अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच भारत की आत्मनिर्भरता और संप्रभुता पर अडिग रुख, 2025 डिफेंस समिट में बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री ने समिट में भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं, आत्मनिर्भरता की दिशा और वैश्विक चुनौतियों के बीच देशहित को सर्वोपरि बताते हुए स्पष्ट किया कि भारत किसी भी दबाव में झुकेगा नहीं।

रायपुर, 30 अगस्त 2025 — डिफेंस समिट 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत की रक्षा नीति, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य पर भारत के रुख को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों, किसानों, छोटे व्यापारियों और देशवासियों के हितों की रक्षा करना है, और इसके लिए कोई भी समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।
भारत की आत्मनिर्भरता: रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक छलांग
राजनाथ सिंह ने बताया कि भारत ने रक्षा उत्पादन में ऐतिहासिक प्रगति की है। वर्ष 2014 में जहां रक्षा निर्यात 100 करोड़ रुपये से भी कम था, वहीं अब यह बढ़कर 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि भारत अब केवल आयातक नहीं, बल्कि एक प्रमुख निर्यातक भी बन चुका है। IIT और IISC जैसे संस्थान रक्षा क्षेत्र में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं, जिससे आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार हो रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर: भारतीय सेनाओं का पराक्रम
रक्षा मंत्री ने हाल ही में संपन्न ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सेनाओं ने अपने शौर्य और पराक्रम से दुनिया को भारत की सैन्य क्षमता का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन भारत की रणनीतिक तैयारी और आत्मविश्वास का प्रतीक है।
वैश्विक उथल-पुथल और भारत का रुख
राजनाथ सिंह ने समिट में स्पष्ट किया कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में संरक्षणवाद और ट्रेड वॉर जैसी स्थितियां गंभीर होती जा रही हैं।
उन्होंने एडमंड बर्क के प्रसिद्ध कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि आज की स्थिति में राज्य व्यापारी की भूमिका निभा रहा है, जिससे वैश्विक व्यापारिक समीकरण बदल रहे हैं।
अमेरिका को संदेश: भारत दबाव में नहीं झुकेगा
रक्षा मंत्री ने इशारों में अमेरिका को भी संदेश दिया कि भारत किसी के सामने झुकेगा नहीं। उन्होंने कहा कि भारत किसी देश को अपना दुश्मन नहीं मानता, लेकिन अपने हितों से समझौता नहीं करेगा। चाहे कितना भी अंतरराष्ट्रीय दबाव क्यों न हो, भारत अपने सिद्धांतों और मूल्यों पर अडिग रहेगा।
स्थायी हित ही सर्वोपरि
राजनाथ सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में कोई स्थायी मित्र या शत्रु नहीं होता, केवल स्थायी हित होते हैं। भारत की विदेश नीति इसी सिद्धांत पर आधारित है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की रणनीति चट्टान की तरह मजबूत है—जितना दबाव डाला जाएगा, उतनी ही मजबूती से भारत खड़ा रहेगा।
निष्कर्ष: आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अडिग कदम
2025 डिफेंस समिट में रक्षा मंत्री का संबोधन भारत की रणनीतिक सोच, आत्मनिर्भरता की दिशा और वैश्विक चुनौतियों के बीच देशहित को सर्वोपरि रखने की नीति को दर्शाता है। यह स्पष्ट संकेत है कि भारत अब वैश्विक मंच पर न केवल अपनी रक्षा क्षमता बल्कि अपने राजनीतिक दृष्टिकोण को भी मजबूती से प्रस्तुत कर रहा है।