बचाते रहो अपनी पार्टियां,अपने देवता,हम मरते,लूटते… नक्सली हमले में शहीद हुए जवान,तो छलका कुमार विश्वास का दर्द

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छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलियों के साथ हुए मुठभेड़ में अब तक 22 जवानों के शहीद होने की पुष्टि हो चुकी है। पिछले कुछ सालों में नक्सलियों का यह सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है। इस घटना पर प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने जवानों की शहादत पर अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं। इस दुखद घटना पर हिंदी के मशहूर कवि कुमार विश्वास का दर्द भी छलका है। उन्होंने लिखा है कि हमें हमेशा ही दर्द मिलता रहा है कभी देश के बाहर से तो कभी देश के अंदर से।

अपने ट्विटर अकाउंट से कुमार विश्वास ने ट्वीट किया, ‘किससे कहें? सुनेगा भी कौन? सब तो व्यस्त हैं, कोई जीतने में, कोई हारने में।

हर बार बेबस होकर बस रो लेते हैं, सो रो रहे हैं। बचाते रहो अपनी- अपनी पार्टियां और अपने- अपने देवता। हम कंधार से वर्मा तक फैले भारत थे। मरते लूटते रहे थे, रहे हैं.. कभी बाहर कभी अंदर वालों से।’

कुमार विश्वास के इस ट्वीट पर यूजर्स भी अपना दुख व्यक्त कर रहे हैं तो कुछ सरकार को इसके लिए दोषी ठहरा रहे हैं। दीपेंद्र भदौरिया नाम के यूजर ने कविता के जरिए कुमार विश्वास को जवाब दिया, ‘गूंगा बहरापन ओढ़े सिंहासन है, लूले- लंगड़े संकल्पों का शासन है। फूलों का आंगन, लाशों की मंडी है, अनुशासन का पूरा दौर शिखंडी है।’

शैलेंद्र नाम के यूजर ने लिखा, ‘यहां सब अपना साम्राज्य फैलाने में व्यस्त हैं। नेता भाषण देते हुए अंतरिक्ष तक पहुंचने वाले हैं। देश के अंदर ऐसी घटना हो रही है, बहुत दुखद।’ संगीता यादव नाम की एक यूजर लिखती हैं, ‘देश में चुनाव है साहब, सैनिकों की शहादत लाजमी है। छत्तीसगढ़ नक्सली हमले में 22 जवान शहीद हुए, श्रद्धांजलि।’

अन्या ठाकुर नाम की एक यूजर ने लिखा, ‘पार्टी चाहे कोई भी हो, जीत हार उनके लिए सबसे पहले है। उनके लिए तो वो मात्र जवान थे लेकिन उनसे पूछो जिनके घर के वो चिराग थे। निंदा करने के बाद सब फिर से व्यस्त हो जाएंगे अपनी चुनावी सभाओं में।’

इस घटना के मद्देनजर गृहमंत्री अमित शाह असम में से दिल्ली लौट रहे हैं। चुनाव प्रचार के सिलसिले में वो असम में थे जहां से उन्होंने जवानों को श्रद्धांजलि दी।