Panchang: 25 अगस्त 2025 का पंचांग और राहुकाल विशेष: वराह जयंती पर जानिए कब करें शुभ कार्य और कब रहें सावधान




राहुकाल क्या है, क्यों होता है और इस समय शुभ कार्यों से क्यों बचना चाहिए
राहुकाल: समय का वह कालखंड जब ग्रहों की ऊर्जा बाधक होती है
हिंदू ज्योतिष में राहुकाल एक ऐसा समय माना जाता है जब राहु ग्रह की नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय रहती है। यह काल प्रतिदिन अलग-अलग समय पर आता है और लगभग डेढ़ घंटे तक रहता है। मान्यता है कि इस समय कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, यात्रा आरंभ, नया व्यापार, संपत्ति क्रय आदि नहीं करना चाहिए क्योंकि राहु की छाया इन कार्यों में विघ्न डाल सकती है।
राहुकाल का निर्धारण सूर्योदय के समय से किया जाता है और यह सप्ताह के प्रत्येक दिन अलग-अलग समय पर आता है। यह कोई खगोलीय घटना नहीं बल्कि ज्योतिषीय गणना पर आधारित है।
आज का राहुकाल: 25 अगस्त 2025, सोमवार
आज सोमवार को राहुकाल का समय
सुबह 07:45 बजे से 09:19 बजे तक रहेगा।
इस अवधि में शुभ कार्यों से बचना चाहिए। विशेष रूप से विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय आरंभ, यात्रा की शुरुआत, संपत्ति खरीद आदि कार्य इस समय नहीं करने चाहिए।
राहुकाल में क्या न करें:
- कोई नया कार्य शुरू न करें
- महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचें
- यात्रा की शुरुआत न करें
- पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान आरंभ न करें
राहुकाल में क्या करें:
- मौन साधना या ध्यान
- पूर्व आरंभ किए गए कार्यों को जारी रखना
- आध्यात्मिक चिंतन
- राहु मंत्र का जाप: “ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः”
राहुकाल में कार्य न करने का कारण यह है कि राहु एक छाया ग्रह है जो भ्रम, बाधा और मानसिक अस्थिरता का प्रतीक माना जाता है। इस समय में शुरू किए गए कार्यों में विघ्न, देरी या असफलता की संभावना अधिक होती है।
आज के शुभ मुहूर्त: 25 अगस्त 2025
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:03 बजे से 12:54 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:10 बजे से 3:03 बजे तक
- प्रदोष काल: शाम 6:31 बजे से 7:41 बजे तक
- अमृत मुहूर्त: शाम 7:21 बजे से रात 9:02 बजे तक
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:26 बजे से 5:14 बजे तक
इन मुहूर्तों में कोई भी शुभ कार्य जैसे पूजा, खरीदारी, नया कार्य आरंभ, निवेश आदि किया जा सकता है।
आज का पंचांग: 25 अगस्त 2025, सोमवार
- दिन: सोमवार
- हिंदू मास: भाद्रपद
- पक्ष: शुक्ल पक्ष
- तिथि: द्वितीया (दोपहर 12:35 बजे तक), उसके बाद तृतीया
- नक्षत्र: उत्तर फाल्गुनी (सुबह 3:49 बजे तक), फिर हस्त
- योग: सिद्ध योग (दोपहर 12:06 बजे तक), फिर साध्य योग
- करण: कौलव (12:35 बजे तक), फिर तैतिल
- सूर्योदय: सुबह 6:10 बजे
- सूर्यास्त: शाम 6:47 बजे
- चंद्रोदय: सुबह 7:45 बजे
- चंद्रास्त: रात 8:07 बजे
- चंद्रमा की स्थिति: सुबह 8:28 बजे तक सिंह राशि, फिर कन्या राशि में प्रवेश
आज का धार्मिक महत्व: वराह जयंती
आज का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वराह जयंती है। इस दिन भगवान विष्णु ने वराह (सूअर) रूप में पृथ्वी को राक्षस हिरण्याक्ष से मुक्त कर जल से बाहर निकाला था। यह अवतार धर्म की पुनर्स्थापना और पृथ्वी की रक्षा का प्रतीक है।
इस दिन श्रीहरि विष्णु के वराह रूप की पूजा करने से मोक्ष प्राप्ति के मार्ग प्रशस्त होते हैं।
विशेष मंत्र: “ॐ नमो श्रीवराहाय धरण्युद्धारणाय स्वाहा”
इस मंत्र का जाप शत्रु बाधा निवारण और मानसिक शांति के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
डिस्क्लेमर:
यह समाचार लेख वैदिक ज्योतिषीय गणनाओं, धार्मिक मान्यताओं और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों को सामान्य जानकारी और मार्गदर्शन देना है। किसी भी धार्मिक या ज्योतिषीय उपाय को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह लेना आवश्यक है। यह लेख किसी भी आधिकारिक पुष्टि का दावा नहीं करता।