CGPSC घोटाले के बाद बड़ा कदम, छत्तीसगढ़ में परीक्षा प्रणाली सुधारने के लिए सख्त कानून लाएगी सरकार

नए विधेयक के तहत नकल या पेपर लीक में शामिल होने पर जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान। कोचिंग संस्थानों के भ्रामक प्रचार पर भी लगेगी रोक, युवाओं का भरोसा बहाल करने की तैयारी।





रायपुर, 12 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ में भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान जल्द ही छत्तीसगढ़ लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम विधेयक 2026 पेश करने की तैयारी में है। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर सख्ती से रोक लगाना है।

राज्य सरकार का मानना है कि इस कानून के लागू होने से प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी और युवाओं का भर्ती प्रक्रिया पर भरोसा मजबूत होगा। यह पहल परीक्षा सुधार को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी के अनुरूप भी बताई जा रही है।


नकल करते पकड़े जाने पर जेल और जुर्माना

प्रस्तावित कानून के अनुसार यदि कोई परीक्षार्थी भर्ती परीक्षा में नकल करते या अनुचित साधनों का उपयोग करते हुए पकड़ा जाता है तो उसे एक से पांच वर्ष तक की सजा हो सकती है। इसके साथ ही दोषी पाए जाने पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति, गिरोह या संगठित नेटवर्क पेपर लीक, नकल कराने या परीक्षा में धांधली करने में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में कठोर कारावास के साथ एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान रखा गया है।


कोचिंग संस्थानों के लिए भी सख्त नियम

विधेयक में कोचिंग संस्थानों की गतिविधियों को भी नियंत्रित करने के लिए सख्त प्रावधान शामिल किए गए हैं। सरकार का कहना है कि कई संस्थान युवाओं को चयन की सौ प्रतिशत गारंटी देकर आकर्षित करते हैं और भ्रामक विज्ञापन के माध्यम से बड़ी संख्या में छात्रों को अपने यहां दाखिला दिलाते हैं।

नए कानून के तहत कोई भी कोचिंग संस्थान सफलता की गारंटी देने या झूठे दावे करने वाले प्रचार नहीं कर सकेगा। यदि कोई संस्थान इस तरह के भ्रामक प्रचार में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।


भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने का प्रयास

राज्य सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और भ्रष्टाचार को खत्म करना है। हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों में पेपर लीक और भर्ती घोटालों की घटनाओं के बाद सरकारें परीक्षा व्यवस्था को सख्त बनाने की दिशा में कदम उठा रही हैं।

छत्तीसगढ़ में भी पिछले कुछ वर्षों में भर्ती परीक्षाओं को लेकर कई विवाद सामने आए हैं, जिसके बाद सरकार परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए नए कानूनी प्रावधान लागू करना चाहती है।


सीजीपीएससी भर्ती घोटाले से बढ़ी थी चिंता

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की 2021–22 भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा विवाद राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा मुद्दा बन गया था। इस मामले में तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए थे।

जांच एजेंसियों द्वारा की गई जांच और अदालत में पेश पूरक चार्जशीट के दौरान कई अहम खुलासे हुए थे। जांच में सामने आया था कि कथित वसूली का नेटवर्क विभिन्न स्तरों तक फैला हुआ था, जिसमें एनजीओ और कोचिंग संस्थानों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई थी।


जांच में सामने आए कई नाम

जांच के दौरान यह भी सामने आया था कि सोनवानी की पत्नी से जुड़े एक एनजीओ में आयोग के सहायक परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर कोषाध्यक्ष के रूप में जुड़े हुए थे। आरोप था कि इसी नेटवर्क के माध्यम से कुछ कंपनियों से बड़ी रकम की वसूली की गई थी।

इसके अलावा कोचिंग संस्थान संचालक उत्कर्ष चंद्राकर की भूमिका भी जांच के दायरे में आई थी। आरोप लगाए गए कि अभ्यर्थियों से कथित तौर पर बड़ी रकम लेकर चयन का आश्वासन दिया गया था। इस पूरे प्रकरण ने राज्य में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।


युवाओं का भरोसा बहाल करने की कोशिश

सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून लागू होने के बाद भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी। साथ ही पेपर लीक और नकल जैसे अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई से ऐसे मामलों पर रोक लगेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कानून प्रभावी ढंग से लागू होता है तो प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करने और युवाओं का विश्वास बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


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Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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