चाय और लीची के बाद अब लें सकेंगे छत्तीसगढ़िया अदरक हल्दी का स्वाद

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रायपुर । छत्तीसगढ़ के जशपुर की चाय और सरगुजा की लीची के बाद लोग अब छत्तीसगढ़िया अदरक और हल्दी का भी स्वाद ले सकेंगे। यह राज्य सरकार की कृषि क्षेत्र में बड़े प्रयोग की कवायद का हिस्सा है। राज्य के विभिन्न जिलों की मिट्टी और जलवायु के हिसाब से वहां उद्यानिकी फसलों की खेती की योजना तैयार की गई है।

योजना के पहले चरण में राज्य के 14 जिलों को नौ प्रकार की उद्यानिकी फसलों के लिए चयनित किया गया है। इसमें बालोद जिला अदरक और सूरजपुर जिला हल्दी के लिए उपयुक्त पाया गया है। इसी तरह रायपुर व बेमेतरा में पपीता, दंतेवाड़ा में आम, मरवाही व कांकेर में सीताफल, जशपुर में चाय, कोंडागांव में काजू, कोरिया, मुंगेली, रायगढ़ व दुर्ग जिले में टमाटर और सरगुजा जिले में लीची की खेती को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

अफसरों के अनुसार जिलों में इनकी खेती छोटे पैमाने पर हो रही है। अब सरकार इन्हें बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगी। उद्यानिकी संचालक माथेश्वरन वी. ने बताया कि विभाग द्वारा एक जिला-एक उत्पाद कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। योजना के तहत चिन्हित फसलों की खेती करने वाले किसानों को विभाग की तरफ से आवश्यक मार्गदर्शन के साथ तकनीकी समेत व अन्य सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। अफसरों ने बताया कि इन उत्पादों के लिए सरकार द्वारा सी-मार्ट समेत अन्य योजना के तहत बाजार भी उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी।

इस सीजन में एक लाख पोषण बाड़ियां होंगी विकसित

उद्यानिकी विभाग ने इस खरीफ सीजन में राज्य में एक लाख पोषण बाड़ियां विकसित करने की योजना तैयार की है। इस योजना के लिए हितग्राहियों का चयन गोठान विकास के लिए चिन्हित ग्रामों में कलस्टर के रूप में किया जा चुका है। हितग्राहियों को फलदार पौधे, विभिन्न प्रकार के सब्जियों के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे।

उद्यानिकी विभाग के नर्सरियों में बड़े पैमाने पर नींबू, अमरूद, कटहल, मुनगा आदि के पौधे तैयार किए गए हैं, जिसमें से लगभग 15 लाख पौधों का वितरण पोषण बाड़ी विकास योजना के तहत किया जाएगा। राज्य में बीते दो सालों में इस योजना के तहत ग्रामीण किसानों के आवास के समीप स्थित भूमि में दो लाख बाड़ियों का विकास किया जा चुका है।