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खाद की किल्लत से पिछड़ी बोनी, कागजी आंकड़ों से किसानों को ठग रही सरकार: दीपक बैज

सोसायटियों में खाद का कोटा 40% से घटाकर 30% करने का दावा, मानसून के बीच पहुंच विहीन गांवों के किसानों के सामने खेती का संकट।







रायपुर । छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही खाद की उपलब्धता को लेकर सियासत गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने राज्य सरकार के पर्याप्त खाद उपलब्धता के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे किसानों के साथ भद्दा मजाक करार दिया है। पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि पूरे प्रदेश में डीएपी और यूरिया की भारी किल्लत के कारण बोनी और थरहा (नर्सरी) लगाने का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जिससे चालू सीजन में किसानी पिछड़ रही है।

​दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि महज 24 हजार टन डीएपी के कागजी आवंटन को अपनी बड़ी उपलब्धि बताने वाले सत्ताधारी नेताओं को हकीकत का सामना करना चाहिए। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए पूछा कि सरकार ने खुद के द्वारा तय किए गए 15 लाख 55 हजार मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल 7 लाख 27 हजार 833 मीट्रिक टन खाद ही किसानों को क्यों उपलब्ध कराई है? यह कुल मांग के आधे से भी कम है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार हो रहा है जब जुलाई का हफ्ता शुरू होने के बाद भी किसानों को जरूरत की आधी खाद भी नहीं मिल पाई है। पूर्ववर्ती व्यवस्था में अप्रैल से वितरण शुरू होकर जून तक प्रक्रिया पूरी हो जाती थी ताकि मानसून आने से पहले खाद किसानों के घर तक पहुंच जाए।

​कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कभी किस्तों में खाद देने तो कभी टोकन सिस्टम लागू करने जैसे तुगलकी फरमान जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस साल पिछले वर्ष की तुलना में डीएपी में 40 प्रतिशत और यूरिया की सप्लाई में 20 प्रतिशत की सीधी कटौती करने का जनविरोधी आदेश जारी किया गया है।

​उन्होंने आगे कहा कि साय सरकार ने सोसायटियों से मिलने वाले प्रति एकड़ कर्ज के नियमों में भी चुपके से बड़ा बदलाव किया है। पहले कुल कर्ज में नकदी और खाद-बीज का अनुपात 60:40 का होता था, जिसे अब बदलकर 70:30 कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब किसानों को उनकी तय लिमिट का केवल 30 प्रतिशत ही खाद मिल पाएगा, जिससे उनकी मुश्किलें दोगुनी हो जाएंगी।

​दीपक बैज ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ सहकारी सोसायटियों में ताले लटके हैं या खाद नदारद है, वहीं दूसरी तरफ सत्ता के संरक्षण में बिचौलियों और कालाबाजारियों के हौसले बुलंद हैं। खुले बाजार में यूरिया और डीएपी तय कीमतों से तीन से चार गुना महंगे दामों पर बेची जा रही है। इसके साथ ही सोसायटियों में किसानों पर जबरन नकली, अमानक और गुणवत्ताहीन नैनो यूरिया लेने का दबाव बनाया जा रहा है।

​कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि वह कागजी रैक और फर्जी आबंटन के आंकड़ों से किसानों को ठगना बंद करे और धरातल पर जल्द से जल्द भौतिक अलॉटमेंट सुनिश्चित करे ताकि राज्य के अन्नदाता को इस संकट से उबारा जा सके।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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