राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संचालक का अतिरिक्त प्रभार अशोक चक्रवर्ती से वापस, कांग्रेस विधायक अनीता शर्मा ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर की थी शिकायत

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संचालक का अतिरिक्त प्रभार अशोक चतुर्वेदी से वापस ले लिया है। बताया जा रहा है कि सोनिया गांधी से शिकायत के बाद कार्रवाई की गई है। इस बाबत सरकार की ओर से पत्र भी जारी किया गया है। अशोक चतुर्वेदी की तैनाती के खिलाफ कांग्रेस के विधायकों ने मोर्चा खोेल दिया था। इसकी शिकायत सोनिया गांधी से भी की गई थी। विधायकों ने आरोप लगाया था कि भ्रष्टाचार के मामले में चतुर्वेदी लिप्त रहे हैं, इसलिए इन्हें इस पद से हटाया जाए।

छत्तीसगढ़ में पाठ्य पुस्तक निगम (पापुनि) के एमडी रहे अशोक चतुर्वेदी को अतिरिक्त पदभार सौंपे जाने का रायपुर की धरसींवा विधानसभा सीट से विधायक अनिता शर्मा ने विरोध किया था।इनके बाद सात अन्य विधायकों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ आवाज उठा दी थी। बता दें कि चतुर्वेदी अभी दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इससे पहले आजीविका मिशन के संचालक कुमार लाल चौहान थे।

भारत निर्वाचन आयोग ने निर्वाचन कार्य में उनकी ड्यूटी लगा दी हैै, इसलिए अतिरिक्त प्रभार चतुर्वेदी को दिया गया था। इधर, चतुर्वेदी की नियुक्ति के साथ ही सियासी बवाल खड़ा हुआ था। कांग्रेस की ही विधायक अनिता शर्मा ने इस मामले की सीधे पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से शिकायत करके राज्य सरकार के फैसले पर ही सवाल उठा दिया था।

रायपुर की धरसींवा विधानसभा सीट से विधायक शर्मा ने सोनिया गांधी को लिखे चार पन्ने के शिकायत पत्र को ट्वीट करके खुद ही सार्वजनिक किया था। इसकी प्रति उन्होंने पार्टी के प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव को भी दी है।

चतुर्वेदी को मिशन संचालक बनाए जाने का आदेश 30 मार्च को जारी किया है। इसके ठीक एक दिन बाद एक अप्रैल को विधायक शर्मा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को यह पत्र भेज दिया। बता दें कि चतुर्वेदी मूलत: पंचायत विभाग से ही हैं। उन्हें प्रतिनियुक्ति पर पाठ्य पुस्तक निगम में पदस्थ किया गया था। वहीं वर्तमान में उन्हें संचालक का पद दिया गया है जो आइएएस स्तर का है।

पत्र में चतुर्वेदी की पूरी कहानी

राष्ट्रीय अध्यक्ष को लिखे पत्र में विधायक शर्मा ने चतुर्वेदी की पूरी कहानी बताई है। लिखा है कि पापुनि में महाप्रबंधक रहते हुए चतुर्वेदी के खिलाफ करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार किए जाने के मामले में ईओडब्ल्यू ने एफआइआर दर्ज कर रखी है। शर्मा ने लिखा है कि इस नियुक्ति से इससे न केवल प्रदेश सरकार की बल्कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की भी छवि खराब हो रही है, जिसका सीधा असर कांग्रेस की लोकप्रियता पर पड़ रहा है।