स्टाइपेंड और हॉस्टल की मांग को लेकर दंत चिकित्सकों का हल्लाबोल,3 दिनों तक ठप रहेगा कामकाज
छात्राओं के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधा न होने पर जताया आक्रोश

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी स्थित शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय (GDC) के जूनियर डॉक्टरों और इंटर्न्स ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। अपनी विभिन्न मांगों, विशेषकर स्टाइपेंड में वृद्धि और बुनियादी सुविधाओं को लेकर चिकित्सकों ने गुरुवार से तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस विरोध प्रदर्शन के कारण अस्पताल की ओपीडी (OPD) और नियमित दंत चिकित्सा सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है।
मांगों की अनदेखी पर फूटा गुस्सा
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से स्टाइपेंड रिवीजन और हॉस्टल की बदहाल स्थिति को लेकर प्रशासन को अवगत करा रहे हैं। कॉलेज प्राचार्य को सौंपे गए ज्ञापन में छात्रों ने स्पष्ट किया है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। छात्रों के अनुसार, हड़ताल पर जाना हमारी मजबूरी है, क्योंकि हमारी जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
प्रमुख मांगें जिन पर अड़े हैं चिकित्सक:
चिकित्सकों ने अपनी मांगों को लेकर तीन मुख्य बिंदु सामने रखे हैं:
- बैकडेट से स्टाइपेंड रिवीजन: छात्रों की प्रमुख मांग है कि डेंटल पोस्टग्रेजुएट (PG) छात्रों के स्टाइपेंड में हुई वृद्धि को मेडिकल पीजी छात्रों की तरह ही ‘बैकडेट’ (पिछली तारीख) से प्रभावी रूप से लागू किया जाए।
- समान नीति का निर्धारण: प्रदर्शनकारियों की मांग है कि राज्य सरकार द्वारा सरकारी मेडिकल कॉलेजों के लिए जारी किए गए सभी आधिकारिक नोटिस और कल्याणकारी निर्णय स्वतः ही सरकारी डेंटल कॉलेज पर भी लागू होने चाहिए, ताकि बार-बार विसंगतियां पैदा न हों।
- हॉस्टल सुविधाओं में सुधार: महिला पीजी छात्रों के लिए हॉस्टल की भारी कमी है। छात्रों ने मांग की है कि या तो मौजूदा हॉस्टल में कमरों की संख्या बढ़ाई जाए या छात्राओं के लिए एक अलग ‘पीजी गर्ल्स हॉस्टल’ की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
सेवाएं रहेंगी बाधित
तीन दिनों तक चलने वाले इस सांकेतिक प्रदर्शन के दौरान जूनियर डॉक्टर और इंटर्न्स काम पर नहीं लौटेंगे। हालांकि, यह देखना होगा कि कॉलेज प्रशासन आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था करता है। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि इन तीन दिनों के भीतर शासन-प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक उग्र करने पर विचार कर सकते हैं।



