कम्युनिटिंग पुलिसिंग के जरिए कानून व्यवस्था को मजबूत करने फिर कवायद तेज

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रायपुर । राजधानी रायपुर में कम्युनिटी पुलिसिंग के जरिए कानून व्यवस्था को मजबूत करने का काम पांच साल पहले भी हुआ था। इसके बेहतर परिणाम भी सामने आए थे। पुलिस अफसरों की पहल से 25 से अधिक वार्ड, मोहल्लों में आम लोगों की टीम गठित होने से पुलिस थाना, पेट्रोलिंग टीम को किसी भी तरह की सूचनाएं आसानी से मिल जाती थीं और समय रहते पुलिस तत्काल कार्रवाई कर वारदात होने से पहले ही बदमाशों पर शिंकजा कस लेती थी।

मगर, अफसरों के बदलने के बाद गठित टीम की तरफ ध्यान नहीं दिए जाने से वे पुलिस से दूर होते चले गए। नतीजन पुलिस और आम जनता के बीच दूरियां बनती गई। यही कारण है कि वर्तमान में किस वार्ड में कौन अनजान व्यक्ति आकर रह रहा है और वारदात कर कब चला जा रहा है, इसके बारे में न तो आस-पास के लोगों को पता चलता है और न ही पुलिस ध्यान दे रही है।

राजधानी रायपुर में बढ़ते अपराध को लेकर डीजीपी डीएम अवस्थी लगातार बैठक लेकर राजधानी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने फिर से कम्युनिटी पुलिसिंग को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। दरअसल, डीजीपी अवस्थी रायपुर में जब पुलिस कप्तान थे, तब उन्होंने कम्युनिटी पुलिसिंग की शुरूआत की थी। इसके बेहतर परिणाम सामने आए थे। इसके बाद आईजी मुकेश गुप्ता, दीपांशु काबरा, प्रदीप गुप्ता आदि ने भी कम्युनिटी पुलिसिंग को बढ़ावा दिया और 25 से अधिक वार्ड, मोहल्लों में पुलिसमित्र के तौर पर आम लोगों की टीम बनी।

यह टीम मोहल्लों के छोटे-मोटे झगड़े को आपस में ही बैठकर सुलझा लेती थी। इससे पुलिस थानों में छोटी शिकायते आना बंद हो गई और पुलिस को भी राहत मिली। बाद में कई पुलिस अफसरों के बदले जाने के बाद मोहल्लों में गठित टीम की बातों को तत्कालीन अफसरों ने तव्वजो देना बंद कर दिया। इसके कारण धीरे-धीरे लोग भी पुलिस से दूरिया बनाने लगे।

अब जब लगातार राजधानी में अपराध में बढ़ोत्तरी होने लगी तब डीजीपी के निर्देश पर रायपुर कप्तान अजय यादव ने प्रबुद्धजनों के साथ छात्र, समाज सेवा से जुड़े लोगों को पुलिस मित्र बनाने के निर्देश सभी सीएसपी, थानेदारों को दिया है, ताकि उनकी मदद से एक बार फिर से कम्युनिटी पुलिसिंग को मजबूत किया जा सके।

पुलिस मित्र की मदद से अपराध पर कसेंगे नकेल-अजय यादव

एसएसपी अजय यादव ने बताया कि अब वार्ड, मोहल्लों में फ्रेड्स आफ पुलिस बनाकर उनकी मदद से गुंडे-बदमाशों पर नकेल कसी जाएगी। इसके लिए शहर के प्रबुद्धजनों के साथ छात्र, युवाओं और समाज सेवा से जुड़े लोगों को पुलिस मित्र बनाया जाएगा। उनकी मदद से अपराध होते ही तुरंत सूचना मिल जाएगी।

डीजीपी डीएम अवस्थी ने भी पुलिस अधिकारियों की बैठक लेकर फ्रेंड्स ऑफ पुलिस के कांसेप्ट को आगे बढ़ाने को कहा है। लिहाजा राजधानी के चौक-चौराहों पर पुलिस बल की तैनाती के साथ ही अफसरों को भी मैदान में उतारा जा रहा है। एसएसपी यादव ने कहा कि कम्युनिटी पुलिसिंग के साथ साइबर सेल के माध्यम से अपराध को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।