रायपुर द्वारा नेशनल लोक अदालत ने निभाई अग्रणी भूमिका, भारत की आजादी का मनाया गया अमृत महोत्सव

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रायपुर । राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण,नई दिल्ली के नेशनल लोक अदालत के वार्षिक कैलेण्डर के अनुसरण में दिनांक 11 सितम्बर 2021 को जिला न्यायालय परिसर रायपुर, जिला गरियाबंद, तहसील तिल्दा,राजिम तथा देवभोग के सिविल तथा राजस्व न्यायालयों में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया।

नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ कोविंड प्रोटोकॉल का पालन करते हुऐ जिला एवं सत्र न्यायाधीश माननीय अरविन्द वर्मा द्वारा दीप प्रज्वलित करके तथा राष्ट्रगान से किया गया। नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ विशेष रुप से वन्य प्राणीयों के संरक्षण के सकल्प के साथ हुआ तथा न्यायाधीश वर्मा द्वारा कहा गया कि, वन्य प्राणियों की सुरक्षा करना हमारा मौलिक कर्तव्य है। शुभारंभ में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के अतिरिक्त कुटुम्ब न्यायालय के न्यायाधीश बी.के. शास्त्री, अन्य न्यायाधीशगण,न्यायिक कर्मचारी, समस्त विभागो के अधिकारीगण, अध्यक्ष अधिवक्ता संध रायपुर आशीष कुमार सोनी, सचिव कमलेश पाण्डे तथा अन्य पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।

भारत की आजादी का अमृत महोत्सव मनाया गया

नालसा तथा सालसा के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर द्वारा नेशनल लोक अदालत के माध्यम से आजादी के 75 वें वर्ष को आजादी के अमृत महोत्सव के साथ आयोजित किया गया। इस बार अमृत महोत्सव के तहत पैरालीगल वॉलिन्टियर्स के माध्यम से लोक अदालत मे उपस्थित पक्षकारगण को नालसा तथा सालसा की विभिन्न निःशुल्क विधिक योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त भारत सरकार तथा राज्य सरकार की किन-किन योजनाओं का लाभ जनता को प्राप्त हो सकता है, उसकी भी जानकारी प्रदान की गई।

जिला न्यायाधीश ने दुखियारी महिलाओं को दिया न्याय लाखों रूपये का अवार्ड पारित किया

जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविन्द कुमार वर्मा के न्यायालय में विडियो कॉलिंग के माध्यम से मिला लाखों रुपया का मुआवजा

विदित है कि, रायपुर परिक्षेत्र के मोटर दुर्घटना के दो मामले जिला एवं सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में लंबित थे। एक प्रकरण में पीड़िता इरमा लकड़ा ग्राम सराईटोली कस्तूरा जिला जशपुर तथा एक पीड़िता पूनम देवी थाना डंडारी जिला बेगुसराई बिहार में रह रहे थे। दोनों ही परिवार के कमाई करने वाले व्यक्तियों की मृत्यु दुर्घटना से हो गयी थी। दोनों ही परिवारों में बुजुर्ग सास-ससुर तथा चार साल तक के बच्चे थे। जिनका कोरोना काल में जीवन-यापन करना संकटपूर्ण हो गया था। किसी भी अड़चन को न लाते हुए न्यायाधीश द्वारा केवल न्याय का दीप एक परिवार तक पहुचाने के उद्देश्य को लेकर दोनो पक्षों से विडियो कॉलिंग कर इरमा लकड़ा को 13,95,000/- तथा पूनम देवी को नौ लाख रूपये का मुआवजा प्रदान किया।

कुटुंब न्यायाधीश के समझाने मात्र से पति-पत्नी हाथो में हाथ लेकर न्यायालय से राजीखुशी घर गए

परिवार न्यायालय में देवरी निवासी का तलाक का मामला बृजेश
कुमार शास्त्री प्रथम अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश में चल रहा था जो न्यायाधीश के समझाने पर दोनों दंपत्ती एक होकर राजीखुशी घर गए। वहीं परिवार न्यायालय में रामसागर पारा रायपुर निवासी का वर्ष 2019 से तलाक का मामला संतोष कुमार आदित्य द्वितीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश में चल रहा था और वर्ष 2018 से दोनों अलग-अलग रह रहे थे। जो न्यायाधीश के समझाने पर दोनों दंपत्ती एक होकर राजीखुशी घर गए और प्रकरण को समाप्त करवा दिया।

प्रदेश में पहली बार घरेलू हिंसा के मामले प्री-लीटिगेशन के तहत राजीनामा से निराकृत हुए

जिला रायपुर प्रदेश का पहला जिला बना जहाँ घरेलू हिंसा के मामले न्यायालय में दाखिल होने से पहले ही पति पत्नी की आपसी सहमति से प्री-लीटिगेशन के माध्यम से निराकृत हो गये। विदित हो कि घरेलू हिंसा से महिलाओ का संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत किसी भी महिला को एक लंबी प्रकिया से गुजरना पड़ता था, तब उसका मामला न्यायालय तक पहुंच पाता था। परन्तु लोक अदालत के माध्यम से अब किसी भी महिला को लंबी प्रकिया से गुजरना नही होगा और उन्हे त्वरित न्याय प्राप्त हो जावेगा।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर, महिला एवं बाल विकास तथा सखी वन स्टाप सेन्टर के संयुक्त प्रयास से यह संभव हो सका । और 11 परिवार को जो बिखरने की कगार पर थे, वे परिवार न्यायाधीश मनोज कुमार प्रजापति, सभापति स्थाई लोक अदालत के प्रयास से एक हो गये।

सभी परिवार में हिंसा के प्रमुख कारण अविश्वास या केवल आपसी मनमुटाव मात्र था। न्यायाधीश ने सभी दम्पत्ति को समझाया कि नर का अस्तित्व नारी के बिना अपूर्ण है ।और हमर अंगना तभी खुशहाल रह सकता है जब अंगना से हिंसा बाहर हो जायें। न्यायाधीश के समझाने पर 11 परिवार एक हो गये और हिंसा का रास्ता छोड़ प्रेम के रास्ते पर चलने का वचन देकर राजीखुशी घर साथ-साथ गये।

उद्देश्य है न्याय सबके लिए, सबके द्वार जिसे पूरा करने प्राधिकरण पहुँचा प्रादेशिक सीमा पार

कोई भी सीमा न्याय के परिन्दों को पहुंचने से रोक नही सकती है। यह तथ्य लोक अदालत के माध्यम से कुमारी चेतना ठाकुर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की खण्डपीठ में सार्थक हुआ। प्रकरण थाना खम्हारडीह का है। जिसमें पति द्वारा पत्नि के साथ मारपीट किये जाने से वह अन्य राज्य आन्ध्रप्रदेश चली गई। न्यायाधीश पत्नी से वीडियो कॉल के माध्यम से बात की गई। जिसमें उनके द्वारा समझाया गया कि, दाम्पत्य जीवन प्रेम का प्रतीक है और पृथक हो जाना उस प्रेम के प्रतीक को विलुप्त करने के सामान है। तब वीडियो कॉल पर ही पति ने अपनी पत्नी से माफी मांगते हुए दोबारा पूर्व में किसी प्रकार का र्दुव्यवहार न करने का वचन दिया। इस प्रकार न्यायाधीश के अथक प्रयास से एक परिवार को न्याय प्राप्त हो सका।

प्रदेश में पहली बार मानक भाड़ा नियंत्रण अधिनियम 2011 के तहत 08 प्रकरणों का भी प्रीलिटिगेशन के माध्यम से निराकरण सुनिश्चित किया गया

न्याय तुंहर द्वार को किया चरितार्थ

इस बार विशेष रूप से नेशनल लोक अदालत में उन पक्षकारों के लिए मोबाईल बेन की व्यवस्था की गयी थी, जो की किसी भी निर्योग्यता के कारण न्यायालय में उपस्थित होने में असमर्थ थे। इसी तारतम्य में विकम प्रताप चन्द्रा द्वादश अतिरिक्त मोटर दुर्घटना
दावा अधिकरण रायपुर के द्वारा सुखबती यादव उम्र करीब 65 साल जो कि लकवाग्रस्त होने के कारण से चलने फिरन व न्यायालय आने में असमर्थ थी, जिसको मोबाईल बेन के माध्यम से खण्डपीठ से जोड़ा गया और पांच लाख रूपये मुआवजे के रूप में प्रदान कराया गया।

इसी प्रकार गिर्जेश प्रताप सिंह न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी रायपुर के द्वारा मारपीट के एक मामले में राजीनामा कराया जिसमें प्रार्थी किसी बीमारी के कारण रायपुर के अस्पताल में भर्ती था । जिसे मोबाईल बन के माध्यम से प्रार्थी के पास जाकर विडियो कान्फ्रेसिंग कराकर स्वेच्छापूर्वक राजीनामा कराया गया। जिसमें प्रार्थी ने बताया कि उक्त सेवा न्याय की एक नई परिभाषा लिखेगा।

एकादश अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के न्यायालय ने सात लाख रूपये से अधिक के अवार्ड पारित किए

एकादश अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश यशवंत वासनीकर
के न्यायालय में मिला लाखों रूपये का मुआवजा

विदित है कि, रायपुर परिक्षेत्र के मोटर दुर्घटना के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में लंबित थे एक प्रकरण में पीड़ित गायत्री यादव वगैरह राजीव नगर रायपुर में रह रहे थे। उसके परिवार के कमाई करने वाले व्यक्तियों की मृत्यु दुर्घटना से हो गयी थी। किसी भी अड़चन को न लाते हुए न्यायाधीश द्वारा केवल न्याय का दीप एक परिवार तक पहुंचाने के उद्देश्य को लेकर दोनो पक्षों से राजीनामा करके 7,25,000/- का मुआवजा प्रदान किया।

आशोष भगत न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की खण्डपीठ में मारपीट के एक मामले के निराकरण से कुटुंब न्यायालय के दो प्रकरण एक साथ निराकृत हुए

नेशनल लोक अदालत में सुनवाई हेतु रखे गए कुल मामले -27628 जिसमें लगभग 22770 प्रकरणों का निराकरण हुआ।

  • श्रम न्यायालय से संबंधित मामले- 156
  • कुटुम्ब न्यायालय से संबंधित मामले-37
  • स्थायी लोक अदालत-22
  • चेक बाउन्स के मामले-812
  • राजीनामा योग्य आपराधिक मामले, लघु अपराध-4863 लगभग 28 करोड़ रूपए तक का मुआवजा राशि पक्षकारों को प्राप्त हुआ।