रायपुर के नदी-तालाबों में स्नान कर किया पितरों को तर्पण

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रायपुर । श्राद्ध पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर मंगलवार को सुबह से घर – घर में और नदी तालाब में पितरों के निमित्त अर्पण तर्पण किया जा रहा है।

श्रद्धालुओं ने रायपुर के नदी तालाबों में स्नान करके हाथ में कुशा धारण कर जल अर्पित किया। दोपहर को ब्राम्हण भोजन करवाकर कौआ और अन्य जीवों को भोजन का ग्रास खिलाने की रस्म निभाएंगे। 21 सितम्बर मंगलवार से शुरू हुआ पितृ पक्ष 6 अक्टूबर तक चलेगा। पंडित मनोज शुक्ला के अनुसार शास्त्रों में बताया गया है कि गृहस्थ मनुष्य को प्रतिदिन चांदी , तांबा या कांसा के पात्र द्वारा तर्पण करना चाहिए।

ये भ्रांतियां दूर करें

पितृपक्ष को लेकर लोगों के मन में अलग-अलग प्रकार की भ्रांतियां फैली हुई है । पितृपक्ष में कई प्रकार की भ्रांतियां फैली हुई है । महामाया मंदिर के पंडित मनोज शुक्ला ने जानकारी देते हुए कहा कि लोगों के अंदर यह भ्रांति है कि पितृपक्ष के अंदर दैनिक पूजन या अन्य कोई पूजन करना चाहिए या नहीं, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि पितृपक्ष के समय दैनिक पूजन या अन्य कोई पूजन ना करें। सभी प्रकार के पूजा पाठ पित्र पक्ष में किए जा सकते हैं।

पंडित मनोज शुक्ला ने कहा कि एक भ्रांति यह भी है कि लोग यह सोचते है गया श्राद्ध कर लेने के पश्चात तर्पण नहीं किया जाता । पंडित जी ने जानकारी देते हुए कहा कि शास्त्रों में गया श्राद्ध को नित्य बताया गया है अर्थात आप जितनी बार भी गया जाए इतनी बात तर्पण करें और हर पितर पक्ष में तर्पण अवश्य करें । जिससे पितरों को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद सदैव बना रहता है।

पंडित मनोज शुक्ला ने कहा कि भगवान श्री राम, सीता जी और लक्ष्मण जी के साथ स्वयं भी इस स्थान पर अपने पिता दशरथ का पिंडदान किए थे। तब से इस स्थान पर यह माना जाने लगा है कि कोई भी व्यक्ति अपने पितरों के निमित्त गया जी में आकर पिंडदान करेगा ,तो उसके पितर इस पिंडदान से तृप्त रहेंगे। शास्त्रों में बताया गया है कि इस प्रकार पिंड दान करने से व्यक्ति पित्र ऋण से उऋण हो जाएगा । इस तरह से पुराण में यह प्रमाणित है कि गया श्राद्ध करने से पितर ऋण से व्यक्ति उऋण हो सकता है । लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि व्यक्ति को पितर पक्ष में तर्पण नहीं करना चाहिए।

लोगों का यह भी कहना होता है कि घर में यदि कोई बड़ा है तो वही केवल तर्पण करेगा जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है । इसके बारे में यह बताया गया है कि यदि घर में चार भाई हैं तो चारों को तर्पण करना चाहिए। क्योंकि माता-पिता ने सभी बच्चों को एक समान जन्म दिया है और एक समान प्यार दुलार दिया है और सभी अपने माता पिता की संपत्ति के बराबर के हिस्सेदार है ।

भारतीय धर्मग्रंथों के अनुसार मनुष्य पर तीन प्रकार के ऋण प्रमुख माने गए हैं। पितृ ऋण, देव ऋण तथा ऋषि ऋण। इनमें पितृ ऋण सर्वोपरि है। भगवान राम ने पिता दशरथ और जटायु के लिए तथा भगवान कृष्ण ने अपने मामा कंस के लिए श्राध्द किया था। इसलिए सबको अपने पितरों के निमित्त जरूर करना चाहिए।