धनतेरस के दिन क्यों रखते हैं दीया दक्षिण दिशा में, जानें पूजन विधि

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दीपावली की शुरुआत धनतेरस के दिन से होती है .पांच रोज तक चलने वाले इस हिन्दू पर्व की पहली पूजा धनतेरस के रूप में होती है। इस दिन माता लक्ष्‍मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्‍वंतरि की पूजा का विधान है। शास्त्र अनुसार इस दिन क्षीर सागर मंथन के दौरान माता लक्ष्‍मी और भगवान कुबेर प्रकट हुए थे.

यह भी कहा जाता है कि इसी दिन आयुर्वेद के देवता भगवान धन्‍वंतरि का जन्‍म हुआ था. यही वजह है कि इस दिन माता लक्ष्‍मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्‍वंतरि की पूजा का विधान है. भगवान धन्‍वंतरि के जन्‍मदिन को भारत सरकार का आयुर्वेद मंत्रालय ‘राष्‍ट्रीय आयुर्वेद दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है।

कार्तिक मास की तेरस यानी कि 13वें दिन धनतेरस मनाया जाता है. इस बार धनतेरस 12 नवंबर या 13 नवंबर को है इसे लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है।

 

इस बार धनतेरस 13 नवंबर को है.

पूजा तिथि और शुभ मुहूर्त

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 12 नवंबर 2020 को रात 09 बजकर 30 मिनट से

त्रयोदशी तिथि समाप्‍त: 13 नवंबर 2020 को शाम 05 बजकर 59 मिनट तक

धनतेरस पूजा मुहूर्त: 13 नवंबर 2020 को शाम 05 बजकर 28 मिनट से रात 05 बजकर 59 मिनट तक.

कुल अवधि: 30 मिनट

प्रदोष काल: 13 नवंबर 2020 को शाम 05 बजकर 28 मिनट से रात 08 बजकर 07 मिनट तक.

वृषभ काल: 13 नवंबर 2020 को शाम 05 बजकर 32 मिनट से रात 07 बजकर 28 मिनट तक.

धनतेरस की पूजा में ध्यान देने योग्य बातें

धनतेरस के दिन भगवान धन्‍वंतरि, मां लक्ष्‍मी, भगवान कुबेर और यमराज की पूजा का विधान है.

धनतेरस के दिन आरोग्‍य के देवता और आयुर्वेद के जनक भगवान धन्‍वंतरि की पूजा की जाती है. मान्‍यता है कि इस दिन धन्‍वंतरि की पूजा करने से आरोग्‍य और दीर्घायु प्राप्‍त होती है. इस दिन भगवान धन्‍वंतरि की प्रतिमा को धूप और दीपक दिखाएं. साथ ही फूल अर्पित कर सच्‍चे मन से पूजा करें.

धनतेरस के दिन मृत्‍यु के देवता यमराज की पूजा भी की जाती है. इस दिन संध्‍या के समय घर के मुख्‍य दरवाजे के दोनों ओर अनाज के ढेर पर मिट्टी का बड़ा दीपक रखकर उसे जलाएं. दीपक का मुंह दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए. दीपक जलाते समय मंत्र का जाप करें इस दिन सोने-चांदी के आभूषण और बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।