श्रवण बाधित बच्चों ने नशा मुक्ति पर प्रस्तुत किया ‘मानव का दुश्मन’ नाटक, किस्सों में गूँजा रायपुर का इतिहास
छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव में दृष्टि और श्रवण बाधित विद्यार्थियों की सशक्त प्रस्तुति




सांकेतिक भाषा में नशे के खिलाफ संदेश, बच्चों ने दिखाया दृढ़ संकल्प
छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव में सांस्कृतिक विविधता की अनूठी छटा
रायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक टाउन हॉल में आयोजित छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के अंतर्गत आज दो विशिष्ट सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधित विद्यालय के विद्यार्थियों ने साइन लैंग्वेज में नशा मुक्ति विषय पर आधारित नाटक ‘मानव का दुश्मन’ का प्रभावशाली मंचन किया।
नाटक में नशे की विभाजनकारी शक्तियों को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया । शराब, सिगरेट, ड्रग्स, तंबाकू और पान जैसे किरदारों के माध्यम से। भारत माता की भूमिका में कु. भूमिका साहू (कक्षा 12वीं) ने राष्ट्र की पीड़ा को सजीव किया, जबकि मास्टर मौर्य सेन (राक्षस), प्रकाश ध्रुव (सिगरेट), विनोद देहारे (शराब), दीनबंधु साहू (ड्रग्स), नीलकमल चौहान (तंबाकू) और नंद कुमार निर्मल्कर (पान) ने नशे के दुष्प्रभावों को सशक्त अभिनय से उजागर किया।
नाटक का निर्देशन विशेष शिक्षिका मुटुका पाण्डेय द्वारा किया गया। प्रस्तुति के उपरांत रायपुर नगर निगम उपायुक्त एवं जिला अधिकारी ने सभी कलाकारों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
इसी क्रम में “किस्से कहानियों में रायपुर” नामक कार्यक्रम में रायपुर की ऐतिहासिक और साहित्यिक विरासत को जीवंत किया गया।
मुख्य अतिथि संजीव बक्सी ने अपने प्रशासनिक अनुभव साझा करते हुए ‘भूलन कांदा’ उपन्यास का संक्षिप्त परिचय दिया और भावपूर्ण कविता पाठ किया। डॉ. चितरंजन कर ने रायपुर के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर प्रकाश डालते हुए काव्य पाठ से वातावरण को साहित्यिक रंगों से भर दिया।
कार्यक्रम में आटपाट थिएटर ग्रुप द्वारा ‘ब्लाइंड क्लब टैक्स फ्री’ और ‘नई सभ्यता नए नमूने’ जैसे नाटकों का मंचन किया गया, जिनका निर्देशन रोहित भूषणवार ने किया ।
छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के इन आयोजनों ने न केवल सांस्कृतिक विविधता को उजागर किया, बल्कि सामाजिक चेतना और साहित्यिक संवेदना को भी मंच प्रदान किया। ऐतिहासिक टाउन हॉल इन दिनों छत्तीसगढ़ की आत्मा और अभिव्यक्ति का जीवंत केंद्र बना हुआ है।