कानून की आंखों की पट्टी को खोल दो मां, नहीं होता कानून अंधा

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  • मां मै नहीं बच सकी,
    अभी नहीं जाना चाहती थी मा,
    अपने घर से विदा होना था मां,
    मेरे हाथ पीले करके,
    मुझे सजा कर,
    पापा की उंगली पकड़ कर चलना सीखा है मां,
    आज उन्हीं के कंधे पर जाने दो मां,
    दरिंदों ने मुझे नहीं मिलने दिया ,
    मां पापा घर परिवार किसी से,
    लूट के इज्जत मेरी ,
    मिला दिया खाक में मुझे मा,
    रह गई मेरी सारी ख्वाहिश अधूरी मा,
    अब इंसाफ दिला दो मा,
    आज मेरी इज्जत लूटी ,
    कल कोई और बेटी की लूटेगी,
    नहीं मां अब बचा लो बेटियों को,
    कानून की आंखों की पट्टी खोल दो मा,
    नहीं होता कानून अंधा ,
    देश की बेटियों को बचा लो मा,
    मै हो जाऊंगी वापस ज़िंदा,
    जब बेटियां निर्भीक होकर जी सकेंगी मा ,
    जब बेटियां निर्भीक होकर जी सकेंगी मा ।।

“ऋचा”