8 दिन में खत्म हुआ 12 वर्ष का वनवास,मानसिक रोगी को विधिक प्राधिकरण ने पहुंचाया घर

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रायपुर ।  राजनांदगांव जिले में नवंबर के तीसरे हफ्ते में व्यवहार न्यायालय के पास मिले मानसिक रोगी को आखिरकार शुक्रवार को उसके माता-पिता को सौंप दिया गया। विधिक सेवा प्राधिकरण की स्थानीय टीम ने रेस्क्यू के बाद आठ दिनों तक मेडिकल कालेज अस्पताल में न केवल उसका उपचार कराया, बल्कि बच्चे की तरह प्यार दिया। थोड़ा स्वस्थ होने के बाद 12 वर्ष से घर से लापता युवक जितेंद्र पिता शेष नाग उम्र करीब 32 वर्ष अपने माता-पिता का नाम बता पाया। जितेंद्र कुछ माह से खैरागढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में भटक रहा था।

व्यवहार न्यायालय के पास से विधिक सेवा की टीम से जुड़े गोलू साहू ने दीपावली के बाद उसे खैरागढ़ के सरकारी अस्पताल पहुंचाया।हफ्तेभर तक वहां प्राथमिक उपचार कराने के बाद जितेंद्र को 27 नवंबर को मेडिकल कालेज अस्पताल शिफ्ट कराया गया। इसी दौरान काफी मशक्कत के बाद जितेंद्र का पता-ठिकाना जाना जा सका।

हर बार नया ठिकाना बताता था

बताया गया कि इलाज के दौरान विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्यों ने जितेंद्र के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए काफी मशक्कत की। वह हर बार अपना नाम व पता अलग-अलग बता देता था। इस कारण सही जानकारी जुटाने में टीम को कड़ी मेहनत करनी पड़ी। तीन दिन पहले उसने देवेंद्र नगर रायपुर में राज-राजेश्वरी मंदिर के पास वाला पता बताया। तस्दीक कराने पर जानकारी सही निकली। उसके बाद 12 वर्ष से भटक रहे युवक की घर वापसी का रास्ता खुल पाया।

लेने नहीं आए, तो घर पहुंचाया

बताया गया कि युवक जितेंद्र का परिवार गरीब है। रोजी-मजदूरी करके परिवार चलाया जा रहा है। विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्यों ने जब उनके माता-पिता से संपर्क किया और बेटे के मिलने की जानकारी दी, तो स्वजन खुशी के आंसू रोक नहीं पाए। मगर, गरीबी के कारण अपने बेटे को लेने आ पाने में उन्होंने असमर्थता जात दी। तब प्राधिकरण ने खुद जितेंद्र को उसके माता-पिता तक पहुंचाने का फैसला किया। शुक्रवार को दोपहर करीब 11.30 बजे चार सदस्यों के साथ रायपुर रवाना किया गया।

पैरालीगल वालिंटियर मोहिनी साहू ने बताया कि मानसिक रोग से ग्रस्त युवक कई दिनों से खैरागढ़ और आसपास के क्षेत्र में भटक रहा था। खैरागढ़ में व्यवहार न्यायालय के पास देखे जाने के बाद हमारी टीम ने रेस्क्यू किया। बेहतर उपचार के बाद जब वह सही तरीके से नाम-पता बता सका, तब घर वालों की खोज की जा सकी। आद उसे सकुशल घर पहुंचा दिया गया।