GST में क्रांतिकारी बदलाव, अब सिर्फ दो टैक्स स्लैब, घर खरीदना हो सकता है सस्ता

केंद्र सरकार ने टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब ज्यादातर वस्तुओं और सेवाओं पर केवल दो टैक्स स्लैब 5% और 18% लागू होंगे, जबकि लग्जरी और हानिकारक वस्तुओं पर 40% का विशेष टैक्स लगेगा। इस बदलाव से रियल एस्टेट सेक्टर में घरों की कीमतों में कमी आने की उम्मीद है।






नई दिल्ली, 22 अगस्त 2025: देश में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) प्रणाली को सरल बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। गुरुवार को हुई ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GoM) की बैठक में मौजूदा चार टैक्स स्लैब (5%, 12%, 18%, और 28%) को घटाकर केवल दो स्लैब—5% और 18%—करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इसके अलावा, तंबाकू, शराब, सॉफ्ट ड्रिंक्स और लग्जरी कारों जैसी वस्तुओं पर 40% का विशेष टैक्स (सिन टैक्स) लगाया जाएगा।

बैठक की अध्यक्षता बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की, जिसमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और केरल के मंत्री भी शामिल थे। यह प्रस्ताव अब सितंबर में होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में अंतिम निर्णय के लिए रखा जाएगा।


क्या बदलेगा नए टैक्स स्ट्रक्चर में?

  • 5% स्लैब: इसे मेरिट रेट माना जाएगा, जिसमें जरूरी वस्तुएं जैसे अनाज, दवाइयां, डेयरी उत्पाद, स्टेशनरी और प्रोसेस्ड फूड शामिल होंगे। पहले 12% स्लैब में आने वाली वस्तुओं में से 99% को अब 5% स्लैब में लाया जाएगा।
  • 18% स्लैब: इसे स्टैंडर्ड रेट माना जाएगा, जिसमें सामान्य वस्तुएं और सेवाएं जैसे मोबाइल, कपड़े, होटल सेवाएं, कंस्ट्रक्शन मटेरियल आदि शामिल होंगे। 28% स्लैब में आने वाली वस्तुओं में से लगभग 90% को 18% स्लैब में शिफ्ट किया जाएगा।
  • 40% सिन टैक्स: तंबाकू, शराब, गुटखा, फास्ट फूड और लग्जरी कारों पर यह विशेष टैक्स लागू होगा।

रियल एस्टेट सेक्टर पर असर
रियल एस्टेट सेक्टर में कंस्ट्रक्शन मटेरियल जैसे सीमेंट, स्टील, पेंट और टाइल्स पर अभी अलग-अलग टैक्स दरें लागू हैं। सीमेंट और पेंट पर 28%, जबकि स्टील और टाइल्स पर 18% जीएसटी लगता है। इस वजह से डेवलपर्स की लागत बढ़ जाती है और घरों की कीमतें भी ऊंची हो जाती हैं।

ओसवाल ग्रुप के चेयरमैन आदिश ओसवाल का कहना है कि टैक्स दरों में कटौती से डेवलपर्स की लागत घटेगी और मकान सस्ते हो सकते हैं, खासकर टियर-2 शहरों में। एसएस ग्रुप के एमडी अशोक सिंह जौनपुरिया ने कहा कि असली फायदा तभी होगा जब डेवलपर्स टैक्स बचत का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाएं।


एनसीआर मार्केट में सकारात्मक संकेत
एनसीआर क्षेत्र (नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद) में पहले ही जीएसटी ने पारदर्शिता लाई है। 2019 में अंडर-कंस्ट्रक्शन मकानों पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया था, जिससे बिक्री में तेजी आई। 2024 की पहली छमाही में एनसीआर में 38,200 घर बिके, जो पिछले साल से 25% अधिक है।

हालांकि, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की अनुपलब्धता से डेवलपर्स को दिक्कत होती है। टीआरजी ग्रुप के एमडी पवन शर्मा ने आंशिक रूप से ITC वापस लाने की मांग की है ताकि किफायती मकानों का निर्माण आसान हो सके।


किफायती बनाम लग्जरी हाउसिंग
एआईएल डेवलपर्स के संदीप अग्रवाल के अनुसार, नए टैक्स स्ट्रक्चर से कंस्ट्रक्शन कॉस्ट 10–20% तक घट सकती है, जिससे मेट्रो और टियर-2 शहरों में घरों की कीमतें किफायती हो सकती हैं। वहीं, एलीटप्रो इंफ्रा के वीरेन मेहता ने चिंता जताई कि लग्जरी हाउसिंग में विदेशी मटेरियल पर 40% टैक्स लगने से लागत काफी बढ़ जाएगी।


बीमा और हेल्थ सेक्टर पर भी असर
बैठक में हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर जीएसटी छूट देने का प्रस्ताव भी रखा गया। अगर यह लागू होता है तो पॉलिसीधारकों को 18% टैक्स नहीं देना पड़ेगा, हालांकि इससे सरकार को करीब ₹9,700 करोड़ का राजस्व नुकसान हो सकता है।


निष्कर्ष
GST स्लैब में यह बदलाव टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल आम जनता को राहत मिलेगी, बल्कि रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और बीमा जैसे सेक्टरों में भी सकारात्मक असर देखने को मिलेगा। अब सभी की निगाहें सितंबर में होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक पर हैं, जहां इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगेगी।

Richa Sahay

ऋचा सहाय — पत्रकारिता और न्याय जगत की एक सशक्त आवाज़, जिनका अनुभव दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय है। वर्तमान में The 4th Pillar की वरिष्ठ समाचार संपादक के रूप में कार्यरत ऋचा सहाय दशकों से राजनीति, समाज, खेल, व्यापार और क्राइम जैसी विविध विषयों पर बेबाक, तथ्यपूर्ण और संवेदनशील लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी लेखनी की सबसे खास बात है – जटिल मुद्दों को सरल, सुबोध भाषा में इस तरह प्रस्तुत करना कि पाठक हर पहलू को सहजता से समझ सकें।पत्रकारिता के साथ-साथ ऋचा सहाय एक प्रतिष्ठित वकील भी हैं। LLB और MA Political Science की डिग्री के साथ, उन्होंने क्राइम मामलों में गहरी न्यायिक समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण स्थापित किया है। उनके अनुभव की गहराई न केवल अदालतों की बहसों में दिखाई देती है, बल्कि पत्रकारिता में उनके दृष्टिकोण को भी प्रभावशाली बनाती है।दोनों क्षेत्रों में वर्षों की तपस्या और सेवा ने ऋचा सहाय को एक ऐसा व्यक्तित्व बना दिया है जो ज्ञान, निडरता और संवेदनशीलता का प्रेरक संगम है।

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