राजस्थान उपचुनाव मे BJP को झटका; हार पर सतीश पूनिया ने कही ये बात

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राजस्थान उपचुनाव (Rajasthan upchunav 2021 Result) में दिवाली से पहले कांग्रेस ने जीत का डबल धमाका किया तो वहीं बीजेपी (BJP) तो तगड़ा झटका लगा है. धरियावद (dhariyawad election result) में बीजेपी तीसरे स्थान पर फिसल गई, तो वल्लभनगर (vallabhnagar election result) में पार्टी उम्मीदवार मुकाबले से बाहर हो गया. बीजेपी जमानत बचाने के लिए भी संघर्ष करती नजर आई. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish Poonia) ने हार से कार्यकर्ताओं को हताश न होने का आव्हान किया है. उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी की कविता की दो पंक्तियां मीडियाकर्मियों को सुनाई और कहा कि भाजपा इस हार से बिल्कुल भी विचलित नहीं होगी. हम हार के कारणों की समीक्षा करेंगे. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जो दावा किया था, वो सच निकला. उन्होंने बीजेपी को चौथे नंबर पर बताया और हुआ भी वहीं.

हिम्मतसिंह झाला की सेवाभावी उम्मीदवार की छवि पूरे क्षेत्र में कहीं दिखाई नहीं दी. कोरोना काल में उनके द्वारा किए गए कामों को जनता ने नकार दिया. भाजपा की आपसी गुटबाजी भी पार्टी की हार का बड़ा कारण बनी. गुलाबचंद कटारिया, उदयलाल डांगी की टिकट के लिए दम लगा रहे थे. जब डांगी को टिकट नहीं मिला तो प्रदेश संगठन ने रणधीर सिंह भींडर की पत्नी को टिकट देने के प्रयास किए. मगर कटारिया की जिद आड़े आ गई और चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी की पसंद के रूप में हिम्मतसिंह झाला को टिकट मिल गय. बीजेपी के मेवाड़ के विधायक भी अंदरखाने उनसे खफा रहे. दिखावे के तौर पर वो साथ रहे, मगर अंदर से भाजपा का कैडर डांगी और भींडर के साथ शिफ्ट हो गया. प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया खुद भी मानते हैं कि पार्टी से कई रणनीतिक चूक हुई है.

बीजेपी की हार के बड़े कारण

केंद्रीय नेतृत्व ने उम्मीदवारों के चयन में प्रदेश नेतृत्व की सलाह नहीं मानी

टिकट बंटवारे में केंद्रीय नेतृत्व का नीतिगत फैसला पार्टी की हार का सबसे बड़ा कारण बना

धरियावद में कन्हैयालाल मीना को टिकट मिलता तो पार्टी को सहानुभूति का फायदा मिलता

पार्टी ने पहले कन्हैयालाल को ही अपना चेहरा बनाया, महीनों से उन्होंने तैयारी की

मगर आखरी दिन खेतसिंह को टिकट दे दिया गया

नतीजा जिस लसाड़िया क्षेत्र से बीजेपी 20 हजार वोट की बढ़त हासिल करती थी, वहां माइनस में चली गई

कन्हैयालाल के समर्थकों ने चुनाव प्रचार के आखरी दिनों में घर बेठना मुनासिब समझा

सीएम अशोक गहलोत के धुंआधार दौरों ने बीजेपी की हालत पतली कर दी

युवाओं का अधिकांश वोट बीटीपी के बागी थावरचंद डामोर ले गए

पार्टी कृैडर कन्हैयालाल मीना के साथ था, जो हताश होकर घर बैठ गया या फिर कांग्रेस और बीटीपी के बागी के साथ शिफ्ट हेा गया

खेत सिंह मीना का एक कथित ऑडियो ने भाजपा कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ दिया, जिसमें वो दिवंगत विधायक गौतम लाल मीना पर यह आरोप लगाते हुए सुने गए कि वो पैसे के दम पर टिकट लाते थे

भाजपा धरियावाद में हवा ही नहीं बना पाई. मतदान से ठीक पहले थावरचंद डामोर जनता में यह भरोसा पैदा कर पाने में सफल हो गए कि कांग्रेस उम्मीदवार से मुकाबले में वो हैं न कि भाजपा

नतीजों से क्या होगा बीजेपी पर असर

हालांकि इस हार से सतीश पूनियां के राजनीतिक सेहत पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ेगा. मगर वसुंधरा कैँप उन्हें घेरने का कोई मौका नहीं चूकेगा. पार्टी के आलाकमान तक असंतुष्ट धड़ा हार को लेकर संपर्क साधेगा. सतीश पूनिया को पहले से ही ऐसे नतीजों की आशंका थी. केंद्रीय नेतृत्व को उन्होंने पहले ही बता दिया था कि उम्मीदवारों के चयन में गलतियां हुई हैं. चुनाव में स्थानीय मुददे हावी रहे. मंहगाई की मार का भी कहीं न कहीं जनता पर असर पड़ा है, जो नतीजों में बीजेपी पर भारी पड़ी.