छत्तीसगढ़ में कुलपतियों की नियुक्ति पर सियासत गरमाई: कांग्रेस का आरोप- ‘गुजरात मॉडल’ से हो रही नियुक्तियां

वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने की स्वतंत्र एजेंसी से जांच और कॉल डिटेल्स खंगालने की मांग।





रायपुर । छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है। वरिष्ठ कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में कुलपतियों की नियुक्तियां योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि गुजरात से संचालित एक विशेष ‘डील’ के तहत की जा रही हैं।

धनंजय ठाकुर ने दावा किया कि राज्य सरकार ने लोकभवन में गुजरात के एक व्यक्ति को प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ किया है, जिसके पास उस पद की मूल योग्यता तक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुलपतियों की नियुक्तियां तब तक नहीं की गईं, जब तक इस व्यक्ति की तैनाती नहीं हुई। कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार, यह व्यक्ति छत्तीसगढ़ में एक समानांतर ‘पावर सेंटर’ बन गया है और जब तक प्रतिभागी से डील फाइनल नहीं होती, नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए जाते।

कांग्रेस ने उच्च शिक्षा के सर्वोच्च पदों को “पेमेंट सीट” करार देते हुए कहा कि विष्णुदेव साय सरकार अपने गुजरात स्थित एजेंडे के माध्यम से कुलाधिपति पर दबाव बना रही है। ठाकुर ने सवाल उठाया कि क्या हेमचंद दुर्ग विवि, खैरागढ़ संगीत विवि और सुंदरलाल शर्मा मुक्त विवि के कुलपतियों की नियुक्ति पारदर्शी है? उन्होंने दावा किया कि शिक्षा जगत में इन नियुक्तियों के लिए करोड़ों के लेनदेन की चर्चा आम है।

शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, जगदलपुर का उदाहरण देते हुए ठाकुर ने कहा कि कुलपति मनोज श्रीवास्तव के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात के उसी प्रभावशाली व्यक्ति के संरक्षण के कारण जांच रिपोर्ट ठंडे बस्ते में डाल दी गई। उन्होंने इस मामले में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और स्थानीय विधायक किरण देव सिंह की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।

कांग्रेस प्रवक्ता ने दुख जताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य वर्गों के विद्वान, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हैं, उन्हें दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने तंज कसा कि अगर प्रदेश के काबिल प्राध्यापकों को अपने ही राज्य में अवसर नहीं मिलेगा, तो क्या उन्हें कुलपति बनने के लिए गुजरात जाना होगा?

धनंजय ठाकुर ने मांग की है कि अभी तक हुई सभी नियुक्तियों की सूक्ष्म जांच एक स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। उन्होंने उक्त ‘गुजराती व्यक्ति’ के कॉल डिटेल्स और लोकेशन की जांच करने की भी अपील की, ताकि नियुक्तियों के पीछे के सच का खुलासा हो सके।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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