सुनामी की है 16 वीं वर्षगांठ,दिल दहला देने वाला भयावह दिन जिसे सोच कर कांप जाती रूह

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रायपुर । 26 दिसंबर 2004 एक ऐसा दिन जिसे भूलना बहुत मुश्किल है कितना भयावह था वो दिन सोच कर आज भी लोगों की रूह कांप जाती है।26 दिसंबर 2004 को 9.1 तीव्रता का एक भयानक भूकंप आया और अपने साथ लाया मौत की सुनामी। इस भयानक प्राकृतिक आपदा में लगभग 2 लाख 30 हजार लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।

सुनामी से इंडोनेशिया, भारत, श्रीलंका समेत 14 देश प्रभावित हुए थे।भारत के दक्षिणी राज्यों में सुनामी ने जबरदस्त तबाही मचाई थी।इस हादसे ने लाखों की संख्या में न सिर्फ लोगों को मौत की नींद सुला दिया बल्की इससे कई गुना अधिक लोगों को विस्थापित भी कर दिया।

आज से ठीक 16 साल पहले याने 26 दिसंबर 2004 को हिन्द महासागर में आए 9.1 तीव्रता के भूकंप से 100 फीट से ऊंची सुनामी आई थी. इस नैसर्गिक त्रासदा में भारत सहित श्रीलंका, इंडोनेशिया, थाईलैंड सहित 14 देशों में 2 लाख 30 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।इस हादसे में भारत का सबसे ज्यादा प्रभावित तमिलनाडु प्रांत हुआ था, जहां 8000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।इस सुनामी से प्रांत के नागापट्टनम, चेन्नई और कुड्डलोर जिले सर्वाधिक प्रभावित हुए थे. इस घटना से सबक लेते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2007 में हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय सामुद्रिक सूचना सेवा केंद्र में सुनामी की पूर्व सूचना के लिए इंडियन सुनामी अर्ली वार्निंग सिस्टम की स्थापना की।

इस सिस्टम की बदौलत अब भारत के वैज्ञानिक हिन्द महासागर में उठने वाली सुनामी की रियल टाइम में आंकलन कर सकते हैं. 24×7 ऑपरेशन रहने वाले इस सिस्टम की बदौलत समुद्र के तलहटी पर दबाव का आंकलन कर सुनामी भूकंप का आंकनल कर प्रभावित होने वाले लोगों को जल्द से जल्द सूचना प्रदान की जा सकती है. इस सिस्टम का लाभ भारत केवल अकेले नही उठा रहा है, बल्कि हिन्द महासागर से लगे तमाम देशों को जानकारी दे रहा है।