कोलकाता में डॉक्टरों का उग्र प्रदर्शन: RG Kar रेप-मर्डर केस की बरसी पर न्याय की मांग, पुलिस ने किया लाठीचार्ज




कोलकाता | 9 अगस्त 2025 | आज कोलकाता में RG Kar मेडिकल कॉलेज में एक साल पहले हुई डॉक्टर की बलात्कार और हत्या की बरसी पर उबाल फूट पड़ा। पीड़िता के परिजनों और डॉक्टरों के संगठनों द्वारा आयोजित “नबान्ना अभियान” मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
एक साल पहले की घटना जिसने देश को झकझोर दिया
9 अगस्त 2024 को RG Kar मेडिकल कॉलेज की एक 26 वर्षीय पोस्टग्रेजुएट ट्रेनी डॉक्टर की रात की ड्यूटी के दौरान seminar hall में बलात्कार और हत्या कर दी गई थी। आरोपी संजय रॉय, एक सिविक वॉलंटियर, को गिरफ्तार कर लिया गया और जनवरी 2025 में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई। लेकिन पीड़िता के परिवार का आरोप है कि यह एक “संस्थागत अपराध” था और संजय रॉय अकेला नहीं था।
आज का प्रदर्शन: “हम भूले नहीं हैं, हम भूलेंगे नहीं”
- West Bengal Junior Doctors’ Forum ने College Square से Shyambazar तक मशाल मार्च निकाला।
- पीड़िता के माता-पिता ने सभी राजनीतिक दलों को बिना झंडे के मार्च में शामिल होने का आह्वान किया।
- प्रदर्शनकारियों ने “We Want Justice” और “Institutional Accountability Now” जैसे नारे लगाए।
- प्रदर्शन के दौरान Santragachi में पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश हुई, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
- कोलकाता पुलिस ने नबान्ना के आसपास धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की।
- प्रदर्शन के लिए दो स्थान निर्धारित किए गए: Santragachi बस स्टैंड और रानी रश्मोनी एवेन्यू।
- हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण हो और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचे।
पीड़िता के परिवार की मांगें
- CBI जांच पर सवाल उठाते हुए परिवार ने इसे “राजनीतिक रूप से प्रभावित और भ्रष्ट” बताया।
- पीड़िता की मां ने अपना “नारी शक्ति पुरस्कार” लौटा दिया, यह कहते हुए कि “जब तक बेटी को न्याय नहीं मिलेगा, कोई सम्मान स्वीकार नहीं”।
- परिवार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर जांच में पारदर्शिता की मांग की।
डॉक्टरों की देशव्यापी हड़ताल
- Indian Medical Association ने 24 घंटे की देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया।
- डॉक्टरों ने अस्पतालों में सुरक्षा की मांग करते हुए कहा, “अगर अस्पताल सुरक्षित नहीं हैं, तो महिलाएं कहां सुरक्षित हैं?”
न्यायिक हस्तक्षेप
- सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स गठित की है।
- RG Kar मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा अब CISF के हवाले है।
- कॉलेज परिसर में पीड़िता की प्रतिमा स्थापित की गई है, जो न्याय की प्रतीक्षा का प्रतीक बन गई है।
यह मामला अब सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि एक आंदोलन बन चुका है — महिलाओं की सुरक्षा, संस्थागत जवाबदेही और न्याय की मांग का प्रतीक। क्या यह प्रदर्शन सरकार को झकझोर पाएगा? क्या पीड़िता को पूरा न्याय मिलेगा? यही सवाल आज कोलकाता की सड़कों पर गूंज रहे हैं।