सरदार पटेल की 70वीं पुण्यतिथि पर जानें उनके जीवन के कुछ अनछुए पहलू

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भारत के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की आज यानी 15 दिसंबर को पुण्यतिथि है। गुजरात के खेड़ा जिले में पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को हुआ था। उन्होंने अपनी अंतिम सांस 15 दिसंबर 1950 को मुंबई में ली। एक किसान परिवार में जन्म लेने वाले पटेल को आज़ाद भारत को एकजुट करने के लिए जाना जाता है। उन्होंने अपनी कूटनीतिक क्षमता के बल पर कई रियासतों को भारत में मिलाया था।

भारत की आजादी के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल पहले तीन वर्ष उप प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, सूचना मंत्री और राज्य मंत्री रहे थे। उन्होंने देश के नक्शे को मौजूदा स्वरूप देने में अमूल्य योगदान दिया। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि ‘लौह पुरुष’ कहलाए जाने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल को ये उपाधि किसने दी थी और क्यों दी गई थी।

किसने दी थी वल्लभ भाई पटेल को ‘सरदार’ और ‘लौह पुरुष’ की उपाधि

1947 में देश की आजादी के बाद लगभग 500 साल से भी अधिक देसी रियासतों का एकीकरण एक सबसे बड़ी समस्या थी। सरदार वल्लभ भाई पटेल जब भारत के गृहमंत्री बने तब उन्हें भारतीय रियासतों के विलय की ज़िम्मेदारी उनको ही सौंपी गई थी। उन्होंने कुशल कूटनीति और जरूरत पड़ने पर सैन्य हस्तक्षेप के जरिए उन अधिकांश रियासतों को तिरंगे नीचे लानें में कामयाबी हासिल की थी।

यानी 600 छोटी बड़ी रियासतों का भारत में विलय कराया। देशी रियासतों का विलय आजाद भारत की पहली उपलब्धि थी। देशी रियासतों के विलय में सबसे अधिक योगदान पटेल का था। नीतिगत दृढ़ता के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने पटेल को ‘सरदार’ और ‘लौह पुरुष’ की उपाधि दी थी। इसके बाद से ही ‘लौह पुरुष’ के नाम से भी जाना जाने लगा।

कुछ अनछुए पहलू

  • 1: आजकल जिस उम्र में बच्चे गेजुएट हो जाते हैं उस उम्र में सरदार बल्लभ भाई पटेल ने 10वीं की परीक्षा पास की थी। उनकी शिक्षा में सबसे ज्यादा रोड़े परिवार की आर्थिक तंगी ने अटकाए। इसके बावजूद उन्होंने ज़िलाधिकारी की परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त किए।
  • 2: वर्ष 1905 में वल्लभ भाई पटेल वकालत की पढ़ाई करने के लिए इंग्लैंड जाना चाहते थे। लेकिन पोस्टमैन ने उनका पासपोर्ट और टिकट उनके भाई विठ्ठल भाई पटेल को सौंप दिया। दोनों भाइयों का नाम वी जे पटेल था। वल्लभ भाई पटेल ने बड़े भाई को अपना पासपोर्ट और टिकट दे दिया।
  • 3: सरदार पटेल वकालत पढ़ने के लिए इंग्लैंड गए वह भी 36 साल की उम्र में। शुरुआत में देर से पढ़ाई शुरू करने वाले सरदार पटेल ने 36 महीने के वकालत के कोर्स को महज़ 30 महीने में ही पूरा कर दिया।
  • 4: वर्ष 1947 में भारत को आजादी तो मिली लेकिन बिखरी हुई। देश में कुल 562 रियासतें थीं। अपनी कूटनीतिक क्षमता के बल पर पटेल ने इन्हें भारत में मिला लिया।  इनमें जूनागढ़ रियासत के नवाब ने 1947 में पाकिस्तान के साथ जाने का फ़ैसला किया था। इसके बाद पटेल ने जूनागढ़ रियासत का भारत में विलय करा लिया। सरदार पटेल 12 नवंबर, 1947 को जूनागढ़ पहुंचे। उन्होंने भारतीय सेना को इस क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के निर्देश दिए।
  • 5: कोर्ट में बहस चल रही थी। सरदार पटेल अपने मुवक्किल के लिए जिरह कर रहे थे, तभी एक व्यक्ति ने कागज़ में लिखकर उन्हें संदेश देता है। संदेश पढ़कर पटेल उस कागज को अपनी कोट की जेब में रख लेते हैं। उन्होंने जिरह जारी रखी और मुक़दमा जीत गए। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि उस कागज पर उनकी पत्नी झावेर बा की मृत्यु की खबर थी। जब अदालती कार्यवाही समाप्त हुई तब उन्होंने अपनी पत्नी की मृत्यु की सूचना सबको दी।

सम्मान और पुरस्कार

  • लौह पुरुष’ सरदार वल्लभ भाई पटेल को साल 1991 में मरणोपरान्त ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था।
  • अहमदाबाद के एयरपोर्ट का नामकरण ‘सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट रखा गया है।
  • गुजरात के वल्लभ विद्यानगर में ‘सरदार पटेल विश्वविद्यालय’ है।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ रखा गया है। यानी ‘एकता की मूर्ति’। इसका उद्घाटन पीएम मोदी ने 31 अक्टूबर 2018 को सरदार पटेल के जन्मदिवस के मौके पर किया गया था। ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ की ऊंचाई 182 मीटर (597 फीट) है। बता दें कि 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के खेड़ा जिले में जन्में वल्लभ भाई पटेल का निधन 15 दिसंबर 1950 को मुंबई के महाराष्ट्र में हुआ था।