रायपुर, 23 जून 2026: नगर पालिक निगम क्षेत्र के भीतर चल रहे विभिन्न विकास कार्यों और शहर के प्रमुख प्रोजेक्ट्स की कछुआ गति को लेकर निगम प्रशासन ने अब बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।
विकास भवन के दृष्टी सभाकक्ष में सोमवार को आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे ने सभी जोन कमिश्नरों, कार्यपालन अभियंताओं (ईई) और उप-अभियंताओं (सब-इंजीनियरों) की क्लास ली। कमिश्नर ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि जनता से जुड़े विकास कार्यों में किसी भी स्तर पर लेटलतीफी या गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वर्क ऑर्डर के बाद आनाकानी करने वाले ठेकेदारों के टेंडर होंगे निरस्त
समीक्षा बैठक के दौरान निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे ने सभी आठों जोन के अंतर्गत स्वीकृत और निर्माणाधीन कार्यों की बिंदुवार और विस्तृत प्रगति रिपोर्ट देखी। इस दौरान यह बात सामने आई कि कई ऐसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स हैं जिनका वर्क ऑर्डर (कार्य आदेश) जारी हुए लंबा समय बीत चुका है, लेकिन संबंधित ठेकेदारों द्वारा धरातल पर काम शुरू करने में लगातार आनाकानी और टालमटोल की जा रही है।
इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए निगम कमिश्नर ने दो टूक निर्देश दिए कि ऐसे सभी ठेकेदारों के वर्क ऑर्डर तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाएं। इसके साथ ही तय समय पर काम शुरू न करने वाले और शहर के विकास में बाधा बनने वाले इन ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। वहीं, जो ठेकेदार काम तो कर रहे हैं लेकिन उनकी गति बेहद धीमी है, उन पर दैनिक आधार पर पेनाल्टी (आर्थिक दंड) लगाने का आदेश जारी किया गया है।
फील्ड पर नजर आएं इंजीनियर, गुणवत्ता खराब मिली तो भुगतना होगा अंजाम
कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे ने केवल ठेकेदारों पर ही नहीं, बल्कि निगम के तकनीकी अमले और इंजीनियरों की कार्यप्रणाली पर भी कड़े सवाल उठाए। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी सब-इंजीनियर और सहायक अभियंता कार्यालयों में बैठने के बजाय फील्ड पर नजर आएं। निर्माण स्थलों का नियमित दौरा कर कार्यों की कड़ाई से मॉनिटरिंग की जाए और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की लगातार लैब टेस्टिंग और ऑन-साइट जांच सुनिश्चित की जाए।
बैठक में अधिकारियों को सचेत करते हुए कमिश्नर ने कहा कि जितने भी विकास कार्य चल रहे हैं, वे सभी वर्क ऑर्डर में अंकित समय-सीमा के भीतर ही पूरे होने चाहिए। यदि किसी भी वार्ड या जोन में सड़क, नाली, भवन या अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग पाया गया या गुणवत्ता में कमी मिली, तो केवल ठेकेदार ही जिम्मेदार नहीं होगा। ऐसी स्थिति में संबंधित क्षेत्र के सब-इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी अनुशासनात्मक और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
ठेकेदारों की समस्याओं के सरलीकरण का भी दिया आश्वासन
बैठक के दूसरे सत्र में निगम कमिश्नर ने ठेकेदारों की व्यवहारिक समस्याओं पर भी चर्चा की। ठेकेदार संघ द्वारा उठाई गई बिलिंग में देरी, फंड आवंटन की लेटलतीफी और जटिल दस्तावेजीकरण की समस्याओं को सुनते हुए कमिश्नर ने राहत देने की बात भी कही। उन्होंने वित्तीय विंग को निर्देश दिया कि ठेकेदारों के वैध भुगतानों के लिए एक निश्चित टाइमलाइन बनाई जाए।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि ठेकेदार पूरी ईमानदारी, उच्च गुणवत्ता और समय-सीमा के भीतर जनता के हित का कार्य पूरा करते हैं, तो निगम प्रशासन उनके देयकों का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर करेगा, लेकिन अत्यंत बिलो रेट (कम दर) पर टेंडर लेने की आड़ में काम खराब करने वालों के लिए निगम में कोई जगह नहीं होगी।