पूरी जिंदगी महिला बनकर खेलता रहा यह एथलीट,100 मीटर रेस में ओलंपिक गोल्ड मेडल भी जीता, मौत के बाद इस तरह खुला राज

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ओलिंपिक के इतिहास में पोलिश-अमेरिकन एथलीट स्टेला वॉल्श या स्टेनिसलावा वालासेइविक की कहानी काफी अनोखी मानी जाती है. ओलिंपिक में गोल्ड और सिल्वर मेडल जीतने वाली इस खिलाड़ी की मौत के बाद उन्हें लेकर ऐसा खुलासा हुआ जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था. उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी जिस राज को छुपाए रखा वह राज उनकी मौत के बाद उनकी ऑटोप्सी रिपोर्ट से खुला.

स्टेला वॉल्श के पूरे करियर में उनकी उपलब्धियों को लेकर कई बार सवाल खड़े किए गए थे. वह हमेशा ऐसे आरोपों को नकारती रहीं जिसमें कहा जाता था कि वह असल में शारीरिक तौर पर एक पुरुष हैं. वह महिला इवेंट में हिस्सा लेकर खुद को फायदा पहुंचाने की कोशिश करते हैं. स्टेला ने साल 1932 में हुए ओलिंपिक खेलों में 100 मीटर इवेंट में गोल्ड जीता और इसके अगले ओलिंपिक में सिल्वर मेडल अपने नाम किया.

अमेरिका में रहकर पोलैंड के लिए जीता गोल्ड

स्टेला का जन्म पोलैंड में हुआ था लेकिन कुछ समय बाद वह अपने परिवार के साथ आकर अमेरिका में बस गईं. यहां उन्होंने न्यूयॉर्क की एक कंपनी में काम करना शुरू कर दिया था. हालांकि जब आर्थिक मंदी का दौर आया तो उन्हें अपनी नौकरी खोनी पड़ी. उस समय खिलाड़ियों को ओलिंपिक जाने के लिए खुद इंतजाम करना होता था. सरकार या कोई स्पॉन्सर नहीं हुआ करता था. स्टेला को तबतक अमेरिका की नागरिकता नहीं मिली थी. ऐसे में उन्हें पोलैंड की ओर से टूर्नामेंट में हिस्सा लेने का मौका मिला और उन्होंने अपने पैतृक देश के लिए गोल्ड मेडल जीता. 1932 के ओलिंपिक खेलों में 100 मीटर में 11.9 सेकंड का समय निकालकर उन्होंने ओलिंपिक रिकॉर्ड भी कायम किया था.

साल 1936 के बर्लिन ओलिंपिक में वह केवल सिल्वर ही जीत पाई थीं. इसके बाद पोलैंड की मीडिया ने उनपर बड़ा आरोप लगाया. उनका कहना था कि स्टेला गलत जानकारी देकर ओलिंपिक खेलों में हिस्सा ले रही हैं क्योंकि असल में वह औरत नहीं मर्द हैं. स्टेला को इसके बाद अपना जेनेटल टेस्ट देना पड़ा था. इस टेस्ट में वह औरत ही पाई गई थीं. इसके बाद उन्होंने रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया था. हालांकि वह किसी तरह खेलों से जुड़ रही. साल 1952 में स्टेला को अमेरिका की नागरिकता मिल गई थी.

मौत के बाद इस तरह खुला राज

सालों तक स्टेला ने जिस राज को छुपाया वह उनकी मौत के बाद खुला. 1980 में क्लेवैंड की एक पार्किंग में स्टेला पर दो लोगों ने अटैक किया जिनपर बंदूक भी थी. वह स्टेला से उनका पर्स लेना चाहते थे लेकिन स्टेला लगातार उन्हें रोकने की कोशिश कर रही थी. इसी छीना-झपटी में स्टेला को सीने पर गोली लग गई थी. अस्पताल पहुंचने के बाद उनकी मौत हो गई थी. उनकी मौत के बाद जब उनकी ऑटोप्सी रिपोर्ट सामने आई तो एक अलग ही खुलासा हुआ. रिपोर्ट्स के मुताबिक स्टेला के पास पुरुषों का जननांग था.

इस खबर को छुपाने की कोशिश की गई लेकिन वॉशिंगटन पोस्ट ने इस खबर को छाप दिया. हेडलाइन दी गई, ‘हीरो या हिरोइन’. स्टेला के इंटरसेक्स (जिसमें महिला और पुरुष दोनों के ही जननांग हो होने की बात पहले पता होती तो उनसे मेडल ले लिए जाते पर ऐसा हुआ नहीं. आज के समय में इंटरसेक्स खिलाड़ियों को ओलिंपिक में हिस्सा लेने की इजाजत नहीं है.