श्रृंगार से जुड़ी कुछ परंपराएं, श्रृंगार के होते वैज्ञानिक कारण

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हमारे यहां लड़की हो या लड़का सभी के लिए कुछ ना कुछ परंपराएं जरुर बनाई गई हैं। लड़कियों के श्रृंगार से जुड़ी भी कुछ परंपराएं है। जिन्हे परंपरा बनाने के पीछे कुछ वैज्ञानिक कारण भी है। ऐसे ही लड़कियों के लिए कुछ श्रृंगार आवश्यक माने गए हैं। ऐसा माना जाता है कि श्रृंगार के कई फायदे हैं।

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सिंदूर

विवाहित महिलाएं मांग के बीचों-बीच जहां सिंदूर लगाती हैं, उसे अध्यात्म में ‘ब्रह्मरंध्र’ कहा जाता है. इसे एक ग्रंथि के रूप में जाना जाता है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण महिलाओं का ये स्थान बहुत नाजुक होता है, जिसे सुरक्षा की जरूरत होती है. सिंदूर में पारा होता है, जिसे लगाने से इस स्थान में ठंडक पहुंचती है. वैज्ञानिक तर्क के अनुसार विवाह के बाद महिलाओं के जीवन में बहुत बदलाव आता है, इसलिए उन्हें तनाव होने लगता है, ऐसे में सिंदूर को लगाने से तनाव भी कम होता है क्योंकि सिंदूर में पारा नामक पदार्थ पाया जाता है

बिंदी

लड़कियां बिंदी का उपयोग सुंदरता बढ़ाने के उद्देश्य से करती हैं और विवाहित महिलाओं के लिए यह सुहाग की निशानी मानी जाती है। हिंदू धर्म में शादी के बाद हर स्त्री को माथे पर लाल बिंदी लगाना आवश्यक परंपरा माना गया है।बिंदी का संबंध हमारे मन से भी जुड़ा हुआ है। योग शास्त्र के अनुसार जहां बिंदी लगाई जाती है वहीं आज्ञा चक्र स्थित होता है। यह चक्र हमारे मन को नियंत्रित करता है।

काजल

काजल को सोलह शृंगार में भी शामिल किया गया है। सभी यही सोचते हैं कि काजल का उपयोग सुंदरता बढ़ाने के लिए किया जाता है। परंतु सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ काजल के अन्य उपयोग भी हैं। जैसे काजल में औषधिय गुण होते हैं जो आंखों के लिए एक औषधि का काम करता है। जिससे आंखों की देखने क्षमता बढ़ती है और नेत्र रोगों से भी बचाव हो जाता है। साथ ही काजल दूसरों की बुरी नजर से भी रक्षा करता हैं।

नथनी

नोजपिन या नथनी ट्रेडिशनल टच के साथ मार्डन लुक देकर खूबसूरत लड़कियों की सुन्दरता को और बढ़ा देती हैं। नाक छेदन हमारे शास्त्रों के अनुसार एक अनिवार्य परंपरा है। ऐसा उनकी शारीरिक संचरना को ध्यान में रखकर परंपरा से जोड़ा गया है। स्त्रियां शारीरिक रूप से काफी संवेदनशील होती हैं उन पर मौसम के छोटे-छोटे परिवर्तन का भी गहरा प्रभाव पड़ता है

कंगन

सोने और चांदी के कड़े हड्डियों को मजबूत करते थे और लगातार घर्षण से इन धातुओं के गुण भी शरीर को मिलते थे, जिससे महिलाओं को आरोग्य मिलता था तथा अधिक उम्र में भी वे स्वस्थ्य रहती थीं। इसके पीछे एक और कारण यह भी था। वह यह कि सभी की जिंदगी में उतार -चढ़ाव आते हैं। उस बुरे समय ये गहने आर्थिक सहारा भी देते हैं इसीलिए हमारे यहां सोने के कंगन पहनने की परंपरा बनाई गई है।

पायल

पायल महिलाओं के सोलह श्रंगार में अहम भूमिका निभाती है। पायल पहनने के पीछे यह वजह है कि प्राचीन काल में महिलाओं को पायल एक संकेत मात्र के लिए पहनाई जाती थी। जब घर के सभी सदस्य एक साथ बैठे होते थे तब यदि कोई पायल पहनी स्त्री वहां आती थी तो उसकी छम-छम आवाज से सभी को अंदाजा हो जाता कि कोई महिला उनकी ओर आ रही है। जिससे वे सभी व्यवस्थित रूप से आने वाली महिला का स्वागत कर सके, उसे सम्मान दे सके ।

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