स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की चर्चा का प्रमुख केंद्र हुआ करता था यह भवन, आज इस नाम से पहचान

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रायपुर । छत्तीसगढ़ की माटी ने कई वीर सपूतों को जन्म दिया है। यहां के वीरों ने आजादी की लड़ाई के लिए अपने खून की नदियां तक बहाई हैं। इसकी गवाही शहर की कई इमारतें और सड़कें दे रही हैं। इसी में से एक है राजधानी रायपुर के बीचोबीच स्थित डिस्ट्रिक्ट कौंसिल भवन, जो आज भी आजादी के उन परवानों की याद दिलाता है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपनी महती भूमिका निभाई थी। हालांकि इस भवन में वर्तमान में कलेक्टर आयुक्त का कार्यालय संचालित हो रहा है, लेकिन जानकारों की मानें तो यह भवन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का अड्डा हुआ करता था, जहां देश की आजादी के लिए रणनीतियां बनाई जाती थीं।

राजधानी रायपुर के जीई रोड स्थित

राजधानी रायपुर के जीई रोड स्थित डिस्ट्रिक्ट कौंसिल भवन कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जाता है। इस भवन का निर्माण 1885 के आसपास हुआ था। अंग्रेजी हुकूमत से लेकर आजादी के आंदोलन तक इस भवन का इतिहास बड़ा ही दिलचस्प रहा है। इतिहासकारों की मानें तो यह भवन आजादी का ख्वाब देखने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का अड्डा हुआ करता था। यहीं से अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई लड़ने की रणनीतियां बनाई जाती थीं। यहां पं. सुंदरलाल शर्मा, पं. रविशंकर शुक्ल, वामन राव लाखे समेत कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की बैठकें लगा करती थीं। इतिहासविद् रामेंद्रनाथ मिश्र के मुताबिक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रदेश के अनेक भवनों में अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति तैयार करते थे। इसी में से एक जीई रोड स्थित डिस्ट्रिक्ट कौंसिल भवन (वर्तमान में आयुक्त कार्यालय) आजादी की लड़ाई का साक्षी रहा है। यहीं से पं. रविशंकर शुक्ल रणनीतियां बनाया करते थे, वे डिस्ट्रिक्ट कौंसिल के अध्यक्ष भी रहे हैं। यह बौद्धिक जागृति का सबसे बड़ा केंद्र बिन्दु रहा है, क्योंकि शिक्षा को बढ़ावा देने की शुरुआत यहीं से हुई थी।

विद्या मंदिर योजना शुरू

इतिहासविद् रामेन्द्र नाथ मिश्र के मुताबिक आजादी से पहले यह इलाका सीपी बरार में आया करता था। पं. रविशंकर शुक्ल 1936 के आस-पास डिस्ट्रिक्ट कौंसिल के अध्यक्ष हुआ करते थे। उस समय यहीं से शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विद्या मंदिर की अनूठी योजना की रणनीति तैयार की गई। उसके बाद इसे लागू किया गया। इसे धरोहर के रूप में संरक्षित करने की जरूरत है।

कलेक्टर आयुक्त कार्यालय संचालित 

आजादी की लड़ाई का साक्षी रहा यह भवन कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जाता है। आजादी के कुछ समय बाद यहां जिला पंचायत का कार्यालय लगा करता था। कुछ साल पहले जिला पंचायत कार्यलाय को कलेक्टोरेट परिसर के पास स्थानांतरित कर दिया गया। उसके बाद से यहां कलेक्टर आयुक्त कार्यालय संचालित हो रहा है।