अंधेरे से स्वर साधना तक: रायपुर के अभिनंदन ने दृष्टि दिव्यांगता को हराया, अब संगीत से संवार रहे बच्चों का भविष्य
इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के स्नातक ने ‘अभिनंदन म्यूजिकल परिवार’ के जरिए दिव्यांग कलाकारों को दिया नया मंच।

रायपुर । “मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।” इन पंक्तियों को रायपुर के श्री अभिनंदन नशीने ने चरितार्थ कर दिखाया है। जन्मजात दृष्टि दिव्यांगता जैसी कठिन शारीरिक बाधा को अपने अटूट आत्मविश्वास से पीछे छोड़ते हुए, अभिनंदन आज न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि सैकड़ों दिव्यांग बच्चों के लिए प्रेरणा का पुंज बन चुके हैं।
अभिनंदन की शैक्षणिक और संगीत यात्रा रायपुर के मठपुरैना स्थित शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय से शुरू हुई, जहाँ उन्होंने वर्ष 2006 में पहली कक्षा में कदम रखा था। अपनी कुशाग्र बुद्धि का परिचय देते हुए उन्होंने वर्ष 2019 में 12वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। विद्यालय के ऑर्केस्ट्रा ग्रुप “रोशनी” के सक्रिय सदस्य के रूप में उनकी आवाज ने पहले ही उनकी प्रतिभा का लोहा मनवा लिया था।
संगीत के प्रति इसी जुनून ने उन्हें खैरागढ़ स्थित प्रसिद्ध इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय तक पहुँचाया, जहाँ से उन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल की। आज नियति का सुखद संयोग देखिए कि अभिनंदन उसी विद्यालय में संगीत शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जहाँ से उन्होंने ककहरा सीखा था।
अभिनंदन केवल खुद तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने दिव्यांग कलाकारों को संगठित करने के उद्देश्य से “अभिनंदन म्यूजिकल परिवार” नामक ऑर्केस्ट्रा समूह का गठन किया है। यह समूह विभिन्न आयोजनों में अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से समाज को यह संदेश दे रहा है कि दिव्यांगता कोई कमजोरी नहीं, बल्कि एक अलग तरह की क्षमता है। इसके अलावा, उन्होंने मोहला-मानपुर जिले में विभागीय कार्यक्रमों के लिए जागरूकता गीतों की रचना कर सामाजिक उत्तरदायित्व का भी बखूबी निर्वहन किया है।
वर्तमान में अभिनंदन अपने विद्यालय के बच्चों को संगीत की बारीकियां सिखा रहे हैं। उनके सानिध्य में तैयार हो रहे बच्चे अब विभिन्न मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्य सरकार की समावेशी नीतियों और समाज कल्याण विभाग के सहयोग से अभिनंदन जैसे युवा आज समाज की मुख्यधारा का नेतृत्व कर रहे हैं।
उनकी यह जीवन यात्रा प्रदेश के हजारों दिव्यांगजनों के लिए एक संदेश है कि यदि संकल्प अडिग हो, तो हर बाधा सफलता की सीढ़ी बन जाती है।



