नर-सेवा को नारायण-सेवा मानकर समाजसेवी कुबेर राठी ने प्रज्वलित की परोपकार की अखंड ज्योति, हर शनिवार हजारों श्रद्धालु पा रहे हैं प्रभु का प्रसाद
बजरंगबली की कृपा और कुबेर का संकल्प,रेलवे स्टेशन के सामने 'सेवा ही परमो धर्म' का जीवंत उदाहरण

रायपुर । छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ‘सेवा ही संकल्प’ का एक अनुपम उदाहरण देखने को मिल रहा है। स्थानीय रेलवे स्टेशन के सम्मुख स्थित सर्व धर्म हनुमान मंदिर में प्रति शनिवार को आयोजित होने वाला महाभंडारा अब केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुष्ठान बन चुका है। समाजसेवी कुबेर राठी के नेतृत्व में यह सेवा यात्रा वर्ष 2009 से बिना रुके निरंतर प्रवाहित हो रही है।

शनिवार की मंगल बेला पर कार्यक्रम का शुभारंभ विधि-विधान से पूजन-अर्चन के साथ हुआ। समाजसेवी कुबेर राठी और भाजपा प्रवक्ता राजकुमार राठी ने संकटमोचन हनुमान जी की भव्य आरती की। शंखध्वनि और ‘जय श्री राम’ के उद्घोष के बीच उन्होंने प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

शास्त्रों में कहा गया है कि ‘परहित सरिस धर्म नहिं भाई’, अर्थात दूसरों की सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। इसी भाव को आत्मसात करते हुए समाजसेवी कुबेर राठी ने इस महाभंडारे को ईश्वर की इच्छा बताया। उन्होंने कहा कि यह मेरा सामर्थ्य नहीं, बल्कि पवनपुत्र हनुमान जी की असीम अनुकंपा है कि उन्होंने मुझे इस पुण्य कार्य के लिए माध्यम चुना। 2009 से जारी यह महाभंडारा प्रभु की कृपा का ही फल है। जब तक ईश्वरीय इच्छा रहेगी, यह सेवा यज्ञ इसी प्रकार अनवरत चलता रहेगा।

समाजसेवी कुबेर राठी ने इस सेवा यात्रा के भावुक पहलू पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रेलवे स्टेशन परिसर और उसके आस-पास रहने वाले निर्धन व जरूरतमंद लोग जब पूरी तृप्ति के साथ यह भोजन ग्रहण करते हैं, तो उनके संतोषी चेहरों को देखकर जो आत्मिक शांति और हृदय को सुकून मिलता है, वह किसी भी सांसारिक उपलब्धि से कहीं बढ़कर है। उन्होंने आगे भावविभोर होकर कहा कि नर-सेवा ही वास्तव में नारायण-सेवा है और इन अभावग्रस्त लोगों के आशीर्वाद में ही ईश्वर का असली वास है, यही कारण है कि यह प्रकल्प बिना किसी व्यवधान के पिछले 15 वर्षों से अनवरत संचालित हो रहा है।

सर्व धर्म हनुमान मंदिर की ख्याति और आस्था का आलम यह है कि हर शनिवार यहाँ 5000 से 6000 श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। मंदिर की महिमा पर प्रकाश डालते हुए भाजपा प्रवक्ता राजकुमार राठी ने कहा कि यह स्थान अपने आप में अद्भुत और सिद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि यहाँ जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा से अपनी अर्जी लगाता है, बजरंगबली उसे रिक्त हस्त नहीं लौटने देते।

यह महाभंडारा न केवल भूखों की तृप्ति का साधन है, बल्कि सामाजिक समरसता का एक ऐसा केंद्र बन चुका है जहाँ ऊंच-नीच के भेदभाव से परे, समाज के हर वर्ग के लोग एक पंक्ति में बैठकर प्रभु का प्रसाद पाते हैं।

इस शुभ अवसर पर अरुण सिंघानिया,गुरबख्श छाबड़ा, डॉ नवीन बाफना,मन्नू नथानी,कृति मखीजा,रमन गोयल ,भक्तजन सहित गणमान्यजन उपस्थित रहे।



