Video: मेडिकल जमानत खत्म होते ही आसाराम फिर लौटा जोधपुर जेल, उम्रकैद की सजा जारी

2013 के यौन उत्पीड़न मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु को अदालत के आदेश पर जेल में चिकित्सा निगरानी के तहत रखा गया।

रायपुर, 30 अगस्त 2025: स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम, जो यौन उत्पीड़न के एक गंभीर मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं, मेडिकल जमानत की अवधि पूरी होने के बाद शुक्रवार को जोधपुर सेंट्रल जेल लौट आए। जेल प्रशासन ने उनके स्वास्थ्य परीक्षण और सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद उन्हें पुनः बैरक में शिफ्ट कर दिया।

अस्पताल से सीधे जेल, CCTV निगरानी में मेडिकल जांच

जेल सूत्रों के अनुसार, आसाराम को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सीधे जोधपुर सेंट्रल जेल लाया गया। प्रवेश से पहले चिकित्सकों की टीम ने उनका विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की। जेल प्रशासन ने बताया कि उनकी बैरक में 24 घंटे CCTV निगरानी रहती है और नियमित मेडिकल जांच की व्यवस्था की गई है।

क्यों मिली थी मेडिकल जमानत

आसाराम को कुछ समय पहले स्वास्थ्य कारणों के चलते अस्थायी जमानत दी गई थी। इस दौरान उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में इलाज हुआ। जमानत की अवधि समाप्त होने पर अदालत ने उन्हें पुनः जेल में पेश करने का आदेश दिया, जिसे पालन करते हुए उन्हें वापस जेल भेजा गया।

यौन उत्पीड़न मामले में उम्रकैद की सजा

गौरतलब है कि आसाराम को 2018 में जोधपुर की पॉक्सो अदालत ने एक नाबालिग लड़की से यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया था। यह मामला 2013 का है, जब पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आसाराम ने आश्रम में उसका यौन शोषण किया। अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जो वे जोधपुर सेंट्रल जेल में काट रहे हैं।

हाईकोर्ट ने खारिज की थी अंतरिम जमानत याचिका

राजस्थान हाईकोर्ट ने 27 अगस्त को आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने स्वेच्छा से जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जेल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाएं पर्याप्त हैं और उन्हें वहीं इलाज मिल सकता है।

अनुयायियों को नहीं मिली जेल में प्रवेश की अनुमति

आसाराम के जेल लौटने की खबर के बाद उनके कई अनुयायी जोधपुर पहुंचे, लेकिन जेल प्रशासन ने किसी को परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी। केवल अधिकृत वकील और पुलिस अधिकारी ही उनसे मुलाकात कर सके।

भविष्य में फिर जमानत की कोशिश संभव

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आसाराम की कानूनी टीम भविष्य में पुनः जमानत के लिए अदालत का रुख कर सकती है। हालांकि, मौजूदा आदेश के अनुसार उन्हें जेल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं के तहत ही रखा जाएगा।

आसाराम का जेल लौटना एक बार फिर इस बहुचर्चित मामले को सुर्खियों में ले आया है, जो देशभर में धार्मिक आस्था, कानून और न्याय व्यवस्था के बीच के संतुलन पर बहस को पुनर्जीवित करता है।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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