Big BreakingEducationFeaturedNationalPolitics
Trending

फ्री ऑनलाइन कोचिंग से बदल सकती है भारत की कोचिंग इंडस्ट्री की तस्वीर, जानिए PM मोदी की घोषणा का कितना बड़ा असर

PM मोदी की फ्री ऑनलाइन कोचिंग घोषणा से भारत की कोचिंग और एडटेक इंडस्ट्री बदल सकती है। जानिए छात्रों और कोचिंग हब पर इसका असर।







15 August 2026 | Raipur: स्वतंत्रता दिवस 2026 पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों और युवाओं के लिए ऐसी घोषणा की है, जिसका असर आने वाले समय में देश की एजुकेशन और कोचिंग इंडस्ट्री पर साफ दिखाई दे सकता है। प्रधानमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का नेशनल नेटवर्क तैयार करने की बात कही है। इसका मकसद देश के हर हिस्से में रहने वाले छात्रों को बेहतर तैयारी के संसाधन उपलब्ध कराना और महंगी कोचिंग का आर्थिक बोझ कम करना है।

भारत में सरकारी नौकरी, मेडिकल, इंजीनियरिंग और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में सीटों की तुलना में उम्मीदवारों की संख्या काफी ज्यादा है। इसी वजह से कोचिंग इंडस्ट्री पिछले कुछ वर्षों में एजुकेशन सेक्टर का एक बड़ा हिस्सा बन गई है। जिन परिवारों के पास पर्याप्त आर्थिक संसाधन हैं, वे बच्चों को बड़े कोचिंग सेंटरों में भेज देते हैं, लेकिन कम आय वाले परिवारों के लिए यह खर्च कई बार बड़ी चुनौती बन जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2025-26 में भारत का कुल कोचिंग और टेस्ट प्रिपरेशन मार्केट करीब 7.2 बिलियन डॉलर यानी लगभग 58,400 करोड़ से 60,000 करोड़ रुपये के बीच आंका गया है। रिपोर्ट में इस बाजार के आगे भी तेजी से बढ़ने का अनुमान जताया गया है। ऑनलाइन कोचिंग मार्केट का आकार करीब 4,200 करोड़ रुपये बताया गया है और इसकी ग्रोथ करीब 15.89 प्रतिशत सालाना बताई गई है।

इस पूरी इंडस्ट्री की मजबूती के पीछे सबसे बड़ी वजह प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़ता कॉम्पिटीशन है। लाखों उम्मीदवार सीमित सीटों के लिए परीक्षा देते हैं और ऐसे माहौल में छात्रों तथा अभिभावकों के बीच यह धारणा मजबूत हुई है कि अच्छी तैयारी के लिए किसी प्रोफेशनल कोचिंग की मदद जरूरी है।

मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET इसका बड़ा उदाहरण है। हर साल बड़ी संख्या में छात्र मेडिकल सीटों के लिए परीक्षा देते हैं, जबकि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या सीमित रहती है। इसी तरह JEE के जरिए IIT और दूसरे प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश पाने की कोशिश करने वाले छात्रों की संख्या भी बहुत बड़ी है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा में भी लाखों उम्मीदवार आवेदन करते हैं, जबकि अंतिम चयन की संख्या तुलनात्मक रूप से काफी कम रहती है। ऐसे कॉम्पिटीशन में छात्र सिर्फ किताबों और सामान्य ऑनलाइन सामग्री पर निर्भर रहने के बजाय टेस्ट सीरीज, मॉक टेस्ट, वीडियो लेक्चर, नोट्स, मेंटरशिप और डाउट सॉल्विंग जैसी सुविधाओं वाली कोचिंग को प्राथमिकता देते हैं।

ये भी पढ़ें  कोरबा कटघोरा मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार, एकलव्य विद्यालय के छात्रों ने कलेक्टर से मांगी सीधी सुनवाई

कोचिंग का खर्च केवल फीस तक सीमित नहीं रहता। छोटे शहरों और गांवों से निकलने वाले छात्रों को कई बार Kota, Delhi, Prayagraj, Hyderabad जैसे शिक्षा केंद्रों की ओर जाना पड़ता है। वहां कोचिंग फीस के साथ हॉस्टल या PG, खाना, परिवहन और दूसरी जरूरतों का खर्च जुड़ जाता है, जिससे एक छात्र की तैयारी का कुल खर्च परिवार के बजट पर भारी पड़ सकता है।

यही वह हिस्सा है जहां प्रधानमंत्री की मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा बड़ी तस्वीर बदल सकती है। अगर सरकार देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद अच्छे शिक्षकों और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को एक साथ जोड़कर गुणवत्तापूर्ण कंटेंट उपलब्ध कराती है, तो छात्रों को तैयारी के लिए अपने शहर से बाहर जाने की जरूरत कम हो सकती है।

सरकार की प्रस्तावित पहल में देश के मौजूदा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल किए जाने की संभावना है। SWAYAM, DIKSHA और NTA से जुड़े टेस्ट प्रैक्टिस संसाधनों जैसे प्लेटफॉर्म और सिस्टम को एक व्यापक डिजिटल तैयारी नेटवर्क से जोड़े जाने की उम्मीद जताई गई है।

इसका सीधा फायदा Tier-2 और Tier-3 शहरों के छात्रों को मिल सकता है। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, अंबिकापुर जैसे शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले छात्र भी अगर अच्छे फैकल्टी, टेस्ट सीरीज और स्टडी मटेरियल तक आसानी से पहुंच बना सकें, तो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का तरीका बदल सकता है।

फिलहाल कई ऑनलाइन कोचिंग प्लेटफॉर्म रिकॉर्डेड कोर्स और टेस्ट सीरीज कम कीमत पर उपलब्ध कराते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ कोर्स की कीमत करीब 499 रुपये से लेकर 2,000 रुपये तक होती है। अगर इसी तरह की बेसिक सुविधाएं सरकार की ओर से मुफ्त उपलब्ध होती हैं, तो छात्रों के लिए पेड रिकॉर्डेड कोर्स खरीदने की जरूरत कम हो सकती है।

इसका मतलब यह नहीं है कि प्राइवेट एडटेक कंपनियों का कारोबार खत्म हो जाएगा। बल्कि बाजार का मॉडल बदल सकता है और कंपनियां फ्री कंटेंट के ऊपर पेड सर्विस का मॉडल अपना सकती हैं।

ये भी पढ़ें  PM मोदी ने मन की बात में किया यूथ पर फोकस,1 लाख नए युवाओं को राजनीति में लाने का लक्ष्य

उदाहरण के लिए, बेसिक वीडियो लेक्चर और सामान्य टेस्ट मुफ्त दिए जा सकते हैं, जबकि व्यक्तिगत मेंटरशिप, लाइव डाउट क्लास, पर्सनलाइज्ड स्टडी प्लान, ऑफलाइन सेंटर और एडवांस्ड असेसमेंट जैसी सुविधाओं के लिए फीस ली जा सकती है। इससे ऑनलाइन कोचिंग कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ सकती है और छात्रों को ज्यादा विकल्प मिल सकते हैं।

सरकारी पहल का असर केवल ऑनलाइन कोचिंग तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। अगर छात्रों को घर बैठे अच्छी तैयारी का विकल्प मिलता है, तो Kota और Delhi जैसे पारंपरिक कोचिंग हब में जाने वाले छात्रों की संख्या पर भी असर पड़ सकता है।

कोचिंग हब की अर्थव्यवस्था सिर्फ शिक्षकों और संस्थानों से नहीं चलती। हजारों हॉस्टल, PG, मेस, किराना दुकानें, कैफे, ट्रांसपोर्ट सर्विस और दूसरे छोटे कारोबार छात्रों की जरूरतों पर निर्भर करते हैं। अगर बड़ी संख्या में छात्र घर से ही तैयारी करने लगते हैं, तो इन व्यवसायों के मॉडल पर भी धीरे-धीरे प्रभाव पड़ सकता है।

दूसरी तरफ, ऑनलाइन शिक्षा की सबसे बड़ी चुनौती उसकी पहुंच और गुणवत्ता दोनों हैं। हर छात्र के पास तेज इंटरनेट, बेहतर स्मार्टफोन या शांत जगह पर पढ़ाई करने की सुविधा हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की सफलता केवल कंटेंट उपलब्ध कराने से तय नहीं होगी, बल्कि यह भी देखना होगा कि ग्रामीण और कम संसाधन वाले छात्रों तक यह सुविधा कितनी आसानी से पहुंचती है।

क्वालिटी कंट्रोल भी एक बड़ा मुद्दा रहेगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सिर्फ वीडियो लेक्चर काफी नहीं होते। सही सिलेबस, अपडेटेड स्टडी मटेरियल, नियमित टेस्ट, समय पर रिजल्ट एनालिसिस, डाउट सॉल्विंग और अनुभवी शिक्षकों की मदद भी जरूरी होती है।

अगर सरकार इस नेटवर्क में इन सभी सुविधाओं को शामिल कर पाती है, तो इसका प्रभाव काफी बड़ा हो सकता है। इससे आर्थिक स्थिति के कारण अच्छी कोचिंग से दूर रहने वाले छात्रों को प्रतिस्पर्धा में बराबरी का मौका मिल सकता है।

प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में युवाओं के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी स्किलिंग को लेकर भी बड़ी घोषणा की है। 2026-27 के दौरान एक करोड़ युवाओं को AI से संबंधित स्किल देने वाले कार्यक्रम का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें Generative AI, Data Science, Robotics और Data Center Operations जैसे क्षेत्रों को शामिल किए जाने की बात कही गई है।

ये भी पढ़ें  जस्टिन ट्रूडो ने भारत को कनाडा में आपराधिक गतिविधियों से जोड़ने वाली रिपोर्ट का किया खंडन, बोले भारत के खिलाफ सबूत नहीं

इससे साफ है कि सरकार की डिजिटल शिक्षा की दिशा केवल पारंपरिक प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। एक तरफ सरकारी नौकरी और प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ युवाओं को भविष्य की टेक्नोलॉजी आधारित नौकरियों के लिए तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

छात्रों के नजरिए से देखें तो मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का सबसे बड़ा फायदा लागत कम होने के रूप में सामने आ सकता है। एक छात्र को अगर घर बैठे गुणवत्तापूर्ण लेक्चर, टेस्ट सीरीज और स्टडी मटेरियल मिल जाता है, तो परिवार को कोचिंग फीस और दूसरे शहर में रहने के खर्च से राहत मिल सकती है।

अभिभावकों के लिए भी यह घोषणा राहत देने वाली हो सकती है, खासकर उन परिवारों के लिए जिनके बच्चों की पढ़ाई का खर्च पहले से ही घरेलू बजट पर दबाव डाल रहा है। वहीं छात्रों के बीच यह उम्मीद भी बढ़ सकती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता अब सिर्फ बड़े शहरों और महंगे कोचिंग संस्थानों तक सीमित नहीं रहेगी।

हालांकि असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार इस घोषणा को किस तरह लागू करती है। मुफ्त कंटेंट की घोषणा और एक मजबूत, भरोसेमंद और नियमित रूप से अपडेट होने वाला नेशनल कोचिंग नेटवर्क तैयार करने के बीच काफी अंतर है।

अगर सिस्टम में अच्छे शिक्षक, मजबूत टेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, स्थानीय भाषाओं में कंटेंट, व्यक्तिगत मार्गदर्शन और तकनीकी सुविधाएं सही तरीके से जोड़ी जाती हैं, तो भारत की कोचिंग इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव आ सकता है। वहीं प्राइवेट एडटेक कंपनियों को भी अपनी रणनीति बदलकर ज्यादा वैल्यू देने वाली सेवाओं पर ध्यान देना पड़ सकता है।

प्रधानमंत्री की घोषणा ऐसे समय में आई है जब भारत में डिजिटल लर्निंग तेजी से सामान्य शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का हिस्सा बन चुकी है। आने वाले वर्षों में सरकारी डिजिटल शिक्षा और प्राइवेट एडटेक के बीच प्रतिस्पर्धा छात्रों के लिए बेहतर और कम खर्च वाला एजुकेशन इकोसिस्टम तैयार कर सकती है।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button