संसद में सिंधिया ने विपक्ष को समझाया पेट्रोल की महंगाई का गणित, कहा- जिसके घर शीशे के होते हैं….

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भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को राज्यसभा में अपनी पूर्व पार्टी कांग्रेस पर हमला बोला और आरोप लगाया कि निजीकरण को लेकर सरकार की आलोचना कर रही पार्टी नीत सरकार ने ही 2007 में विनिवेश को बढ़ावा देने की बात की थी। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कोरोना संकट का असर सभी लोगों पर असर पड़ा है लेकिन कांग्रेस का काम सिर्फ विरोध करना है।

उन्होंने कहा कि वह पार्टी जी-23 के लोगों की पीड़ा को नहीं समझ पाई तो देश के लोगों की पीड़ा क्या समझेगी। सिंधिया ने उच्च सदन में वित्त विधेयक, 2021 पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए दावा किया कि 2007 में तत्कालीन संप्रग सरकार ने विनिवेश को विभिन्न सरकारी उपक्रमों में निजीकरण को बढ़ावा देने की बात की थी। उन्होंने दावा किया कि 1991-96 और 2004-14 के दौरान कांग्रेस नीत सरकारों ने सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न उपक्रमों का विनिवेश किया।

विपक्षी सदस्यों की टोकाटोकी के बीच सिंधिया ने कहा, मोदी सरकार आपके अधूरे सपने को ही पूरा कर रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकार कोरोना आपदा को विकास का अवसर बनाने के लिए काम कर रही है लेकिन विपक्ष आपदा में राजनीति पर जोर दे रही है। भाजपा नेता सिंधिया ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों पर होने वाला खर्च निकालने के बाद मिलने वाली राशि में 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य का होता था और शेष 60 प्रतिशत राशि में भी 42 प्रतिशत राज्यों को मिलता है। उन्होंने कहा कि वास्तव में केंद्र को 36 प्रतिशत राशि ही मिलती है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में पेट्रोलियम उत्पादों के दाम सबसे ज्यादा हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपने शासित राज्यों में कदम उठाने चाहिए। इस दौरान टोके जाने पर उन्होंने कहा, मैं इतना कहना चाहता हूं, जिनके घर शीशे के होते हैं, वह दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते।

इसी दौरान विपक्ष के एक सदस्य ने 15 लाख रुपए के वादे का जिक्र किया तो सिंधिया ने कहा, मेरा मुंह मत खुलवाना, 15 लाख रुपए की बात करेंगे तो मैं महाराष्ट्र की बात करूंगा। पिछले तीन-चार दिनों में जो रिपोर्ट आ रही है… पहले 100 करोड़ रुपए का हिसाब दें। ये तो सिर्फ मुंबई शहर का है। उन्होंने संप्रग सरकार और मौजूदा सरकार के आंकड़ों की तुलना करते हुए कहा कि तत्कालीन सरकार ने गेहूं, दालों और कपास आदि की खरीद के लिए काफी कम राशि का आवंटन किया था। सिंधिया ने कहा कि डूबत (बैड) ऋण की प्रक्रिया की शुरुआत संप्रग कार्यकाल में हुई थी। उन्होंने इस क्रम में रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के एक बयान का भी हवाला दिया। उन्होंने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का जिक्र करते हुए कहा कि उसका च्आईपीओ’ आने से निजी पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा और नियंत्रण सरकार के पास ही रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार एलआईसी में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने पर जोर देगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्पष्ट किया है कि एलआईसी में पैसा जमा कराने वाले खाताधारकों की राशि सुरक्षित रहेगी।