सामना के जरिए शिवसेना का बीजेपी पर तंज, लिखा-यह रुझान नहीं तो और क्या है?

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मुंबई । महाराष्ट्र में ग्राम पंचायत चुनाव परिणाम के बाद शिवसेना ने एकबार फिर बीजेपी पर निशाना साधा है। शिवसेना ने सामना के संपादकीय में लिखा है कि यह रुझान नहीं तो और क्या है। दरअसल महाराष्ट्र में हुए ग्राम पंचायत चुनाव के नतीजों में सत्ताधारी पार्टी शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि भारतीय जनता पार्टी दूसरे नंबर पर रही है। खबर लिखे जाने तक बीजेपी ने 975 सीटें जीत ली हैं जबकि शिवसेना के खाते में 1092 तथा एनसीपी के खाते में 998 और कांग्रेस को 693 सीटें मिलती दिख रही हैं। 34 जिलों के 12,711 ग्राम पंचायतों में से 1523 सीटों पर प्रत्याशी निर्विरोध विजयी हुए हैं।

ग्राम पंचायत चुनाव में महाविकास आघाड़ी सरकार को मिले इस समर्थन के बाद शिवसेना ने बीजेपी पर हमला करते हुए सामना ने लिखा है कि ये रुझान नहीं तो और क्या है? ग्राम पंचायत चुनाव जनमत का रुझान ही होता है, यह स्वीकार कर लो नहीं तो महाराष्ट्र की जनता तुम्हें और धूल चटाए बिना नहीं रहेगी। ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग के ‘कार्यकर्ताओं’ का हाथ पकड़कर महाराष्ट्र में राजनीतिक क्रांति नहीं की जा सकती। महाराष्ट्र की माटी कुछ अलग है। चलो, हवा आने दो!

सामना में लिखा गया है कि महाराष्ट्र का विरोधी दल पिछले एक साल से मुंह से हवा छोड़ रहा है कि महाविकास आघाड़ी सरकार को जनमत का समर्थन नहीं है और ‘ठाकरे सरकार’ जुगाड़ू अर्थात जोड़-तोड़ करके बनी हुई सरकार है। ग्राम पंचायत चुनाव के बाद उस विरोधी दल की हवा निकल गई है। राज्यभर से साढ़े 3 हजार ग्राम पंचायतों के नतीजे सामने आ रहे हैं, इसमें महाविकास आघाड़ी ने अच्छी बढ़त बनाई है।

यह रुझान राज्य ठाकरे सरकार के पक्ष में नहीं तो और क्या है? ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग के ‘कार्यकर्ताओं’ का हाथ पकड़कर महाराष्ट्र में राजनीतिक क्रांति नहीं की जा सकती। महाराष्ट्र की माटी कुछ अलग है। चलो, हवा आने दो! नतीजों को देखते हुए कहा जा सकता है कि भारतीय जनता पार्टी का गढ़ लोगों ने उद्ध्वस्त कर दिए हैं।

दिल्ली की सीमा पर आंदोलनरत किसानों पर चंद्रकांत पाटील ने कहा था कि यह मुट्ठीभर किसान हैं। लेकिन दिल्ली के किसानों का आंदोलन महाराष्ट्र के किसानों का भी है। भाजपा को हराकर महाराष्ट्र के किसानों ने पंजाब-हरियाणा के किसानों का समर्थन किया है।

विरोधी पक्ष लोगों की जिंदगी और मौत की परवाह न करते हुए उन्होंने सुशांत राजपूत, कंगना राणावत और ईडी आदि मामलों को गरमाया। देश में महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक मंदी है। कृषि कानून का मुद्दा भड़क उठा है लेकिन देश की सुरक्षा की गोपनीयता भंग करनेवाले अर्णब गोस्वामी को कंधे पर बैठाकर नचाने में विरोधी दल ने अपने आपको धन्य माना। प्रधानमंत्री मोदी देशभर में पहले क्रमांक के लोकप्रिय नेता हैं लेकिन महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे सबसे पसंदीदा हैं। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष अपने गांव की ग्राम पंचायत नहीं जीत पाए।