सीएम बघेल ने कहा लाल किले की घटना किसानों को बदनाम करने का है षड्यंत्र,कहा-फिर भी अपनी मांगों पर डटे किसानों के जज्बे को सलाम

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रायपुर। लाल किले की घटना ने सारे देश को शर्मसार किया है। लेकिन सवाल इस बात का है कि जहां 24 घंटे सेना व पुलिस के जवान रहते हैं, वहां तक वह आदमी घुस कैसे गयाा। डेढ़ से दो घंटा वहां रहा कैसे? अभी तक किसी के पास इसकी जानकारी नहीं है। तो यह सारा षड्यंत्र किसानों को बदनाम करने के लिए हुआ है, फिर भी किसान अपने मांग पर डटे हुए हैं और मैं उनके जज्बे को सलाम करता हूं। यह बात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दंतेवाड़ा के लिए रवाना होने से पहले पत्रकारों से चर्चा में कही।

मुख्यमंत्री बघेल ने हेलीपैड पर पत्रकारों से की चर्चा में आंदोलन में डटे किसानों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक काल की दूरी पर होने की बात पर कहा कि जब भी सरकार बात करने के लिए आमंत्रित करती हैं किसानों के प्रतिनिधि जाकर घंटों बात कर रहे हैं।

तो किसानों की तरफ से कोई गतिरोध तो नहीं है. उनकी एक ही मांग है कि तीन काले कानून को वापस लिया जाए. ढाई महीने होने वाले हैं, उसके बाद भी भारत सरकार हठधर्मिता पर अड़ी हुई है. किसान आंदोलन को कितने प्रकार से बदनाम करने की कोशिश की गई है. कभी आतंकवादी, पाकिस्तानी समर्थक, कभी चीनी समर्थक, कभी खालिस्तानी समर्थक.

उन्होंने कहा कि मन की बात में प्रधानमंत्री ने कहा है कि 26 जनवरी के इंसीडेंट से देश सदमे में है, और जो लोग आंदोलन में शामिल हुए थे, वह किसान नहीं उपद्रवी थे? उपद्रवी थे तो उन्हें पकड़ना चाहिए था. दिल्ली पुलिस भारत सरकार के अधीन है. आखिर लाल किला में कोई आदमी कैसे घुसा. इसे पर तो प्रधानमंत्री को जवाब देना चाहिए. दीप सिद्धू कौन हैं. प्रधानमंत्री के साथ फोटो में दिख रहा है. गृह मंत्री के साथ फोटो दिख रहा है और उसके प्रत्याशी के उपचुनाव के एजेंट थे, तो फिर पकड़ा क्यों नहीं जा रहा है. सवाल तो यही है कि इस प्रकार से देश के तिरंगे के साथ षड्यंत्र करके आंदोलनकारियों को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. यह दुर्भाग्य जनक है.

दंतेवाड़ा के दौरे को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर संभाग के 5 जिले हो चुके थे, दो जगह सुकमा और दंतेवाड़ा बचे हुए थे, इसके साथ दंतेश्वरी माई के दर्शन होंगे और वहां पर बहुत सारे कार्यक्रम है, जिसमें शामिल होना है. फिर कल शाम तक लौटना होगा. दौरे से मिले फीडबैक के सवाल पर उन्होंने कहा कि अलग-अलग जिले में नए-नए नवाचार देखने को मिल रहा है. जनप्रतिनिधि, अधिकारी, बिहान समूह की बहनें उत्साहित होकर नए-नए कार्य कर रहे हैं. इससे रोजगार पैदा हो रहा है. हजारों की तादाद में लोग इससे जुड़ रहे हैं. और क्या-क्या सुधार हो सकते हैं, क्या नए काम हो सकते हैं, यह सब चीजें देखने को मिल रही है.

केंद्र का बजट आ रहा है। इससे क्या उम्मीद लगा कर रखे हैं? इस पर उन्होंने कहा कि पिछले समय 5 हजार 800 करोड़ का बजट हमें नहीं मिला है. वह इस बार उम्मीद है मिल जाए. धान खरीदी में बनाए गए कीर्तिमान को लेकर उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार की नीति किसानों को प्रोत्साहित कर रही है. चाहे बिजली बिल में छूट हो, राजीव गांधी किसान निधि योजना की बात हो इस योजना के तहत हमने एमएससी में खरीद की है, हमने खरीदी केंद्रों का विस्तार किया है.

सीएम ने कहा कि अगर 20 साल में देखें तो सर्वाधिक जमीन पर किसानों ने खेती की, सर्वाधिक किसानों ने धान बेचा व लाभ लिया. इसका मतलब यह है कि छत्तीसगढ़ में कृषि एक लाभ का धंधा बन चुका है। भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में 15 लाख किसान कृषि करते थे, जो अब बढ़कर 21 लाख 50 हजार हो गए हैं, मतलब डेढ़ गुना किसान इस तरह हो गए हैं। इसका मतलब यह है कि हमने उसको लाभ का व्यवसाय बनाया है, उत्पादन भी बढ़ा है, रकबा भी बढ़ा है तो यह यही नीति भारत सरकार को भी अपनानी चाहिए.

लगातार बस्तर के दौरा कर रहे हैं और आप कह रहे थे विभिन्न वर्गों से बातचीत करके विश्वास में लेकर के शांति अवस्था का बहाल होगी? इस पर सीएम ने कहा कि हम बस्तर में विश्वास, विकास और सुरक्षा जिसमें हम विश्वास जीतने की कोशिश की। जितने भी योजनाएं हैं, चाहे लघु वनोपज की खरीदी की बात है, वैल्यू एडिशन की बात है, रोजगार देने की बात है। उनको वहां अधिकार पट्टा देने की बात है, उनके स्वास्थ्य और शिक्षा की योजनाएं शुरू की।

उन्होंने कहा कि डीएमएस के पैसे से पहले सिर्फ बिल्डिंग बनती थी। अब उसके उपचार के लिए इलाज के लिए उसके स्वास्थ्य और शिक्षा और रोजगार के लिए भी काम हो रहे हैं। इसीलिए हजारों युवक-युवतियां इस योजनाओं से जुड़ रहे हैं तो एक विश्वास पैदा हुआ छत्तीसगढ़ शासन के प्रति और इसका फायदा यह हुआ है कि घटनाओं में कमी आई है।

एक हजार करोड़ कर्ज से राज्य पर दबाव बढ़ने के रमन सिंह के बयान पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार खुद कह रही है कर्ज लेने के लिए। पहले रमन सिंह उनको सुझाव दें। जो हमारे जीएसटी का पैसा है उसके अगेंस्ट में भारत सरकार कर्जा को बोल रही है, और यह श्रीमान कह रहे हैं कर्ज ले रहे हैं। इसी को कहते हैं राजा मारे रोन ना दे। एक मुंह में बात करना चाहिए। यह लोग दो मुंहे बात कैसे करते हैं?