AstrologyBig BreakingFeaturedLifestylePanchangReligion
Trending

3 जुलाई 2026 का पंचांग: जानें आज का राहुकाल समय, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

आज आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है, जिसमें आज का राहुकाल सुबह 10 बजकर 41 मिनट से दोपहर 12 बजकर 25 मिनट तक रहेगा, इसलिए इस अवधि में किसी भी प्रकार के नए और शुभ कार्यों को करने से पूरी तरह बचना चाहिए।







रायपुर, 3 जुलाई 2026: सनातन धर्म में समय की गणना और उसके प्रभावों को समझने के लिए दैनिक पंचांग का विशेष महत्व माना गया है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ, व्यापार की शुरुआत या यात्रा पर जाने से पहले लोग शुभ मुहूर्त और राहुकाल की स्थिति को अवश्य देखते हैं।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, हर दिन एक निश्चित समय ऐसा आता है जिसे बेहद अशुभ माना जाता है। इस कालखंड को राहुकाल कहा जाता है। आज हम आपको विस्तार से बताएंगे कि आज 3 जुलाई 2026 को राहुकाल का समय क्या है, आज का संपूर्ण पंचांग क्या कहता है, आज के शुभ और अशुभ मुहूर्त कौन से हैं और इसका धार्मिक महत्व क्या है।

राहुकाल क्या होता है और क्यों होता है

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल दिन का वह विशिष्ट समय होता है जिस दौरान ब्रह्मांड में राहु ग्रह का प्रभाव सबसे अधिक और नकारात्मक होता है। राहु को एक छाया ग्रह माना गया है, जिसे ज्योतिष में भ्रम, बाधा, अनिश्चितता और नकारात्मक ऊर्जा का कारक कहा जाता है।

सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक के पूरे दिन के समय को कुल आठ बराबर भागों में विभाजित किया जाता है। दिन के इन आठ भागों में से एक भाग पूरी तरह से राहु के प्रभाव में रहता है। इसी एक भाग की अवधि को राहुकाल का नाम दिया गया है। चूंकि यह समय राहु की संदूषित ऊर्जा से प्रभावित होता है, इसलिए इसे ज्योतिषीय गणनाओं में अत्यंत दूषित और अशुभ माना गया है।

इस समय कोई अच्छा या शुभ कार्य शुरू क्यों नहीं करना चाहिए

राहुकाल के दौरान किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य को शुरू न करने के पीछे गहरा आध्यात्मिक और ज्योतिषीय कारण छिपा हुआ है। ऐसी मान्यता है कि राहुकाल की अवधि में शुरू किए गए कार्यों में मानसिक भ्रम पैदा होता है और उस कार्य के मार्ग में अप्रत्याशित बाधाएं, नुकसान या असफलता का सामना करना पड़ता है।

इस समय में ब्रह्मांडीय ऊर्जा सकारात्मक कार्यों के अनुकूल नहीं होती है। यदि कोई व्यक्ति इस काल में नया व्यापार, गृह प्रवेश, विवाह की बात या कोई महत्वपूर्ण वित्तीय समझौता शुरू करता है, तो राहु के दुष्प्रभाव के कारण उस कार्य का परिणाम विपरीत मिल सकता है। यही कारण है कि इस समय को टालकर केवल शुभ चौघड़िया या शुभ मुहूर्त में ही काम शुरू करने की सलाह दी जाती है।

राहुकाल में क्या-क्या चीजें नहीं करनी चाहिए

ज्योतिष शास्त्र के नियमों के अनुसार, राहुकाल के दौरान कुछ विशेष कार्यों को करने की सख्त मनाही होती है। इस समय अवधि में आपको निम्नलिखित कार्यों को करने से पूरी तरह से बचना चाहिए:

  • किसी भी नए व्यापार, व्यवसाय या दुकान का उद्घाटन बिल्कुल न करें।
  • भूमि, भवन, वाहन, सोना या नए आभूषणों की खरीदारी इस समय में वर्जित मानी जाती है।
  • विवाह, सगाई, मुंडन या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत इस अवधि में न करें।
  • किसी महत्वपूर्ण व्यावसायिक डील या नौकरी से जुड़े अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने से बचें।
  • इस समय में लंबी दूरी की यात्रा की शुरुआत करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे दुर्घटना या रुकावट का खतरा रहता है।

राहुकाल में क्या-क्या कार्य किए जा सकते हैं

यद्यपि राहुकाल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है, परंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि इस समय सभी प्रकार के कार्य रुक जाते हैं। इस काल में कुछ विशेष प्रकार के कार्य किए जा सकते हैं जो राहु के नकारात्मक प्रभाव को कम करते हैं:

  • जो कार्य पहले से लगातार चले आ रहे हैं, उन्हें इस समय भी सामान्य रूप से जारी रखा जा सकता है।
  • राहुकाल में भगवान शिव, मां दुर्गा या हनुमान जी की पूजा-आराधना करना अत्यंत फलदायी होता है।
  • इस समय में राहु ग्रह के बीज मंत्रों का जाप करने से राहु जनित दोष शांत होते हैं।
  • यदि आप इस समय किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को काले तिल, उड़द की दाल या काले कंबल का दान करते हैं, तो इससे मानसिक शांति मिलती है।
  • नियमित रूप से किए जाने वाले दैनिक घरेलू या कार्यालयीन काम इस अवधि में निर्बाध रूप से किए जा सकते हैं।

आज 3 जुलाई 2026 के शुभ और अशुभ मुहूर्त

आज के दिन कई प्रकार के शुभ और अशुभ काल निर्मित हो रहे हैं। दिनचर्या की योजना बनाने के लिए इन समयों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।

मुहूर्त का प्रकारसमय (शुरुआत से समाप्ति तक)
अभिजीत मुहूर्त (सबसे शुभ समय)दोपहर 11:58 बजे से दोपहर 12:54 बजे तक
राहुकाल (अशुभ समय)सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक
गुलिक काल (अशुभ समय)सुबह 07:13 बजे से सुबह 08:57 बजे तक
यमगण्ड काल (अशुभ समय)दोपहर 03:55 बजे से शाम 05:39 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः काल)सुबह 04:07 बजे से सुबह 04:47 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त (सायं काल)शाम 07:22 बजे से शाम 07:42 बजे तक

आज का संपूर्ण हिंदू पंचांग

वैदिक पंचांग के मुख्य पांच अंग तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार होते हैं। आज 3 जुलाई 2026 का विस्तृत पंचांग इस प्रकार है:

  • दिनांक: 3 जुलाई 2026
  • वार: शुक्रवार
  • मास: आषाढ़ मास (पूर्णिमान्त)
  • पक्ष: कृष्ण पक्ष
  • तिथि: तृतीया तिथि सुबह 11 बजकर 20 मिनट तक, इसके बाद चतुर्थी तिथि का आरंभ
  • नक्षत्र: श्रवण नक्षत्र सुबह 11 बजकर 46 मिनट तक, इसके बाद धनिष्ठा नक्षत्र
  • योग: विष्कम्भ योग शाम 04 बजकर 58 मिनट तक, इसके बाद प्रीति योग
  • करण: विष्टि (भद्रा) सुबह 11 बजकर 20 मिनट तक, इसके बाद बव करण मध्यरात्रि 12 बजकर 03 मिनट तक (4 जुलाई)
  • सूर्योदय का समय: सुबह 05 बजकर 28 मिनट पर
  • सूर्यास्त का समय: शाम 07 बजकर 24 मिनट पर
  • चंद्रोदय का समय: रात 09 बजकर 53 मिनट पर
  • चन्द्रास्त का समय: सुबह 08 बजकर 07 मिनट पर (अगले दिन)
  • सूर्य राशि: मिथुन राशि में गतिशील
  • चन्द्र राशि: मकर राशि में दोपहर बाद तक, इसके बाद कुंभ राशि में प्रवेश

आज का धार्मिक महत्व

आज आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। सनातन परंपरा में कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इस तिथि की अधिष्ठात्री देवी स्वयं माता गौरी (मां पार्वती) हैं। आज के दिन माता गौरी और भगवान शिव की संयुक्त रूप से पूजा करने का विधान है।

ऐसा माना जाता है कि जो भी व्यक्ति आज के दिन मां गौरी की श्रद्धापूर्वक आराधना करता है, उसके वैवाहिक जीवन के सभी तनाव दूर होते हैं और घर में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है। इसके साथ ही आज शुक्रवार का दिन होने के कारण धन की देवी माता महालक्ष्मी की पूजा के लिए भी यह एक उत्तम संयोग है। आज के दिन सफेद वस्तुओं का दान करना और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त एक साथ होने पर क्या करें

अक्सर लोगों के मन में यह बड़ा सवाल उठता है कि यदि किसी दिन राहुकाल और दिन का सबसे शुभ मुहूर्त यानी अभिजीत मुहूर्त दोनों एक ही समय पर पड़ जाएं, तो क्या ऐसी स्थिति में अभिजीत मुहूर्त में शुभ कार्य किया जा सकता है। ज्योतिष शास्त्र के प्रामाणिक ग्रंथों के अनुसार, अभिजीत मुहूर्त को भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय और शक्तिशाली मुहूर्त माना गया है। इसे सर्वदोष नाशक मुहूर्त भी कहा जाता है, जो दिन के अन्य सभी छोटे-मोटे दोषों को नष्ट करने की क्षमता रखता है।

परंतु, जब बात राहुकाल की आती है, तो राहुकाल को एक अत्यंत बलवान अशुभ समय माना गया है। शास्त्रों का स्पष्ट मत है कि यदि अभिजीत मुहूर्त के समय ही राहुकाल की अवधि भी चल रही हो, तो राहुकाल का नकारात्मक प्रभाव अभिजीत मुहूर्त की शुभता पर हावी हो जाता है। ऐसी स्थिति में अभिजीत मुहूर्त अपनी पूरी शुभता खो देता है।

अतः ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यदि राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त एक साथ आ जाएं, तो उस समय किसी भी नए या अत्यंत महत्वपूर्ण मांगलिक कार्य को करने से बचना चाहिए। कार्य को राहुकाल की समाप्ति के बाद आने वाले किसी अन्य शुभ चौघड़िया या मुहूर्त में करना ही सबसे सुरक्षित और श्रेयस्कर होता है।

अस्वीकरण (Disclaimer): The 4th Pillar News (www.the4thpillar.live) के इस लेख में दी गई राहुकाल, पंचांग, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व की समस्त जानकारियां धार्मिक मान्यताओं, प्रामाणिक ज्योतिषीय गणनाओं और सनातन कैलेंडरों पर आधारित हैं। यह समाचार केवल पाठकों की सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए प्रकाशित किया गया है। वेबसाइट इसके पूर्ण सत्य होने, सटीकता या इसके वैज्ञानिक आधार होने का कोई दावा नहीं करती है। किसी भी मुहूर्त, व्रत या पूजा-विधि को अपने जीवन में व्यावहारिक रूप से अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के किसी योग्य, प्रमाणित एवं अनुभवी ज्योतिषाचार्य या पंडित जी से व्यक्तिगत परामर्श अवश्य प्राप्त करें।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button