कोरोना काल में युवक ने खोली खुद की कंपनी, 6 महीने के भीतर डेढ़ करोड़ का टर्नओवर

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रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कृषि अर्थशास्त्र विभाग के शोधार्थी छात्र विकास लूनावत ने कोरोना काल को अवसर के रूप में विकसित कर लिया है। उन्होंने एग्रो केमिकल (कृषि रसायन) और पेस्टीसाइड (कीटनाशक) उत्पादक कंपनियों से बातचीत करके शिविक्स क्राप साइयंस नाम से खुद की कंपनी खोली। उन्होंने प्रदेश के अन्य युवाओं को भी जोड़ा।

विभिन्न राज्यों के चुनिंदा और भारत सरकार से अनुशंसित कीटनाशकों को किसानों तक पहुंचाने के इस नए स्टार्टअप के माध्यम से अब तक 100 डीलरों को भी जोड़ लिया है। डीलरों के माध्यम से वह छह महीने के भीतर ही छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों में निर्मित अच्छी गुणवत्ता के कीटनाशक प्रदेश के किसानों तक पहुंचाने में सफल रहे हैं।

इससे हजारों किसान लाभान्वित हुए।

विकास ने इंटरनेट मीडिया का भी जमकर प्रयोग किया। कम समय में ही लोगों तक संदेश पहुंचाने में सफलता के फलस्वरूप छह महीने में ही उनका टर्न ओवर डेढ़ करोड़ रुपये का हो गया है। विकास लूनावत मूलत: मध्य प्रदेश के बालाघाट के रहने वाले हैं। कृषि अर्थशास्त्र विभाग के अंतर्गत शोध कार्य कर रहे हैं और राजधानी के रामसागर पारा में रहते हैं। विश्वविद्यालय के विज्ञानियों ने अवसर तलाशने में उनकी मदद की। इसमें कृषि विवि के कुलपति डा एसके पाटील, कृषि विज्ञानी डा हुलास पाठक, कीट विज्ञान के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ.गजेंद्र चंद्राकर और कृषि विज्ञानी डॉ.संकेत ठाकुर ने उनकी मदद की।

ऐसे पहुंचे किसानों तक

विकास लूनावत बताते हैं कि पढ़ाई के साथ-साथ यह काम करना थोड़ा चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन अब मजा आ रहा है। इंटरनेट मीडिया के माध्यम से अच्छी गुणवत्ता के कीटनाशक और रासायनिक दवाइयों का प्रचार-प्रसार किया। कालेज और विश्वविद्यालय के छात्रों की मदद से किसानों तक पहुंचे। अब कुछ युवा साथ में जुड़े हैं, जो आर्डर लेकर आते हैं और हम माल की सप्लाई कर देते हैं। आर्डर लेकर आने वाले युवाओं को भी कमीशन के रूप में हर महीने करीब 30 से 40 हजार रुपये आमदनी हो जाती है।

इसीलिए बनाई कंपनी

विकास लूनावत बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में बहुत से किसान अनजाने में घटिया किस्म के कीटनाशक, रासायनिक खादों का अपने खेत में इस्तेमाल कर लेते हैं। इससे किसानों की फसल खराब हो जाती है। कोरोना संक्रमण काल में जब मजदूर और किसान अपने घरों की तरफ आ रहे थे, ऐेसे में इस साल खेतीबाड़ी की अधिक उम्मीद दिख रही थी। ऐसे में किसानों को भारत सरकार की ओर से अनुशंसित सही कीटनाशक और रासायनिक दवाइयां पहुंचाने के मकसद से कंपनी खोली। किसानों की खेतीबाड़ी में सहयोग करने की इच्छा जागी। किसानों को धान, गेहूं की उन्नात किस्म के बीज खरीदने, बीज उपचार करने, खेती में कृषि यंत्रों का सही प्रयोग करने आदि की जानकारी देने के लिए इंटरनेट मीडिया का खूब सहारा लिया।

यह कहते हैं विशेषज्ञ

विकास लूनावत के इस स्टार्टअप में मार्गदर्शन दे रहे इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कीट विज्ञानी डॉ.गजेंद्र चंद्राकर कहते हैं कि किसानों को फसलों को कीटों के प्रकोप से बचाने के लिए कीटनाशकों का प्रयोग करने से पूर्व पूरी जानकारी ली जानी चाहिए। बेहतर उत्पादन के लिए अच्छी प्रजाति के बीज और खाद का प्रयोग करने पर ध्यान केंद्रित रहना चाहिए।