नेक्स्ट जनरेशन GST सुधार: सरकार ने प्रस्तावित की दो-स्लैब कर व्यवस्था, आम जनता और MSMEs को मिलेगा दिवाली का तोहफा




नई दिल्ली, 15 अगस्त 2025 — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के भाषण में घोषित “नेक्स्ट जनरेशन GST सुधार” योजना को लेकर वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बड़ा कदम उठाया। मंत्रालय ने मंत्रिमंडल की एक समिति (ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स) को दो-स्तरीय जीएसटी दर संरचना का प्रस्ताव भेजा है, जिसमें कुछ चुनिंदा वस्तुओं पर विशेष कर दरें भी शामिल होंगी। इस सुधार का उद्देश्य इस वित्तीय वर्ष में रोजमर्रा की वस्तुओं पर टैक्स का बोझ कम करना और छोटे उद्योगों को राहत देना है।
वर्तमान व्यवस्था और प्रस्तावित बदलाव:
वर्तमान में भारत में जीएसटी की पांच दरें हैं — 0%, 5%, 12%, 18%, और 28%, जिसमें आवश्यक वस्तुओं पर कम टैक्स और लग्जरी व हानिकारक वस्तुओं पर उच्च टैक्स लगाया जाता है। इसके अलावा, क्षतिपूर्ति सेस भी लागू होता है, जो 31 मार्च 2026 को समाप्त हो रहा है।
अब सरकार ने प्रस्तावित किया है कि जीएसटी को केवल दो स्लैब में बांटा जाए:
- स्टैंडर्ड स्लैब: सामान्य वस्तुओं के लिए
- मेरिट स्लैब: आवश्यक और आकांक्षात्मक वस्तुओं के लिए
इसके अलावा, कुछ विशेष वस्तुओं पर अलग से स्पष्ट रूप से परिभाषित विशेष दरें लागू होंगी।
GST has simplified the tax system for the common citizen.
We are working on next generation GST reforms which will further empower common citizens, MSMEs and industries. pic.twitter.com/jxNfAvVo5T
— Narendra Modi (@narendramodi) August 15, 2025
सुधार के तीन मुख्य स्तंभ:
- संरचनात्मक सुधार:
- उलटे कर ढांचे (Inverted Duty Structure) को ठीक करना
- वस्तुओं की श्रेणीकरण से जुड़े विवादों को सुलझाना
- दरों का समायोजन:
- रोजमर्रा की वस्तुओं पर टैक्स में कटौती
- स्लैब की संख्या घटाकर दो करना
- विशेष वस्तुओं पर अलग दरें तय करना
- जीवन में सुगमता:
- रजिस्ट्रेशन और रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रिया को आसान बनाना
- रिफंड प्रक्रिया को तेज और स्वचालित करना।
सितंबर में होगी निर्णायक बैठक
GST काउंसिल, जिसकी अध्यक्षता वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी, सितंबर में दो दिवसीय बैठक करेगी। इसमें 12% स्लैब को हटाकर नई दो-स्लैब प्रणाली पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सुधार पारित हो जाता है, तो दिवाली से पहले लागू किया जा सकता है, जिससे MSMEs को राहत और उपभोग में वृद्धि होगी।
रिटर्न फाइलिंग में भी बड़ा बदलाव
1 जुलाई 2025 से GSTR-3B फॉर्म ऑटो-पॉपुलेटेड होंगे और एक बार भरने के बाद एडिट नहीं किए जा सकेंगे। इसके अलावा, तीन साल से पुराने रिटर्न फाइल नहीं किए जा सकेंगे। यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी ITC दावों को रोकने के लिए उठाया गया है।
वैश्विक संदर्भ
विश्व बैंक की 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का GST दुनिया की सबसे जटिल प्रणालियों में से एक है। दुनिया के अधिकांश देशों में एक या दो स्लैब ही होते हैं। भारत में चार या अधिक स्लैब होने से कर वर्गीकरण में जटिलता और विवाद की स्थिति बनी रहती है।
दिवाली से पहले राहत की उम्मीद
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा, “इस दिवाली एक बड़ा तोहफा देने जा रहा हूं।” यह संकेत है कि सुधारों को त्योहारी सीजन से पहले लागू किया जा सकता है, जिससे आम जनता को महंगाई से राहत और छोटे कारोबारियों को टैक्स अनुपालन में आसानी मिलेगी।