रायपुर, 23 जून 2026: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सबसे संवेदनशील और प्रमुख क्षेत्रों में से एक, सेंट पॉल स्कूल परिसर के समीप चल रहे एक बड़े निर्माण कार्य पर जिला प्रशासन और नगर निगम की टीम ने संयुक्त रूप से एक बड़ी कार्रवाई की है।
कई हफ्तों से चल रहे तीव्र गति के विवाद के बाद, मंगलवार की सुबह प्रशासनिक अमला भारी पुलिस सुरक्षा के साथ मौके पर पहुंचा और विवादित निर्माणाधीन ढांचे को जेसीबी तथा पोकलेन मशीनों की सहायता से पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
इस बड़ी ध्वस्तीकरण कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया था।
सड़कों को किया गया बंद, बड़े अधिकारियों ने संभाली कमान
कार्रवाई की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने सेंट पॉल स्कूल परिसर की ओर जाने वाली दोनों तरफ की मुख्य सड़कों को अस्थायी रूप से बैरिकेड्स लगाकर बंद कर दिया था। आम जनता और वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह रोककर इस गुप्त व त्वरित ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
मौके पर स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए अपर कलेक्टर, अतिरिक्त उप पुलिस अधीक्षक (एडीसीपी), नगर निगम के जोन कमिश्नर, राजस्व विभाग के तहसीलदार और भारी संख्या में पुलिस बल के जवान तैनात रहे। जिला प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से नियमों के उल्लंघन और अवैध निर्माण की श्रेणी के तहत की गई है।
सामुदायिक भवन की आड़ में चर्च और धर्मांतरण केंद्र का था आरोप
इस निर्माणाधीन इमारत को लेकर पिछले काफी समय से स्थानीय स्तर और सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश देखा जा रहा था। हिंदू स्वाभिमान संगठन सहित कई अन्य स्थानीय संगठनों ने इस निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि यूनाइटेड चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया ट्रस्ट के नाम पर स्कूल प्रबंधन जनता और प्रशासन को गुमराह कर रहा था।
संगठनों का दावा था कि इसे केवल कागजों पर सामुदायिक भवन (कम्युनिटी हॉल) दर्शाया जा रहा था, जबकि धरातल पर इसका स्थापत्य और ढांचा पूरी तरह से एक विशाल चर्च के रूप में तैयार किया जा रहा था। विरोध कर रहे संगठनों ने यह भी आशंका जताई थी कि भविष्य में इस विशाल इमारत का उपयोग बड़े पैमाने पर प्रार्थना सभाओं और कथित धर्मांतरण की गतिविधियों को बढ़ावा देने के केंद्र के रूप में किया जाना था।
सरकारी जमीन की लीज खत्म होने का भी था विवाद
इस पूरे विवाद में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ताओं ने जमीन के स्वामित्व को लेकर कई महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज सार्वजनिक कर दिए। पुलिस और जिला कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापनों में यह बात प्रमुखता से उठाई गई थी कि सेंट पॉल स्कूल को शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन के लिए शासन द्वारा जो जमीन लीज (पट्टे) पर दी गई थी, उसकी वैधानिक समय-सीमा वर्ष 2022 में ही समाप्त हो चुकी है।
पट्टे की अवधि खत्म होने के बावजूद बिना वैध खसरा, नक्शा और नगर निगम की अनिवार्य भवन अनुज्ञा (बिल्डिंग परमिशन) के इतने बड़े पैमाने पर कंक्रीट का ढांचा खड़ा किया जा रहा था। इस अवैध निर्माण और इसमें कथित विदेशी फंडिंग के इस्तेमाल की शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए प्रशासन ने पहले निर्माण कार्य को रुकवाया और फिर जांच पूरी होने के बाद इसे अवैध घोषित करते हुए पूरी तरह से मलबे में तब्दील कर दिया।
नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, सरकारी जमीनों पर बिना अनुमति और तय शर्तों के विपरीत किए जाने वाले किसी भी तरह के निर्माण के खिलाफ आने वाले दिनों में भी इसी तरह की सख्त शून्य-सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) की नीति अपनाई जाएगी।