमापूर्ण माना जाता है। एल्डरमैन मूल रूप से ऐसे व्यक्ति होते हैं जिन्हें नगर के विकास, नागरिक सुविधाओं, लोक स्वास्थ्य, नगर नियोजन या प्रशासनिक मामलों का गहरा और व्यावहारिक अनुभव होता है।

नियमों के मुताबिक, हालांकि एल्डरमैनों को नगर निगम या नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष या महापौर के चुनाव में सीधे तौर पर मतदान करने का अधिकार नहीं होता है, लेकिन वे सामान्य सभा (जनरल बॉडी) की बैठकों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। वे नगर के विकास से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों, बजट चर्चाओं, सड़क-नाली निर्माण और जल आपूर्ति जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं पर अपनी विशेषज्ञ राय देते हैं। उनके आने से परिषद के भीतर तकनीकी और व्यावहारिक चर्चाओं का स्तर ऊंचा होता है, जिसका सीधा लाभ उस शहर या नगर की आम जनता को मिलता है।

संभागवार नियुक्तियों का विस्तृत विश्लेषण और सांख्यिकीय डेटा

राज्य सरकार द्वारा जारी की गई सूचियों के आधार पर छत्तीसगढ़ के सभी पांचों संभागों में एल्डरमैनों की कुल संख्या और उनकी स्थिति को इस प्रकार समझा जा सकता है:

संभाग का नामएल्डरमैनों की कुल संख्याप्रभावशीलता की स्थितिमुख्य फोकस क्षेत्र
बिलासपुर संभाग197तत्काल प्रभाव से लागूऔद्योगिक विकास और नागरिक सुविधाएं
दुर्ग संभाग146तत्काल प्रभाव से लागूशहरी बुनियादी ढांचा और स्वच्छता
बस्तर संभाग63तत्काल प्रभाव से लागूआदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में विकास योजनाएं
रायपुर और सरगुजा संभाग254पूर्व में ही तैनातराजधानी क्षेत्र और उत्तर छत्तीसगढ़ का विकास
कुल योग660संपूर्ण प्रदेश में प्रक्रिया पूर्णविकेंद्रीकृत शासन और जनभागीदारी

राजनैतिक और सामाजिक हलकों में फैसले का चौतरफा स्वागत

राज्य सरकार के इस कदम का स्थानीय निकायों के पदाधिकारियों, पार्षदों और आम नागरिकों ने पुरजोर स्वागत किया है। कई नगर निगमों के महापौरों और अध्यक्षों का कहना है कि लंबे समय से एल्डरमैनों के पद रिक्त होने के कारण कई महत्वपूर्ण वार्डों और समितियों में नीतिगत फैसले लेने में व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही थीं।

अनुभवी लोगों के परिषद में आने से अब वार्ड समितियों और परामर्शदात्री समितियों का गठन आसानी से हो सकेगा। इसके साथ ही, स्थानीय समस्याओं को सदन के भीतर अधिक मुखरता और विशेषज्ञता के साथ उठाया जा सकेगा। आम जनता में भी इस बात को लेकर खुशी है कि अब उनके नगर के विकास के लिए अधिक संख्या में जिम्मेदार प्रतिनिधि उपलब्ध होंगे।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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