क्यों बढ़ रही है मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव के बीच दूरियां, क्या यह दूरियां पड़ सकती है पार्टी पर भारी

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रायपुर।छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार में स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसा भारी भरकम विभाग के मंत्री टीएस सिंहदेव एक बार फिर चर्चा में हैं। भूपेश बघेल से उनका सम्बन्ध बहुत ज्यादा अच्छा तो नही कहा जा सकता है।सत्ता के मुखिया की कुर्सी के मोह में दोनों नेताओं का विवाद अब सामने आ चुका है। टी एस सिंहदेव को उनके ही विभाग की बड़ी बैठक में नही बुलाने की चर्चा उस समय जोरो पर थी।राज्य सरकार ने कोरोना को लेकर अहम् बैठक की थी,उस बैठक में मुख्यमंत्री ने विभागीय मंत्री को बुलाना भी मुनासिब नही समझा था।सिंहदेव को राज्य स्थापना दिवस कार्यक्रम में शिरकत करने मुख्यमंत्री निवास जाना था,पर वो वहा भी नही उपस्थित नही हुए।उस कार्यक्रम में दिल्ली से राहुल गांधी भी वर्चुअल रूप से उपस्थित थे। ऐसे कई कार्यक्रम सामने आ रहे है जिसमे प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव का नही आना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।सरकार के कई कार्यक्रम में मंत्री टी.एस.सिंहदेव की गैरमौजूदगी से अब चर्चा में भी होने लगी है कि कही यहाँ का हाल मध्यप्रदेश जैसा न हो जाये।

प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाने में टी.एस.सिंहदेव और भूपेश बघेल दोनों की ही मेहनत थी।पर दिल्ली के आला नेताओ ने भूपेश बघेल को सत्ता का मुखिया बनाया।उस समय एक बात की चर्चा यह भी हुई थी की ढाई साल पहले भूपेश बघेल मुख्यमंत्री रहेंगे,और उसके बाद के ढाई साल टी.एस.सिंहदेव मुख्यमंत्री रहेंगे।इस फार्मूले पर पार्टी की सोच दोनों नेताओं को संतुष्ट करने का ही रहा होगा। अब इस बात पर कितनी सच्चाई है यह तो आने वाले कुछ माह में साफ हो ही जायेगा। कांग्रेस में मुख्यालय दिल्ली दरबार में टी.एस.सिंहदेव की अपनी हैसियत आज भी कायम है। सूत्रों के अनुसार प्रियंका गांधी सहित राष्ट्रीय नेताओ के बीच टी.एस.सिंहदेव की छवि बहुत अच्छी है।अपने सरल स्वभाव के कारण टी.एस.सिंहदेव जनता में भी लोकप्रिय है। मरवाही उप चुनाव में कांग्रेस अपनी जीत को लेकर बड़े दावे कर रही है, तो टी.एस.सिंहदेव ने बयान दिया कि जोगी पार्टी के वोट जिधर पड़ेंगे, जीत उसी को मिलेगी।और इस चुनाव में अमित जोगी ने साफ कर भी दिया है कि जोगी कांग्रेस भाजपा के प्रत्याशी के साथ खड़ी है।साथ ही अमित जोगी ने भाजपा को वोट देने की अपील मरवाही की जनता से की है।कुल मिलाकर देखा जाये तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और टी एस सिंहदेव का विवाद दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा है।मरवाही चुनाव की हार से भाजपा को कोई फर्क नही पड़ेगा,पर यह तो तय है कि इस चुनाव की हार से कांग्रेस में बड़ा विस्फोट जरूर होगा। अब इस विस्फोट से किसका फायदा होगा या किसका नुकसान,यह तो 9 तारीख चुनाव परिणाम के बाद ही पता चलेगा।

मरवाही के चुनाव नतीजे के आने के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया अध्याय भी शुरू होगा।भाजपा, कांग्रेस और जोगी कांग्रेस तीनो दलो की साख दाव पर लगी हुई है।कौन अपनी साख बचा पाता है यह देखने लायक होगा।