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बीजेपी का असली चेहरा उजागर: महिला आरक्षण सिर्फ मुखौटा, ‘परिसीमन’ के जरिए सीटें बढ़ाना था असली मकसद-रंजीत रंजन

​राज्यसभा सांसद रंजीत रंजन और कांग्रेस महिला विधायकों ने खोली पोल,कहा- भाजपा की मंशा आरक्षण की नहीं, षड्यंत्र की है





रायपुर । छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से आयोजित एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता में राज्यसभा सांसद रंजीत रंजन और कांग्रेस की महिला विधायकों ने केंद्र की मोदी सरकार पर महिला आरक्षण को लेकर देश को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं ने दो टूक कहा कि भाजपा वास्तव में महिलाओं को अधिकार नहीं देना चाहती, बल्कि आरक्षण की आड़ में अपना राजनैतिक एजेंडा साधने की कोशिश कर रही है।

​सांसद रंजीत रंजन ने कहा कि प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक इस मुद्दे पर असत्य भाषण कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ (128वां संविधान संशोधन) संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून बन चुका है। इसके बावजूद भाजपा इसे तुरंत लागू करने के बजाय 2034 तक क्यों टाल रही है? कांग्रेस का आरोप है कि सरकार 2023 के बिल में संशोधन कर महिला आरक्षण को इसी वक्त प्रभावी बना सकती थी, लेकिन उसकी नीयत साफ नहीं है।

​पत्रकार वार्ता में खुलासा किया गया कि 16 अप्रैल 2026 को संसद में लाया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक असल में महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन के जरिए लोकसभा सीटों को 850 तक बढ़ाने का एक गुप्त प्रयास था। रंजीत रंजन ने सवाल उठाया कि जब 2026-27 की जनगणना की प्रक्रिया जारी है, तो पुराने आंकड़ों के आधार पर परिसीमन क्यों थोपा जा रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिला आरक्षण को एक ‘मुखौटे’ की तरह इस्तेमाल कर रही है ताकि वह केंद्र शासित प्रदेशों के कानूनों में मनमाना बदलाव कर सके।

महिला विधायकों ने एक सुर में कहा कि आज स्थानीय निकायों और पंचायतों में महिलाओं का जो प्रभावी नेतृत्व दिख रहा है, वह कांग्रेस की ऐतिहासिक नीतियों और राजीव गांधी व नरसिम्हा राव सरकार की दूरदर्शिता की देन है। साल 1989 में राजीव गांधी द्वारा पंचायतों में महिला आरक्षण की नींव रखने और 1993 में पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार द्वारा इसे कानूनी जामा पहनाने से लेकर 2010 में डॉ. मनमोहन सिंह सरकार द्वारा राज्यसभा में बिल पास कराने तक, कांग्रेस ने सदैव महिलाओं को उनका हक दिलाने का काम किया है। इसी का परिणाम है कि आज देश भर में 15 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही हैं।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की वरिष्ठ विधायक अनिला भेड़िया, अंबिका मरकाम, संगीता सिन्हा, सावित्री मंडावी, चातुरी नंद, शेषराज हरवंश, हर्षिता बघेल, कविता प्राण लहरे, विद्यावती सिदार सहित प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत, प्रीति उपाध्याय और प्रगति वाजपेयी विशेष रूप से उपस्थित थीं।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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