बस्तर में 108 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण; करोड़ों का नकदी, सोना और हथियार बरामद

दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी से जुड़े 108 माओवादी सुरक्षा बलों के सामने सरेंडर कर मुख्यधारा में लौटे। सरेंडर करने वालों में कई इनामी नक्सली और 44 महिलाएं शामिल, पुलिस की पुनर्वास नीति का दिखा असर।





रायपुर, 12 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। बुधवार को 108 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। आत्मसमर्पण करने वालों में 44 महिला माओवादी भी शामिल हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रतिबंधित संगठन Communist Party of India (Maoist) की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी से जुड़े इन माओवादियों ने जगदलपुर के लालबाग स्थित पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर में वरिष्ठ पुलिस और अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इसे बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है।


पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर छोड़ा हिंसा का रास्ता

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक Sundarraj P ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी पुलिस की पूना मारगेम पुनर्वास पहल और राज्य सरकार की सरेंडर एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटे हैं।

उन्होंने कहा कि लंबे समय से नक्सली संगठन में सक्रिय कई सदस्य अब विकास और सामान्य जीवन की ओर लौटना चाहते हैं। सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जाते हैं।


कई बड़े इनामी नक्सली भी शामिल

पुलिस के अनुसार सरेंडर करने वालों में कई महत्वपूर्ण पदों पर सक्रिय माओवादी शामिल हैं। इनमें 6 डिवीजनल कमेटी सदस्य शामिल हैं जिन पर 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसके अलावा 22 एरिया कमेटी सदस्य भी हैं जिन पर 5-5 लाख रुपये का इनाम था।

इसके अलावा बड़ी संख्या में सक्रिय कैडर और निचले स्तर के माओवादी सदस्य भी संगठन छोड़कर मुख्यधारा में लौटे हैं।


करोड़ों की नकदी, सोना और हथियार बरामद

सुरक्षा बलों ने माओवादियों के एक ठिकाने पर छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, सोना और हथियार भी बरामद किए हैं। बरामद सामग्री में लगभग 3.61 करोड़ रुपये नकद, करीब 1.64 करोड़ रुपये कीमत का लगभग 1 किलो सोना और AK-47, इंसास, LMG और BGL जैसे आधुनिक हथियार शामिल हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह बरामदगी नक्सली संगठन के आर्थिक नेटवर्क और हथियार तंत्र के लिए बड़ा झटका है।


कई प्रमुख माओवादी नेताओं ने डाले हथियार

सरेंडर करने वाले प्रमुख माओवादियों में राहुल तेलाम, पंडरु कोवासी, झितरु ओयाम, रामधर उर्फ बीरु, मल्लेष, मुचाकी और कोसा मंडावी जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें से कई लोग पीएलजीए बटालियन और संगठन की क्षेत्रीय इकाइयों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।


बस्तर के कई जिलों से आए माओवादी

राज्य के गृह मंत्री Vijay Sharma ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों से जुड़े हैं। इनमें बीजापुर से 37, दंतेवाड़ा से 30, सुकमा से 18, बस्तर से 16, नारायणपुर से 4 और कांकेर से 3 माओवादी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि यह नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों और सुरक्षा बलों की रणनीति का सकारात्मक परिणाम है।


नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य

गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करना है।

वहीं मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि बस्तर में बंदूकें हार रही हैं और विश्वास जीत रहा है। उन्होंने इसे बस्तर में शांति, सुशासन और विकास की दिशा में बड़ा कदम बताया।


पिछले 26 महीनों में हजारों नक्सलियों ने छोड़ी हिंसा

पुलिस के अनुसार पिछले 26 महीनों में छत्तीसगढ़ में कुल 2714 माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं।

इसके अलावा 1 जनवरी 2024 से 9 मार्च 2026 के बीच केवल बस्तर संभाग में ही 2625 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह आंकड़ा नक्सली संगठन की कमजोर होती पकड़ का संकेत है।


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Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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