Video:नेशनल लोक अदालत में 870 मामलों का हुआ निराकरण, 18 करोड़ से ज्यादा की समझौता राशि हुई तय

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रायपुर । राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा के निर्देश पर आज नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर के जिला न्यायाधीश रामकुमार तिवारी के मार्गदर्शन में जिला न्यायालय रायपुर एवं रायपुर जिले के अन्य तहसील न्यायालय में भी नेशनल लोक अदालत आयोजित की गई। रायपुर जिले में नेशनल लोक अदालत में कुल 1385 मामलों को सुनवाई हेतु रखा गया था जिसमें से 870 मामलों का आपसी राजीनामा के आधार पर लोक अदालत में निपटारा किया गया ।रायपुर के पश्चात बिलासपुर जिले में 698 प्रकरण और दुर्ग जिले में 532 मामलों का निराकरण हुआ।

लॉकडाउन के दौरान लोगों के आपसी झगड़ों से संबंधित मामले

इस बार की लोक अदालत में बड़ी संख्या में उन मामलों का निराकरण हुआ , जो लॉकडाउन के दौरान लोगों के आपसी झगड़ों से संबंधित थे।

न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ सुमित सोनी की अदालत में राजीनामा के आधार पर प्रकरण हुआ निरस्त

न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ सुमित सोनी की अदालत में चेक बाउंस से संबंधित एक मामला आया । यह मामला 16 जनवरी 2015 का है। इस मामले में परिवादी रंजना पांडे ने आरोपी दीपक देवांगन के खिलाफ चेक बाउंस का मामला दर्ज किया था। जिसमें परिवादी को आरोपी से 46 हजार रुपए की राशि लेनी थी। आज नेशनल लोक अदालत में इस प्रकरण में राजीनामा के माध्यम से प्रकरण को निरस्त किया गया। आपको बता दें कि इस मामले में आरोपी दीपक देवांगन जो कि पेशे से ड्राइवर का काम करता था। कोरोना में उसकी नौकरी चली गई थी। आज दीपक देवांगन कोर्ट पहुंचा और जज डॉ सुमित सोनी के सामने रोते हुए उसने अपनी व्यथा सुनाई और अपने साथ लाए हुए 17 हजार रुपए सामने रख दिए। जिनमें से कुछ 1-1 के सिक्के थे तो वही कुछ 10-20 के नोट थे । उसने रोते हुए बताया कि 17 हजार रूपए में से कुछ रुपए अपने बेटे की गुल्लक में से लेकर आया है। इससे ज्यादा अभी उसके पास पैसे नहीं है। न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ सुमित सोनी ने उसकी बातों को सुना और इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आपसी राजीनामा से सुलझा दिया। आरोपी द्वारा लोक अदालत में रंजना पांडे को 17 हजार रुपए की नगद राशि प्रदान की, साथ ही शेष 3 हजार रुपए का प्रॉमेसरी नोट प्रदान किया। जिसमें उक्त राशि 2 माह के भीतर वापस देने का लेख है।अभियुक्त एवं परिवादी के मध्य आज नेशनल लोक अदालत में राजीनामा हो गया।और यह मामला जो 5 साल से चल रहा था आज समाप्त हो गया।

न्यायिक मजिस्ट्रेट पवन कुमार अग्रवाल 

न्यायिक मजिस्ट्रेट पवन कुमार अग्रवाल के न्यायालय में एक मामला आया। जो पुरानी बस्ती थाना से संबंधित है।इस मामले में रेलवे स्टेशन रायपुर में पुस्तक की दुकान लगाने वाले एक व्यक्ति ने लॉकडाउन को देखते हुए रेलवे स्टेशन की दुकान को बंद करके, शहर में दूसरी दुकान खोली और उस दुकान के लिए स्टील रैक बनवाने के लिए महाराजाबंध तालाब के पास के एक दुकानदार को कुछ पैसे एडवांस दिए, लेकिन लॉकडाउन के कारण वह समय पर स्टील रैक नहीं बन सका । जिसके कारण दोनों पक्षों के मध्य लड़ाई झगड़ा और मारपीट हुई और दोनों ही पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ थाना पुरानी बस्ती में रिपोर्ट लिखाई। आज नेशनल लोक अदालत में दोनों पक्षों ने न्यायालय की समझाइश पर आपस में राजीनामा किया।

न्यायिक मजिस्ट्रेट चेतना ठाकुर

लॉकडाउन के समय कुछ अलग-अलग प्रकार की घटनाएं घटित हुई। ऐसी ही एक घटना 31 अगस्त को घटित हुई थी। यह मामला खम्मारडीह थाने का था । जिसमें एक बेटे ने अपनी मां से कुछ पैसों की मांग की थी और मां उस समय पैसे नहीं दे पाई । तब गुस्से में आकर बेटे ने अपनी मां को बेलन से मारा । जिस पर मां ने खम्मारडीह थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई । जिसका चालान 3 दिसंबर को पेश किया गया था । आज यह मामला लोक अदालत में न्यायिक मजिस्ट्रेट चेतना ठाकुर की अदालत में आया । तो बेटे ने मां के पैर छूकर माफी मांगी और बोला कि आगे से इस प्रकार की गलती नहीं करेगा।और आज इस प्रकार यह मामला आपसी राजीनामे से समाप्त हो गया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव उमेश कुमार उपाध्याय ने जानकारी देते हुए कहा कि हमेशा की तरह इस बार भी सभी अधिवक्तागण एवं आमजन ने इस नेशनल लोक अदालत में उत्साह पूर्वक हिस्सा लिया। जिला न्यायालय रायपुर में कुल 24 खंडपीठ का गठन किया गया था। तहसील स्तर पर भी अलग-अलग खंडपीठ बनाई गई थी।ध्यान में रखते हुए इस नेशनल लोक अदालत में पक्षकारों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय में आए बिना मामलों का निराकरण कराने हेतु प्रोत्साहित किया गया।