प्रेमानंद महाराज पर विवाद: राज कुंद्रा की किडनी पेशकश से शुरू हुआ बवाल, खेसारी के बयान पर रामभद्राचार्य ने दी तीखी प्रतिक्रिया
वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज को लेकर सेलेब्रिटी श्रद्धा, सोशल मीडिया बहस और धार्मिक विद्वानों की आलोचना ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। राज कुंद्रा की किडनी देने की पेशकश पर खेसारी लाल यादव ने सस्ती पब्लिसिटी स्टंट कहा, वहीं जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद को "बालक समान" बताते हुए उनकी विद्वता पर सवाल उठाए।




वृंदावन में प्रेमानंद महाराज का सत्संग और विवादों की आंधी
वृंदावन स्थित केली कुंज आश्रम में प्रेमानंद महाराज का सत्संग लंबे समय से श्रद्धालुओं और सेलेब्रिटीज के आकर्षण का केंद्र रहा है। राज कुंद्रा, विराट कोहली, शिल्पा शेट्टी जैसी हस्तियां उनके अनुयायियों में शामिल हैं। हाल ही में राज कुंद्रा ने प्रेमानंद महाराज को अपनी किडनी देने की पेशकश की, जिससे सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं।
राज कुंद्रा, जो पहले से ही मनी लॉन्ड्रिंग और पोर्नोग्राफी जैसे मामलों में विवादों में रहे हैं, उनकी इस पेशकश को कई लोगों ने “पब्लिसिटी स्टंट” करार दिया। इसी संदर्भ में भोजपुरी अभिनेता खेसारी लाल यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि प्रेमानंद महाराज कोई “पाप धोने वाली मशीन” नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग अपनी छवि सुधारने के लिए उनके पास जा रहे हैं और यह अध्यात्म का अपमान है।
खेसारी के बयान पर सोशल मीडिया में बहस
खेसारी के इस बयान पर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने उनके बेबाक अंदाज़ की तारीफ की, वहीं कई यूजर्स ने उन्हें उनकी खुद की अश्लील छवि की याद दिलाई और कहा कि उन्हें धर्म और नैतिकता पर बोलने का अधिकार नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि खेसारी खुद प्रेमानंद महाराज पर एक भक्ति गीत “तेरे प्रेम में पागल प्रेमानंद” रिलीज कर चुके हैं, जिसे यूट्यूब पर 55 लाख से अधिक बार देखा गया है।
रामभद्राचार्य का तीखा बयान: “वो मेरे लिए बालक समान हैं”
इस पूरे विवाद पर एनडीटीवी ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य से बात की, जिन्होंने प्रेमानंद महाराज की विद्वता और लोकप्रियता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “प्रेमानंद को मैं चमत्कार नहीं मानता। वो एक अक्षर मेरे सामने संस्कृत बोलकर दिखा दें या मेरे श्लोकों का अर्थ समझा दें। वो तो मेरे बालक के समान हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि शास्त्र का ज्ञान ही असली चमत्कार है, न कि किडनी डायलिसिस या सेलेब्रिटी की उपस्थिति।
रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद की लोकप्रियता को क्षणिक बताया और कहा कि “चमत्कारी वही होता है जो शास्त्रीय चर्चा कर सके।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें प्रेमानंद से कोई द्वेष नहीं है, लेकिन उन्हें विद्वान या चमत्कारी कहना स्वीकार्य नहीं है।
गांधी जी पर भी उठाए सवाल
रामभद्राचार्य ने महात्मा गांधी के विचारों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि गांधी जी की गलतियों के कारण देश का विभाजन हुआ और उनका स्वतंत्रता संग्राम में योगदान केवल एक प्रतिशत था, जबकि क्रांतिकारियों का योगदान 99 प्रतिशत था। उन्होंने यह भी कहा कि भारत पर आक्रमण हमेशा मुसलमानों और ईसाइयों की ओर से हुआ है, और भारत की रक्षा सर्वोपरि है।
निष्कर्ष:
प्रेमानंद महाराज को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन चुका है। जहां एक ओर सेलेब्रिटी उनकी शरण में जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर धार्मिक विद्वान उनकी योग्यता पर सवाल उठा रहे हैं। खेसारी लाल यादव और रामभद्राचार्य के बयान इस बहस को और गहरा बना रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रेमानंद महाराज इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और यह बहस किस दिशा में जाती है।